हाल ही में बजट घोषणाओं से चर्चा में आए इलेक्ट्रिक व्हीकल्स

Jalandhar News - धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया | नई दिल्ली पहले आर्थिक सर्वेक्षण में रोडमैप और फिर केंद्रीय बजट में इलेक्ट्रिक वाहनों...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:50 AM IST
Jalandhar News - electric vehicles recently discussed with budget announcements
धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया | नई दिल्ली

पहले आर्थिक सर्वेक्षण में रोडमैप और फिर केंद्रीय बजट में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए एक साथ कई घोषणाएं की गईं। इसके बाद देश में इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग और इनके बढ़ने की चर्चा मुद्दा बन गई है। भारत में देखें तो वर्ष 2017-18 की तुलना में 2018-19 में दो पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री दो गुना से अधिक हुई तो चार पहिया वाहनों की बिक्री तीन गुना बढ़ी। लेकिन देश में बिक्री होने वाले कुल दो पहिया और चार पहिया वाहनों में इनकी हिस्सेदारी महज आधा फीसदी से भी कम है। देश में वर्ष 2018-19 में सात लाख 59 हजार छह सौ दाे, तीन और चार पहिया वाहनों की बिक्री हुई है।

नीति आयाेग की योजना के मुताबिक देश में 2025 तक 150 सीसी से कम क्षमता वाले सभी दो पहिया वाहन देश में इलेक्ट्रिक बिकेंगे। इसके साथ ही तीन पहिया, बस और कारों की श्रेणी में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ाना है। लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों की राह में कुछ बाधाएं है। भारत में बैटरी उत्पादन न होना, अच्छी बैटरी का न होना और बुनियादी सहूलियतों के अभाव में यह लोकप्रिय नहीं हो पा रही है। सोसायटी ऑफ मेन्यूफेक्चरर्स आॅफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (एसएमईवी) के अनुसार देश में वर्तमान में करीब 68 कंपनियां दो पहिया, तीन पहिया और कार निर्माण संबंधी कार्य कर रही हैं। रिसर्च फर्म क्रिसिल के निदेशक रिसर्च हेतल गांधी ने कहा कि बजट में जीएसटी दर घटाने, ब्याज की टैक्स में छूट आदि घोषणाओं से दो पहिया वाहन खरीदने वालों को परंपरागत दो पहिया वाहनों की तुलना में 10 फीसदी तक बचत होगी। वहीं तीन पहिया टैक्सी वालों को पांच फीसदी तक फायदा सामान्य टैक्सियों की तुलना में होगा।

देश में बैटरी बनाने के लिए नीति जल्द आएगी

बैटरी के संबंध में बात करने पर नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि इलेक्ट्रिक व्हीकल्स आज और कल की बात नहीं है। हमने दीर्घकालीन विजन दिया है। हम चाहते हैं कि आज से 6 साल बाद सभी दो पहिया, विशेषतौर पर 150 सीसी से कम क्षमता वाले सभी वाहन इलेक्ट्रिक हो जाएं। एक दम से सबकुछ हो जाएगा ऐसा नहीं है। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में बैटरी की कॉस्ट सर्वाधिक है और यह देश में नहीं बन रही हैं, आयात करनी पड़ती हैं। ऐसे में हमारी कोशिश है कि यह देश में बनने लगे। हम इसके लिए भी एक नीति बना रहे हैं जल्द ही यह सबके बीच होगी। नीति के तहत हमारी कोशिश है कि बड़े पैमाने पर देश में बैटरी का उत्पादन शुरू हो जाएगा और देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को बढ़ाने का सबसे बड़ा रोड़ा दूर हो जाएगा। इस प्रक्रिया में दो साल का समय लगेगा। लागत भी कम आएगी।

शर्त को पूरा करने के लिए सरकार एक साल समय दे

एसएमईवी के निदेशक और प्रवक्ता मनु शर्मा ने कहा कि बीते 10 साल में देश में करीब चार लाख से अधिक ई-गाड़ी सड़क पर आ चुकी हैं। नीति आयोग द्वारा तय लक्ष्य को अगर पाना है तो इलेक्ट्रिक व्हीकल्स उद्योग को प्रोत्साहित करना होगा। जैसे जो उद्यमी कंपोनेंट बना रहे हैं उन्हें प्रोत्साहित करें। 50% लोकल मैन्यूफैक्चरिंग की फेम इंडिया की शर्त के लिए भी कम से कम 1 साल का वक्त मिलना चाहिए। बैंक से लोन सरलता से मिले। अभी वाहनों में लैड आधारित बैटरी ही लग रही हैं क्योंकि इसकी कीमत कम है। लीथियम बैटरी भी महंगी हैं।

दो पहिया वाहनों को मुश्किल से मिल रहा लोन

इलेक्ट्रिक वाहनों की चुनौती के संबंध मंे दो पहिया इलेक्ट्रिक व्हीकल बनाने वाली कंपनी अवान मोटर्स के हेड, बिजनेस डेवलपमेंट पंकज तिवारी ने कहा कि इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को फाइनेंस नहीं हो रहा है बैंकों के द्वारा, फेम-टू में सब्सिडी न मिलने के कारण गाड़ियां महंगी हो रही है। जो चुनिंदा बैंक लोन दे भी रहे हैं तो वहां 40 फीसदी तक डाउनपेमेंट ग्राहक को देना पड़ रहा है। ऐसे में ग्राहक को 25 से 28 हजार रुपए तक डाउन पेमेंट करना पड़ता है जबकि दो पहिया खरीदने वाला आठ से 10 हजार रुपए तक ही भार वहन कर सकता है। ऐसे में हमें मुश्किल हो रही है।

एक साल में दो पहिया ई-वाहन दो गुने, चार पहिया तीन गुना बिके लेकिन अभी भी कुल बिक्री में हिस्सेदारी आधा फीसदी से भी कम

देश में 2030 तक निजी कारों में ई-व्हीकल की हिस्सेदारी 30 फीसदी रहने का अनुमान

आर्थिक
सर्वेक्षण में भी भारत में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और चार्जिंग में लगने वाला वक्त ई-व्हीकल्स अपनाने की धीमी दर की प्रमुख वजह गिनाई गई। देश में 2030 तक निजी कारों में ई-व्हीकल की हिस्सेदारी तीस प्रतिशत, कमर्शियल कारों में 70 प्रतिशत, बसों में 40 प्रतिशत, टू-व्हीलर्स और थ्री-व्हीलर्स में 80 प्रतिशत हो जाए तो कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन में 84.6 करोड़ टन की कमी और 47.4 करोड़ टन तेल की बचत की जा सकती है। रिसर्च फर्म क्रिसिल के निदेशक रिसर्च हेतल गांधी ने कहा कि वर्ष 2018-19 में देश में बिकने वाले कुल दो पहिया वाहनों में ई-वाहनों की हिस्सेदारी 0.1% और चार पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 0.6 फीसदी थी।

देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री की स्थिति

सोर्स : एसएमईवी, क्रिसिल और विशेषज्ञ।

नार्वे में बिकने वाला हर दूसरा वाहन इलेक्ट्रिक

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की ‘ग्लोबल ईवी आउटलुक 2019’ रिपोर्ट मुताबिक 2018 में दुनियाभर में 51 लाख इलेक्ट्रिक कारें बिकीं। इस मामले में चीन अब भी सबसे आगे है। जबकि ई-कार के मार्केट शेयर के मामले में नॉर्वे पहले पायदान पर है। यहां ई-कारों की बिक्री 46 फीसदी है। एजेंसी का अनुमान है कि 2030 तक दुनिया में ई-कारों की संख्या 13 करोड़ से ज्यादा हो सकती है। जबकि दुनियाभर में बिकने वाले 22% वाहन इलेक्ट्रिक होंगे। दुनियाभर में इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करना फिलहाल समस्या बनी हुई है। दुनिया में सार्वजनिक रूप से केवल 5.4 लाख चार्जर ही उपबल्ध हैं। जबकि सार्वजनिक व निजी चार्जरों की संख्या 52 लाख है। यूरोपियन यूनियन ने नई बिल्डिंगों में वाहनों के लिए चार्जर लगाना अनिवार्य किया गया है। चीन में पेट्रोल-डीजल से चलने वाली गाड़ियों के मैन्यूफैक्चरिंग प्लांट में निवेश पर रोक लगाई है।

बजट में हुईं घोषणाएं

 इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदने के लिए कर्ज के ब्याज पर 1.5 लाख रुपए तक आयकर कटौती का फायदा मिलेगा।

 लीथियम आयन सेल के आयात पर शुल्क शून्य किया।

 इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में खास तौर पर इस्तेमाल होने वाले आयातित कलपुर्जों पर आयात शुल्क हटाया गया।

 इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर जीएसटी 12 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी किया गया।

 फेम-2 योजना के तहत इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के लिए वर्ष 2022 तक 10 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान।

वाहन 2017-18 2018-19

दो पहिया 54,800 1,26,000

चार पहिया 1,200 3,600

तीन पहिया 5,20,000 6,30,000

कुल वाहन 5,76,000 7,59,600

95% ई टू-व्हीलर्स जो सड़कों पर हैं वे 25 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से कम के हैं। इंडस्ट्री बॉडी एसएमईवी के अनुसार।

40% तक अमेरिका और यूरोपीय देशों में इलेक्ट्रिक वाहनों पर मिलती है सब्सिडी।

20 लाख नए रोजगार नीति आयोग के मुताबिक 2050 तक इलेक्ट्रिक व्हीकल से आने की उम्मीद। वहीं 2030 तक 8.5 लाख नौकरी ई-कार से आने की उम्मीद।

इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के बाजार में चुनौतियां

देश में बैटरी का न बनना

सबसे बड़ी समस्या देश में बैटरी न बनने की है। अभी भारत में वाहनों के लिए बैटरियां आयात की जाती हैं। साथ ही लैड आधारित बैटरी मिलती हैं जो वजन में भारी हैं और दो-तीन वर्ष तक ही चल पाती हैं। वाहनों की कुल लागत में बैटरी की कीमत 40-50% तक होती है। लिथियम आयन वाली बैटरी सर्वाधिक चीन में बन रही हैं।

दो पहिया वाहन सब्सिडी की नई शर्तें

फेम-2 में दो पहिया वाहनों को लेड एसिड बैटरी से बाहर रखा गया है। साथ ही दो शर्त भी लगाई हैं कि एक बार चार्ज होने के बाद वाहन 80 किलोमीटर चले और कम से कम स्पीड 40 किलोमीटर प्रति घंटा की हो। अगर मौजूदा ट्रेंड देखें तो देश में अभी बन रहे 90% से अधिक वाहन सब्सिडी लेने से वंचित हो जाएंगे।

आप ई-कार ले रहे हैं तो ये पढ़ें

अगर मैं इलेक्ट्रिक कार लेने की सोच रहा हूं तो मेरे पास कितने विकल्प हैं?

- आपके पास अभी कुछ ही विकल्प हैं। टाटा मोटर्स की टिगोर, महिंद्रा एंड महिंद्रा की वैरिटो और ई-टूओ और हुंडई की अभी लाॅन्च हुई एसयूवी कोना जैसे मॉडल ले सकते हैं। ये गाड़ियां करीब 4.79 लाख से 25 लाख रुपए एक्स शोरूम कीमत पर मिल रही हैं।

बजट की घोषणाओं का मुझे क्या फायदा?

- अभी कार खरीदते समय कोई फायदा नहीं है। लेकिन बजट घोषणा के मुताबिक लिए गए लोन पर 1.5 लाख रु. तक ब्याज की कर छूट मिलेगी। आपने अगर नौ लाख रुपए का लोन लिया और आपकी ईएमआई पांच साल के लोन पर 18,902 रु. है तो आपको पहले साल में करीब 80 हजार रु. ब्याज की छूट टैक्स चुकाते समय मिलेगी।

कार खरीदने से मुझे क्या फायदा होगा?

- ई-कार खरीदने के बाद हर महीने पेट्रोल या डीजल का खर्च पांच गुना तक कम हो जाएगा। लेकिन बैटरी बदलते समय आपका खर्च बढ़ेगा। हालांकि सरकार का दावा है कि अगले दो साल-तीन साल में सस्ती बैटरियां देश में ही बनेंगी जिससे लागत कम होगी। यानि शुरुआत में तो फायदा होगा।

महंगी कीमत

फेम-1 के समय हैवी इंडस्ट्री विभाग के सचिव रहे डॉ. राजन कटोच के मुताबिक अभी देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स खासतौर पर चार पहिया वाहनों की औसतन कीमत डीजल या पेट्रोल वाहनों की तुलना में दो गुनी है। कीमत तर्क संगत होगी तो आम ग्राहक इसके प्रति आकर्षित होंगे।

, जालंधर, रविवार, 14 जुलाई 2019

चार्जिंग नेटवर्क का न होना

इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के लिए अभी देश में चार्जिंग नेटवर्क न के बराबर है। घर से वाहन चार्ज करने पर समय अधिक लगता है। बेंगलुरू-दिल्ली जैसे शहरों में कुछ ही चार्जिंग स्टेशन हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह देश में पेट्रोल पंप हैं उसी प्रकार से चार्जिंग स्टेशन होने चाहिए जिससे इन वाहनों की लोकप्रियता बढ़ पाएगी।

50% लोकल मेन्यूफेक्चरिंग का नियम

फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्यूफैक्चरिंग ऑफ (हाइब्रिड एंड) इलेक्ट्रिक व्हीकल्स- फेम इंडिया-2 स्कीम में सब्सिडी के लिए वाहन निर्माता कंपनियों के लिए 50 फीसदी मैन्यूफैक्चरिंग स्थानीय स्तर पर करनी होगी। लेकिन अभी स्थिति यह है कि बैटरी और ज्यादातर उपकरण विदेश से आते हैं। जिसके कारण पूर्व में मिल रही वाहन खरीद पर सब्सिडी नहीं मिल पाती।

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