लोकसभा चुनाव  / हर चुनाव में बड़े कैंडिडेट के साथ सेम नेम के कैंडिडेट इत्तेफाक या वोटरों को भ्रम में डालने की सियासत



Candidates named Same in Punjab
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Candidates named Same in Punjab

  • 2014 में जेटली, कैप्टन, मनप्रीत और ढींडसा के नाम के सेम कैंडिडेट मैदान में थे
  • 2009 में दलजीत चीमा, मोहिंद्र सिंह केपी और घुबाया के नाम के सेम कैंडिडेट थे 

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2019, 05:29 AM IST

चंडीगढ़. पिछले चुनाव देखें तो एक बड़ी ही रोचक बात नजर आई है। 2009 और 2014 में बड़े कैंडिडेट के साथ सेम नेम के कैंडिडेट भी मैदान में थे। कैंडिडेट का सेम नाम का होना इत्तेफाक है, या फिर वोटरों को भ्रम में डालने की राजनीति। कुछ भी हो, चुनाव में सेम नाम दिखने से वोटर जरूर धोखा खा जाते हैं। यह हम नहीं कह रहे। यह आंकड़े साल 2009 व साल 2014 में हुए लोक सभा चुनाव के हैं। सबसे अहम 2014 का चुनाव था।

 

इसमें अमृतसर से भाजपा ने अरुण जेटली को उतारा तो वहां आजाद अरुण जोशी आ गए। जेटली का मुकाबला कांग्रेस के कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ था। वहां आजाद अमरिंदर सिंह आ गए। ऐसे ही बठिंडा में मनप्रीत सिंह बादल, संगरुर में सुखदेव सिंह ढींडसा व भगवंत मान के सेम नाम के कैंडिडेट भी मैदान में आने से पीछे नहीं रहे। यही हाल 2009 में भी था। उस समय भी केपी, ढींडसा व दलजीत चीमा के नाम के सेम कैंडिडेट थे। 

 

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