सड़क सुरक्षा सप्ताह / हेलमेट नहीं पहनने की छोटी सी चूक पड़ी भारी, पिछले सवा साल से अस्पताल के आईसीयू में हैं अमन अवस्थी

जालंधर के सर्वोदय अस्पताल के आईसीयू में भर्ती शहर का युवक अमन अवस्थी (बाएं) और हादसे से पहले की फोटो (दाएं)।
अस्पताल के आईसीयू में राखी बांधने आई अमन अवस्थी की बहन। परिवार की सारी खुशियां बेरंग सी यहीं पर बीतती हैं। अस्पताल के आईसीयू में राखी बांधने आई अमन अवस्थी की बहन। परिवार की सारी खुशियां बेरंग सी यहीं पर बीतती हैं।
अमन के उपचार में तन-मन से लगे सर्वोदय अस्पताल के डॉक्टर पंकज त्रिवेदी। अमन के उपचार में तन-मन से लगे सर्वोदय अस्पताल के डॉक्टर पंकज त्रिवेदी।
घटना के बारे में बताते बिलख पड़ते हैं बिजली निगम के कैशियर पिता संदीप अवस्थी। घटना के बारे में बताते बिलख पड़ते हैं बिजली निगम के कैशियर पिता संदीप अवस्थी।
डॉ. पंकज त्रिवेदी, जिन्होंने पिछले करीब एक साल से नहीं लिया कोई पैसा। डॉ. पंकज त्रिवेदी, जिन्होंने पिछले करीब एक साल से नहीं लिया कोई पैसा।
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अस्पताल के आईसीयू में राखी बांधने आई अमन अवस्थी की बहन। परिवार की सारी खुशियां बेरंग सी यहीं पर बीतती हैं।अस्पताल के आईसीयू में राखी बांधने आई अमन अवस्थी की बहन। परिवार की सारी खुशियां बेरंग सी यहीं पर बीतती हैं।
अमन के उपचार में तन-मन से लगे सर्वोदय अस्पताल के डॉक्टर पंकज त्रिवेदी।अमन के उपचार में तन-मन से लगे सर्वोदय अस्पताल के डॉक्टर पंकज त्रिवेदी।
घटना के बारे में बताते बिलख पड़ते हैं बिजली निगम के कैशियर पिता संदीप अवस्थी।घटना के बारे में बताते बिलख पड़ते हैं बिजली निगम के कैशियर पिता संदीप अवस्थी।
डॉ. पंकज त्रिवेदी, जिन्होंने पिछले करीब एक साल से नहीं लिया कोई पैसा।डॉ. पंकज त्रिवेदी, जिन्होंने पिछले करीब एक साल से नहीं लिया कोई पैसा।

  • बिजली निगम में कैशियर के पद पर कार्यरत हैं जालंधर के रामा मंडी निवासी संदीप अवस्थी, बेटा कर रहा था इलेक्ट्रीकल इंजीनियरिंग
  • पिता के साथ घायल नाना की तीमारदारी में था तो 10 सितम्बर 2018 को कार की टक्कर से आई थी सिर में चोट
  • हर वक्त हेल्मेट पहनकर चलता था अमन, हादसे से थोड़ी देर पहले मामा पहनकर चला गया तो आई यह नौबत
  • हादसे के 15 दिन के अंतराल में तमाम इंश्योरेंस खत्म हुए, हादसे के लिए जिम्मेदार कार का भी नहीं है बीमा

दैनिक भास्कर

Jan 18, 2020, 06:35 PM IST

बलराज सिंह/जालंधर

यह अमन है। अमन कुमार अवस्थी। पिछले करीब डेढ़ साल से हेड इंजरी के चलते यह अस्पताल के बेड पर है। साथ ही उसकी जीवन की डोर को जोड़े रखने की आस में परिवार की माली हालत डगमगा चुकी है। पिछले करीब एक साल से तो अस्पतापल प्रबंधन ने भी पैसा लेना बंद कर दिया है। वजह की बात करें तो हर वक्त हेल्मेट पहनने वाले अमन के परिवार को बस वो एक लम्हा अंदर तक हिला देता है कि काश उस वक्त भी अमन के सिर पर हेल्मेट होता। इन दिनों सड़क सुरक्षा सप्ताह चल रहा है और इस दौरान अमन की कहानी के जरिये दैनिक भास्कर जनसामान्य को संदेश दे रहा है कि पुलिस कार्रवाई के डर से नहीं, बल्कि अपनी और अपनों की परवाह करते हुए हेलमेट पहनना हम सबके लिए बेहद जरूरी बात है।

बिजली निगम में कैशियर के पद पर कार्यरत जालंधर के रामा मंडी इलाके के संदीप अवस्थी की दो संतानों (अमन और छोटी बेटी) में से अमन एक है। वर्ष 2018 में इलेक्ट्रीकल इंजीनियरिंग के डिप्लोमा के फर्स्ट ईयर का स्टूडेंट था। पिता विदेश भेजना चाहते थे, पर छोड़कर जाने से इनकार कर दिया अमन ने। जब से होश संभाला था, पिता को कोई काम भी नहीं करने देता था।

संदीप अवस्थी बताते हैं कि एक दिन उनके ससुर यानि अमन के नाना सड़क हादसे में घायल हो गए। उनकी तीमारदारी में दोनों पिता-पुत्र अस्पताल में रहते थे। इसी दौरान 10 सितम्बर की रात वह पिता को नाना के पास छोड़कर नहाने और कपड़े वगैरह बदलने के लिए घर जा रहा था।रास्ते में डिफेंस कॉलोनी से एसजीएल अस्पताल की तरफ आते हुए फ्लाईओवर के साथ सर्विस लेन पर गलत साइड से आ रही कार ने टक्कर मारी। कार का चालक सर्विस करने के बाद उसका ट्रायल लेने आया था। अचानक रिवर्स यू-टर्न मारा तो उसकी चपेट में आने के बाद अमन की बाइक फुटपाथ पर जा गिरी और उछलकर गिरे अमन का सिर सड़क पर जा लगा। पास से गुजर रहे युवकों ने उसके मोबाइल में सेव पिता संदीप के नंबर पर कॉल करके हादसे के बारे में जानकारी दी, वहीं अमन को अस्पताल पहुंचाया।

हालांकि युवकों के फोन पर बताए अनुसार अमन की हालत ज्यादा गंभीर नहीं थी, पर जब तक पिता संदीप अस्पताल पहुंचे तो उसकी सांसें थम सी गई थी। डॉक्टर्स ने उसे वेंटीलेटर पर डाल दिया और सिर्फ 1 प्रतिशत चांस बताए, जिसके चलते इमरजेंसी ऑपरेशन भी करना पड़ा। इसके बाद एक सप्ताह वेंटीलेटर पर गुजरा और सांसें नहीं जुउ़ने की वजह से डॉक्टर ने उसे ले जाने के लिए कहा। बावजूद इसके परिवार ने अमन को घर ले जाने की बजाय यहीं अस्पताल में रखने का फैसला किया, क्योंकि इसके एक हाथ पर चिकोटी काटने पर हल्की सी हलचल होती थी। बाकी पूरे शरीर में कोई हलचल नहीं थी। पलकें भी नहीं झपकती थी। दो महीने बाद डॉक्टर ने हालत में सुधार बताया, लेकिन अचानक फिर से सांसें तेज हो जाने के चलते दोबारा वेंटीलेटर पर रख दिया। लगभग 4 महीने बीते जाने के बाद अमन के शरीर में हलचल महसूस होने लग गई। बावजूद इसके तब से अमन अस्पताल में ही है।

ऐसे टूटा परिवार पर संकट का पहाड़

  • संदीप अवस्थी के मुताबिक उनका लाडला अमन एक सेकंड भी हेल्मेट के बिना कभी चलता ही नहीं था, इसे संयोग कहें या दुरयोग कि थोड़ी देर पहले उसके हेल्मेट को उसका मामा ले गया।
  • मोटरसाइकल की इंश्योरेंस पॉलिसी 31 अगस्त 2018 को खत्म हो गई। वहीं इससे ठीक 5 दिन पहले 6 लाख की फैमिली हैल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लैप्स हो चुकी थी।
  • बकौल संदीप, मेरी उम्र 45 साल से ऊपर जाने की वजह से 12 हजार का प्रीमियम 18 हजार का हो गया। बात करने पर संबंधित कंपनी की तरफ से संतुष्टीजनक जवाब नहीं मिला और प्रीमियम जमा नहीं कराने पर पॉलिसी लैप्स हो गई।
  • इसके अलावा एक विडम्बना यह भी देखिए कि जिस कार की टक्कर से अमन की यह हालत हुई है, उसका भी बीमा नहीं है।
  • अमन दादी का बड़ा लाडला था, जिसके चलते 6 महीने तक दादी हर वक्त एक ही बात की रट रहती थी कि मेरा पाेता घर कब आएगा। आखिर एक दिन उनका भी निधन हो गया।
  • हादसे के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों ने सिर्फ हादसे के तुरंत खून वगैरह की जरूरत को छोड़कर आज तक इकॉनोमिकली या इमोशनली कोई सपोर्ट नहीं दी है।
  • पत्नी का दिल का ऑपरेशन हो चुका है। लेफ्ट साइड पैरोलाइज भी है। यहां तक की दिल का ऑपरेशन दोबारा करने की नौबत आई, लेकिन पैसे नहीं होने के चलते वह भी नहीं कराया।

मिली यह मदद, फिर भी माली हालत नहीं है ठीक

संदीप के मुताबिक बेटे अमन के इलाज के लिए किए जा रहे खर्च के चलते उनके परिवार की आर्थिक हालत डगमगा गई। खालसा एड की तरफ से 2 लाख की मदद मिली और इसके बाद जो भी कर रहे हैं डॉक्टर ही कर रहे हैं। जितना डॉक्टर साहब ने किया है, कोई और नहीं कर सकता। उन्होंने डॉक्टर पंकज त्रिवेदी से विनती की कि उनके पास पैसे नहीें हैं तो डॉक्टर त्रिवेदी ने पैसे लेने से इनकार कर दिया। शुरुआत के तीन-चार महीने में जो पैसा जमा करा दिया, सो कराया, उसके बाद पिछले करीब 10 महीने से अस्पताल प्रबंधन संदीप अवस्थी से एक पैसा भी नहीं ले रहा। बावजूद इसके उनकी हालत ठीक नहीं है। दवाइयों तक के लिए भी पैसे नहीं हैं। दूसरी ओर इस बारे में डॉक्टर पंकज त्रिवेदी से बात गई तो उन्होंने सिर्फ एक ही बात कही कि यह एक डॉक्टर होने के नाते उनका फर्ज है। उन्होंने कैमरे पर आने से भी इनकार कर दिया।

हो चुकी है सभी त्यौहारों की रंगत फीकी

16 जुलाई को जन्मदिन आता है, जो अस्पताल में ही बीता। इतना ही नहीं पिता संदीप यह बताते हुए अपने आप को रोक नहीं पाते कि उनका खुद का, पत्नी का, अमन से छोटी बेटी का, सभी के जन्मदिन यहीं अस्पताल में ही बीते। राखी भी बहन ने अस्पताल में बेड पर लेटे भाई की कलाई पर बांधी। इसके अलावा होली, दिवाली और दूसरे सभी त्यौहारों की रंगत परिवार के लिए फीकी हो चुकी है। बस एक ही दुआ है कि किसी तरह अमन ठीक हो जाए।

मेहनत और दुआएं रंग ला रही हैं, सुधार है मन में

सर्वोदय अस्पताल के डॉक्टर पंकज त्रिवेदी की मेहनत और सबकी दुआएं काम आ रही हैं। पिछले कुछ दिन से अमन की हालत में सुधार देखने को मिल रहा है। अब इशारे वगैरह समझने लग गया है अमन। पिता को देखकर एक्साइट हो जाता है। खुद ही उठकर बैठ भी जाता है।

इसलिए नहीं करा सकते डिस्चार्ज

अगर अमन को अस्पताल से डिस्चार्ज भी कराया जाता है तो घर पर भी एक मेल अटैंडेंट और फिजियोथैरेपिस्ट की जरूरत पड़ेगी। इनका खर्चा भी 60 से 70 हजार रुपए महीना पड़ेगा। और परिवार के पास पहले से ही पैसे नहीं हैं। पूरी तरह से ठीक होने तक परिवार के पास अमन को यहीं रखने के अलावा कोई चारा भी नहीं है।

ऐसे होती है देखभाल

संदीप अवस्थी ने 6 महीने तक छुट्‌टी ली बेटे की देखभाल के लिए, इसके बाद अब सुबह 10 बजे ऑफिस जाते हैं तो दोपहर 3 बजे ऑफिस से वापस अस्पताल में आकर सुबह तक रहते हैं। सुबह जब भतीजा आ जाता है तो वह फिर निकलते हैं। हालांकि पहले मां पूरा वक्त रहती थी, लेकिन वह खुद बीतार हैं तो कैसे संभालें।

हर कोई ले अमन की हालत से सीख, पहने हेल्मेट

ज्यादातर लोग सिर पर हेल्मेट सिर्फ पुलिस के डर से पहनते हैं। जिंदगी की उन्हें कोई परवाह नहीं और ऐसे ही लोगों को जागरुकता नहीं तो कम से कम कानून के डर से ही लाइन पर लाने की कोशिशें सरकारें आए दिन करती रहती हैं। दैनिक भास्कर प्लस की अपील है कि अमन और उसके परिवार की हालत से हम में से हर किसी को सीख लेनी चाहिए। हर वक्त हेल्मेट पहनना चाहिए। पैसा होने या न होने की हालत तो बाद की बात है।

मोबाइल फोन को भी रखें अनलॉक

संदीप ने बेटे को कोई भी पिन या पैटर्न लॉक लगाने के लिए मना किया हुआ था, जिसके चलते फोन ईजी टू एक्सेस रहे। इसी के चलते राह चलते युवक खुले फोन से उसकी पहचान कराने में कामयाब रहे। आप भी इमरजेंसी का मोल समझें और अमन की तरह कभी फोन को लॉक न करें।

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