मॉनसून / पंजाब में बाढ़ की स्थिति गंभीर, कैप्‍टन बोले-बारिश हुई तो बिगड़ सकते हैं हालात



CM Captain Amrinder visits flood area of Jalandhar and Kauprthala
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  • सतलुज की बाढ़ से स्थित नाजुक है जालंधर जिले के शाहकोट डिविजन के 18 गांवों में
  • जैसे ही सेना के दो बचाव दल बोट के जरिए इन गांवों में पहुंचे तो पानी व बिस्कुट-नमकीन के लिए लोग टूट पड़े

Dainik Bhaskar

Aug 22, 2019, 07:52 PM IST

जालंधर. पंजाब में बाढ़ की स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है। पंजाब में सतलुज दरिया में आई बाढ़ से जालंधर, कपूरथला, फिरोजपुर व फाजिल्का में सैकड़ों गांव पांच से छह फीट पानी में डूबे हुए हैैं। जालंधर व कपूरथला में सेना व एनडीआरएफ के जवान मोर्चा संभाले हुए हैैं। इस बीच गुरुवार को मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह ने बाढ़ग्रस्‍त क्षेत्रों का दौरा किया। उन्‍होंने कहा कि हालात में सुधार हो रहा है, लेकिन अगले दो-तीन में बारिश हुई तो स्थिति बिगड़ जाने की आशंका है।

 

 

 

दरअसल बाढ़ग्रस्त 18 गांवों में स्थित नाजुक है। यहां घर डूब चुके हैं और लोग तेज धूप व भीषण गर्मी में सामान लेकर छतों पर बैठने को मजबूर हैं। न पीने को पानी है और न ही खाने को पर्याप्त सामान। पशुओं के लिए चारा तक नहीं है। लोग बीमार हैं, लेकिन दवाइयां नहीं। गांव में बाढ़ के पानी से अब सूखी जगहें बहुत थोड़ी ही बची हैं, जहां पर ग्रामीणों ने पशुओं के साथ डेरा जमा रखा है। बुधवार को जैसे ही सेना के दो बचाव दल बोट के जरिए इन गांवों में पहुंचे तो पानी व बिस्कुट-नमकीन के लिए लोग टूट पड़े। जिसके हाथ जो लगा, वो ले गया। बचाव दल धक्का बस्ती पहुंचा तो यहां तिरपाल के लिए लोग टूट पड़े। मुख्तियार सिंह ने कहा कि तेज धूप और गर्मी बहुत है, ट्रांसफार्मर पानी में डूब चुके हैं, सहारे के लिए सिर्फ छतें बची हैं। वहां भी कैसे बैठें, तिरपाल मिल जाएगा तो कम से कम धूप से तो बच जाएंगे। गट्टा मुंडी काशू में ग्रामीणों ने बचाव दल से दवाएं मांगी कि उनके बच्चे बीमार हैं, कैसे इलाज कराएं, लेकिन दवाएं उपलब्ध नहीं थीं।

 

राहत कार्य में हेलीकॉप्टर के प्रयोग पर उठ रही हैं अंगुलियां
प्रशासनिक अमलों में इस बात की भी चर्चा है कि एनडीआरएफ नहीं चाहती थी कि राहत व बचाव कार्य के लिए हेलीकॉप्टर का प्रयोग किया जाए। एनडीआरएफ के सूत्रों का कहना है कि उन्होंने इस संदर्भ में प्रशासन को बोला भी था कि स्थिति इतनी भयावह नहीं है। एनडीआरएफ मौके की स्थिति को संभाल लेगी, लेकिन प्रशासन ने इस मामले में कोई रिस्क लेना उचित नहीं समझा। इसके चलते राहत कार्यों के लिए सेना के हेलीकॉप्टर की मदद भी ली गई। गुरुवार को भी हेलीकॉप्टर की मदद से राहत सामग्री लोगों तक पहुंचाई जाएगी। राहत कार्य में जुटे हेलीकॉप्टर बाढ़ ग्रस्त इलाके में जब लोगों को खाने के पैकेट फेंकने गए तो उसकी हवा के प्रेशर से एक मकान की छत गिर गई। बचाव रहा कि मकान पूरी तरह से पानी में डूबा हुआ था और छत पर कोई नहीं था।

 

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह गुरुवार को कपूरथला और जालंधर के बाढ़ ग्रस्‍त इलाकों में पहुंचे। उन्‍होंने बाढ़ के पानी में गांवों का हवाई निरीक्षण भी किया। वह बाढ़ प्रभावित गांवों में गऐ और लोगों से बातचीत की। उन्‍होंने राहत और बचाव कार्य में जुटे अधिकारियों व कर्मचारियों और सेना के जवानों से हालत के बारे में जानकारी ली।

 

मुख्‍यमंत्री जालंधर के शाहकोट सब डिवीजन के लोहियां इलाके में पहुंचे। कैप्‍टन अमरिंदर ने कहा कि वह सुबह से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है। सतलुज दरिया में पड़ी दरारों को भरने का काम शुरू कर दिया गया है। सेना इस काम में लगी हुई है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर अगले दो-तीन दिनों में बारिश हुई तो हालात बिगड़ सकते हैं। इसी वजह से सरकार सेना के साथ मिलकर कोशिश कर रही है कि जल्द से जल्द इन दरारों को भर दिया जाए।

बाढ़ प्रभावित गांवों में फंसे लोगों की परेशानी के सवाल पर कैप्टन ने कहा कि उनको खाना, पेयजल और दवाइयां मुहैया कराई जा रही हैं। लोगों को जिला प्रशासन की तरफ से गांव को खाली करने के लिए समझाया जा रहा है ताकि उन्हें सुरक्षित स्थानों परले जाया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार से प्राकृतिक आपदा फंड से राहत मांगी गई है। अगर वह नहीं भी मिली तो राज्य सरकार अपने स्तर पर बाढ़ प्रभावितों को राहत देने का पूरा इंतजाम करेगी, चाहे उसके लिए दूसरा कोई भी काम क्यों न रुकना पड़े।

लंगर ले जाने वालों को रोका

लोहियां में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के दौरे को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने लोहियां-मक्खू रोड पर ट्रैफिक को रोक दिया। इससे बाढ़ में फंसे लोगों के लिए लंगर लेकर आ रहे समाजसेवी संगठनों के सदस्य भी फंस गए। इसके विरोध में उन्होंने पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और कहा कि सरकार और प्रशासन ही लोगों तक राहत पहुंचाने में अड़ंगा लगा रहा है।

 

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर ने सुल्‍तानपुर लोधी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र सरूपवाल का भी दौरा किया और हालत का जायजा लिया। कैप्टन ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्र में बारिश के चलते भाखड़ा में पानी की जायदा तदाद होने के कारण पानी छोड़ा गया। इसके चलते पंजाब में यह स्थिति बनी है, लेकिन सरकार हर तरह की राहत का प्रबंध करने में जुटी है। कैप्टन ने कहा की पंजाब सरकार वर्ल्ड बैंक के साथ मिलकर इस तरह की स्थिति से बचने के लिए खास योजना बना रही है। इसके तहत पंजाब की नदियों, नालों और ड्रेनों की सफाई की जाएगी। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा की पंजाब सरकार पूरी तरह सतर्क है और गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाशोत्सव की तैयारियों पर इस आफत का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

 

कहां कितना नुकसान?

फिरोजपुर में एनडीआरएफ की टीमों द्वारा 368 लोगों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से निकाला गया है। बाढ़ से जालंधर, कपूरथला, फिरोजपुर, फाजिल्का, रोपड़ व लुधियाना के 326 गांवों में 1.20 लाख एकड़ फसल डूब गई है। इन जिलों में अब तक 5023 लोगों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से निकाला जा चुका है। कपू्रथला के मंड क्षेत्र में सरूपवाल व भरोयाणा के पास धुस्सी बांध टूटने से 60 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इन गांवों के किसानों की 18 हजार एकड़ धान की फसल की डूब गई है। गांव मंडला, दारेवाल, सरूपवाल और भरोयाणा में हालात ज्यादा खराब है। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य में बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई के लिए 1000 करोड़ रुपए का विशेष पैकेज मांगा है। केन्द्र सरकार से बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को बाढ़ पीडि़त किसानों के फसली लोन माफ करने के निर्देश जारी करने की मांग की है।

 

 

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