कारगिल विजय / युद्ध में खत्म हो गईं थी सतपाल सिंह की गन में गोलियां; 4 पाकिस्तानियों को लात-घूंसों से मार गिराया



भवानीगढ़ में चौराहे पर तैनात सतपाल सिंह की फाइल फोटो। भवानीगढ़ में चौराहे पर तैनात सतपाल सिंह की फाइल फोटो।
CM Captain Amrinder Singh Announced to Promot Vir Chakra awardee Satpal Singh
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भवानीगढ़ में चौराहे पर तैनात सतपाल सिंह की फाइल फोटो।भवानीगढ़ में चौराहे पर तैनात सतपाल सिंह की फाइल फोटो।
CM Captain Amrinder Singh Announced to Promot Vir Chakra awardee Satpal Singh

  • 2009 में सेना से बतौर सिपाही रिटायर हो 2010 में पंजाब पुलिस में भर्ती हुए थे पटियाला जिले के सतपाल सिंह
  • इन दिनों संगरूर जिले के कस्बा भवानीगढ़ में ट्रैफिक विंग में हेड कॉन्स्टेबल के तौर पर दे रहे हैं सेवाएं
  • कारगिल विजय दिवस पर वीरों के बलिदान को नमन करते हुए सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किया पदोन्नति का ऐलान

Dainik Bhaskar

Jul 27, 2019, 10:16 AM IST

जालंधर (बलराज सिंह). आज कारगिल विजय की 20वीं वर्षगांठ है। 8 मई से 26 जुलाई तक चले कारगिल युद्ध में 7 जुलाई का दिन भारतीय शौर्य गाथा में जरूर लिखा जाएगा। पंजाब के एक वीर सैनिक ने इस दिन अपने अदम्य साहस का परिचय देते हुए मां भारती को गौरवान्वित किया था। पाकिस्तान की ओर से किए गए हमले का जवाब देते समय सिपाही सतपाल सिंह की एलएमजी की गोलियां खत्म हो गईं थीं। बंदूक को एक तरफ करके सतपाल पाकिस्तानियों से भिड़ गए और लात-घूंसे मारकर 4 हमलावरों को ढेर कर दिया। उनके इस पराक्रम के लिए उन्हें वीर चक्र से नवाजा गया।

 

सतपाल सिंह के मुताबिक युद्ध के दौरान जब 19 ग्रेनेडियर्स की टुकड़ी टाइगर हिल पर तिरंगा फहराने की तैयारी में थी तो 8 सिख रेजिमेंट की एक टुकड़ी को मदद के  लिए जाने का आदेश मिला। इस खास टुकड़ी का हिस्सा सतपाल सिंह थे। 2 अफसर, 4 जेसीओ और 46 दूसरे रैंक के जवानों की टुकड़ी ने 5 जुलाई की शाम को टयागर हिल की ओर रवाना हुई। 7 जुलाई को भारतीय टुकड़ी को पीछे हटाने के लिए पाकिस्तान की तरफ से काउंटर अटैक किया गया।

 

एक के बाद एक को हराकर हमारा निशाना अगला होता था। कई अफसरों और जेसीओ समेत 8 के शहीद होने के बाद पहले से ही सिर में गोली लगी होने के बावजूद सूबेदार निर्मल सिंह ने कमांड अपने हाथ में ले ली। 'बोले सो निहाल-सत श्री अकाल' का नारा बोलते हुए हम आगे की तरफ बढ़ गए।

 

सतपाल की एलएमजी (लाइट मशीन गन) में सिर्फ चार गोलियां बची थी, जबकि पाकिस्तान की तरफ लंबी-चौड़ी कद-काठी वाला एक अफसर फायरिंग के साथ कवरिंग मैथड के साथ ताबड़तोड़ हमले कर रहा था। बात दोनों तरफ से एक-दूसरे को गाली-गलौच और फिर हाथापाई तक आ गई।  सतपाल ने उस शख्स को दबोचकर जमीन पर पटक दिया। उसके तीन साथी उस पर चढ़ गए तो उसने तीनों को पटक दिया। चारों को बेल्ट और लात-घूंसों से बुरी तरह से पीट दिया था। इसकी खबर फैलते ही पाकिस्तानी खेमे के हौसले पस्त हो गए थे। बाद में उसे पता चला कि मारे गए एक शख्स शेर खां को पाकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान निशान-ए-हैदर से सम्मानित किया गया। वह टुकड़ी का कैप्टन था। सतपाल के मुताबिक उसकी बहादुरी को देखते हुए 1999 में ही राष्ट्रपति केआर नारायणन ने वीर चक्र से सम्मानित किया। 

 

ब्रिगेडियर ने की थी वीर चक्र की सिफारिश

सतपाल सिंह को वीर चक्र से नवाजा गया था। उन्हें यह सम्मान तत्कालीन ब्रिगेडियर एमपीएस बाजवा की सिफारिश पर मिला। पूर्व बिगेडियर बाजवा कहते हैं, 'टाइगर हिल पर सतपाल के अदम्य साहस को और शौर्य को देखते हुए मैंने उसका नाम वीर चक्र के लिए मार्क किया था।'

 

खास दिन पर मिला खास सम्मान

सतपाल सिंह संगरूर जिले के कस्बा भवानीगढ़ में ट्रैफिक पुलिस में हेड कॉन्स्टेबल हैं। यहां कारगिल विजय दिवस के मौके पर उन्हें सम्मान मिला है। चंडीगढ़ में वार मेमोरियल पर शहीदों को नमन करने के बाद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सतपाल को हेड प्रोमोट करके एएसआई बनाने का ऐलान किया है। हालांकि यह खुशखबरी सतपाल सिंह को पटियाला इंटरनेट कॉलंग के जरिये मिली।

 

सतपाल सिंह और उनका परिवार

इन दिनों संगरूर जिले के कस्बा भवानीगढ़ में चौराहे पर लोगों को ट्रैफिक रूल्स फॉलो करवाने का जिम्मा संभाले हुए सतपाल सिंह कोई मामूली पुलिस वाला नहीं है। सीने पर चार मेडल हैं। ऊपर की पट्‌टी का रंग आधा नीला तो आधा नारंगी है, यानि वीर चक्र। यह मूल रूप से पटियाला जिले के गांव फतेहपुर से संबंध रखते हैं।

 

सतपाल सिंह की 70 वर्षीय मां गुरदेव कौर, पत्नी हरविंदर कौर और तीन बच्चे पटियाला में रहते हैं। तीन बच्चों में सबसे बड़ा बेटा मनिंदर सिंह 25 साल का है, दो बेटियों में बड़ी कोमलप्रीत कौर 22 साल की है तो सबसे छोटी अर्शदीप कौर की 19 साल की हैं।

 

पहले पिता फौजी थे तो फिर बेटा

दैनिक भास्कर प्लस ऐप्प के साथ बात करते हुए सतपाल सिंह बताते हैं कि उनके पिता अजायब सिंह ने भी 1961 से 1981 तक सेना में रहकर भारत मां की सेवा की है। 1965 और 1971 की दोनों लड़ाइयों में उन्होंने योगदान दिया। इसके बाद सतपाल भी पिता के नक्शे कदम पर चलकर 1992 में सेना में भर्ती हुए। 2009 में सर्विस पूरी करने के बाद सेना से सिपाही के पद से रिटायर हुए सतपाल सिंह 2010 में एक्स सर्विस कोटे से पंजाब पुलिस में भर्ती हो गए। इन दिनों वह पंजाब पुलिस की ट्रैफिक विंग में हेड कॉन्स्टेबल हैं।

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