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कभी जिनकी नहीं हुई टक्कर, अब माझा की दूसरी दमदार सीट पर उन्हीं दोनों के लाल आमने-सामने

2 वर्ष पहले
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  • गुरदासपुर सीट से 12 बार कांग्रेस तो 4 बार भाजपा को मिला मौका, हर बार रही कांटे की टक्कर
  • कांग्रेस से सुखबंस कौर और दीवान चंद को तो भाजपा के विनोद खन्ना को मिला हैट्रिक का मौका
  • कांग्रेस की आखिरी जीत या भाजपा की हार के लिए स्वर्ण सलारिया पर रेप का आरोप बड़ी वजह रही
  • सबसे अहम करतारपुर साहिब गलियारे का मसला गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक से सीधा जुड़ा

जालंधर. पंजाब की हाईप्रोफाइल सीट बन चुकी गुरदासपुर पर इस बार पूरे देश की नजर टिकी है। भाजपा के टिकट पर यहां से बॉलीवुड एक्टर सनी देओल राजनीति में डेब्यू करने जा रहे हैं। सनी का मुकाबला कांग्रेस के सुनील कुमार जाखड़ और आम आदमी पार्टी से पीटर मसीह से है। मुकाबला सनी और जाखड़ के बीच माना जा रहा है।

 

पंजाब में शिरोमणि अकाली दल और भाजपा का गठबंधन है। ऐसे में राज्य की 13 लोकसभा सीटों में से 10 पर शिरोमणि अकाली दल और तीन भाजपा के हिस्से में आई हैं। गुरदासपुर सीट पर अब तक कुल 17 लोकसभा चुनाव हुए। इसमें 12 बार कांग्रेस ने और 4 बार भाजपा ने जीत दर्ज की। चारों बार अभिनेता विनोद खन्ना ने यह सीट जीतकर भाजपा की झोली में डाली। वहीं, 2017 में उनके निधन के बाद फिर से कांग्रेस ने बाजी मार ली।

 

गुरदासपुर सीट से इस बार 16 प्रत्याशी मैदान में है। इस सीट पर महिला नेता सुखबंस कौर कांग्रेस के टिकट पर 5 बार विजयी रहीं। वहीं, कांग्रेस के एक और नेता दीवान चंद भी हैट्रिक बनाने में सफल रहे। बताया जा रहा है कि पुत्र सनी देओल उन सुनील जाखड़ के सामने हैं, जिनके पिता बलराम जाखड़ के खिलाफ चुनाव लड़ने से कभी सनी के पिता धर्मेंद्र ने मना कर दिया था।

 

गुरदासपुर लोकसभा क्षेत्र में मुख्य मुद्दा करतारपुर कॉरिडोर का है।  यह मुद्दा पूरे पंजाब की राजनीति को प्रभावित करता है। एक तरफ भाजपा की केंद्रीय सत्ता तो दूसरी तरफ कांग्रेस भी पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की बदौलत इस मुद्दे पर श्रेय लेने की होड़ में है।

 

कांग्रेस की जीत के बड़े कारण

2017 में उपचुनाव में भाजपा और अकालियों की तुलना में कांग्रेस ज्यादा एकजुट और संगठित नजर आई। एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल प्रचार में नहीं दिखे, वहीं मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, वित्त मंत्री मनप्रीत बादल और नवजोत सिंह सिद्धू ने सुनील जाखड़ के लिए ताकत झोंक दी थी। दूसरा बड़ा कारण भाजपा उम्मीदवार स्वर्ण सलारिया की छवि रही। बलात्कार का आरोप लगने से उनकी संभावनाएं कमजोर हो गई तो सहयोगी दल के नेता सुच्चा सिंह लंगाह ऐसे ही आरोप में पार्टी से बाहर कर हो गए।

 

9 में से 7 विधायक कांग्रेस के, 3 कैबिनेट में

2017 के विधानसभा चुनाव में 9 में 7 विधानसभाएं कांग्रेस ने जीती थी। इसमें डेरा बाबा नानक के विधायक सुखजिंदर सिंह रंधावा, फतेहगढ़ चूड़ियां के तृप्त राजिंदर बाजवा और दीनानगर के विधायक अरुणा चौधरी राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। जबकि पठानकोट से अमित विज, भोआ से जोगिंदरपाल, गुरदासपुर से वरिंदरमीत सिंह पाहड़ा, कादियां से फतेहजंग सिंह बाजवा कांग्रेस विधायक हैं। बटाला में शिअद तो सुजानपुर में भाजपा के विधायक हैं।

 

अब तक चुनावों में कौन जीता और कौन हारा:

चुनावी साल संसद पहुंचे चेहरे जिनकी आस हार गई
1952 तेजा सिंह(कांग्रेस) --------------------------------
1957 दीवान चंद(कांग्रेस) --------------------------------
1962 दीवान चंद(कांग्रेस) --------------------------------
1967 दीवान चंद(कांग्रेस) --------------------------------
1971 प्रबोध चंद्र(कांग्रेस) --------------------------------
1977 यज्ञ दत्त(बीएलडी) प्रबोध चंद्र(कांग्रेस)
1980 सुखबंस कौर भिंडर(कांग्रेस) पीएन लेखी(जेएनपी)
1985 सुखबंस कौर भिंडर(कांग्रेस) बलदेव परकाश(भाजपा)
1989 सुखबंस कौर भिंडर(कांग्रेस) कै. चानण सिंह सिद्धू(शिअद)
1992 सुखबंस कौर भिंडर(कांग्रेस) ओम प्रकाश भारद्वाज(भाजपा)
1996 सुखबंस कौर भिंडर(कांग्रेस) जगदीश साहनी(भाजपा)
1998 विनोद खन्ना(भाजपा) सुखबंस कौर भिंडर(कांग्रेस)
1999 विनोद खन्ना(भाजपा) सुखबंस कौर भिंडर(कांग्रेस)
2004 विनोद खन्ना(भाजपा) सुखबंस कौर भिंडर(कांग्रेस)
2009 प्रताप सिंह बाजवा(कांग्रेस) विनोद खन्ना(भाजपा)
2014 विनोद खन्ना(भाजपा) प्रताप सिंह बाजवा(कांग्रेस)
2017 सुनील जाखड़(कांग्रेस) स्वर्ण सलारिया(भाजपा)

 

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