जालंधर / पुलवामा हमले की पहली बरसी; सूबे के 4 सपूतों की शहादत आज भी सम्मान के इंतजार में

फाइल फोटो। फाइल फोटो।
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फाइल फोटो।फाइल फोटो।

  • देश पर मिटने वाले शहीदों के परिवारों से सरकार ने बड़े-बड़े वादे किए, पर पूरे नहीं किए
  • सरकारी नौकरी, यादगारी गेट, शहीद के नाम पर रोड और लोन माफी के वादे आज भी अधूरे

दैनिक भास्कर

Feb 14, 2020, 04:16 AM IST

जालंधर. जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में गत वर्ष 14 फरवरी को सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले को आज एक साल पूरे हो गए। आतंकियों के इस कायराना हमले में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 40 से ज्यादा जवान शहीद हो गए थे, जिसमें पंजाब के चार सपूत भी शामिल थे। इन शहीदों के परिवारों की वर्तमान स्थिति और क्या सरकार ने शहीदों के परिजनों से जो वादे किए थे वो पूरे हुए या आज भी ये सिर्फ सरकारी वादों के बोझ तले ही जीवन बिताने पर विवश हैं?

भास्कर ने इसकी पड़ताल की तो पता चला कि एक साल गुजरने के बाद भी शहीदों के परिजनों से किए गए वादे अभी तक परवान नहीं चढ़ पाए हैं। सरकारी नौकरी, यादगारी गेट, शहीद के नाम पर रोड और स्कूल, लोन माफ आदी तमाम वादे आज भी अधूरे हैं...पूरे हो भी कैसे क्योंकि वादे हैं...वादों का क्या...। पढ़िए सूबे के चार शहीदों के परिजनों की कहानी जो सम्मान, सहारा, शिक्षा, नौकरी और सुविधाओं के इंतजार में पथराए जा रहे हैं। 

शहीद : कुलविंदर सिंह (नूरपुरबेदी, रोपड़)

जो वादे किए गए  

  • 10 हजार रुपए प्रति माह पेंशन
  • शहीद के नाम पर यादगारी गेट, स्कूल का नाम और सड़क निर्माण 
  • शहीद के घर की बिजली माफ करने के वादे

वादे जो पूरे हुए : 10 हजार रुपए प्रति माह पेंशन और शहीद के नाम पर स्कूल का नाम।

पिता का दर्द :  मैं कब से कह रहा हूं कि बेटे का यादगारी गेट बनवाओ, सरकार सुनती नहीं

शहीद के पिता दर्शन सिंह ने भास्कर से कहा कि वह बार-बार कह चुके हैं कि मेरे पुत्र की याद में गेट बनाया जाए। लेकिन प्रशासन उनको कभी पार्क तो कभी खेल ग्राउंड के दावे कर कर बात को टाल देती है। ना ही उनके बेटे की याद में 18 फीट लिंक रोड का काम शुरू हो पाया है और ना ही कोई पार्क बनाने की उन्हें सूचना है।

शहीद : जमैल सिंह (कोटइसेखां, मोगा)

जो वादे किए गए 

  • शहीद के नाम पर यादगारी गेट, स्कूल का नाम और सड़क निर्माण 
  • सीआरपीएफ में तैनात छोटे भाई लख्वीश सिंह को पंजाब पुलिस में नौकरी देने का वादा

वादे जो पूरे हुए : शहीद के पत्नी को 5 लाख और माता-पिता को 1-1 लाख सहित कुल 7 लाख मिले।

पत्नी का दर्द : आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं, 5 लाख जो बाकी है, कब मिलेंगे कोई सूचना नहीं

शहीद की विधवा सुरजीत कौर ने बताया कि पति का सपना था कि बेटे गुरप्रकाश सिंह का दाखिला पंचकूला के गुरुकुल स्कूल में हो इसलिए मैंने बेटे का दाखिला करा दिया है। अब मैं बेटे के साथ किराए के फ्लैट में पंचकूला में ही रह रही हूं। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। पांच लाख रुपए जो बाकी है कब मिलेगा कोई सूचना नहीं है। अन्य वादे भी पूरे नहीं हुए।

शहीद : मनविंदर सिंह (दीनानगर, गुरदासपुर)

जो वादे किए गए 

  • शहीद के नाम पर यादगारी गेट, स्कूल का नाम और सड़क निर्माण 
  • सीआरपीएफ में तैनात छोटे भाई लख्वीश सिंह को पंजाब पुलिस में नौकरी देने का वादा

वादे जो पूरे हुए : विडंबना देखिए एक साल बाद भी सरकार ने एक भी वादा नहीं पूरा किया।

पिता का दर्द :  बड़ा बेटा शहीद हो गया, छोटे बेटे की नौकरी के लिए चक्कर काट रहा हूं 

पंजाब रोडवेज से ट्रैफिक इंस्पेक्टर के रूप में रिटायर हुए शहीद मनिंदर सिंह के पिता सतपाल अत्री ने बताया कि बड़े बेटे के शहीद के होने के बाद अब वे छोटे बेटे के साथ घर पर अकेले रह गए हैं। छोटे बेटे को पंजाब पुलिस में नाैकरी संबंधी वह दो बार चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री से मिलने के लिए गए लेकिन मुलाकात नहीं हुई।

शहीद : सुखजिंदर सिंह (गंडीविंड, अमृतसर)

जो वादे किए गए 

  • परिवार को 12 लाख रुपए की आर्थिक सहायता
  • शहीद की पत्नी को सरकारी नौकरी
  • शहीद के परिवार के आर्थिक ऋण को पूर्णत्या माफ करने का वादा 

वादे जो पूरे हुए : परिजनों को अभी तक 5 लाख रुपए मिल गए हैं। 7 लाख कब मिलेंगे जानकारी नहीं।

पिता का दर्द :  बहू को नौकरी मिली नहीं, ना ही बैंक का 2.5 लाख रुपए का कर्ज माफ हुआ

शहीद के पिता गुरमेज सिंह ने बताया कि सूबा सरकार ने 12 लाख रुपए देने का एेलान किया था। कैबिनेट मंत्री साधू सिंह धर्मसोत ने ढाई-ढाई लाख के दो चेक दिए। बाकी की सात लाख की रकम कब मिलेगी कोई जानकानी नहींं। बहू सरबजीत कौर को चपरासी का ऑफर दिया गया लेकिन 12वीं पास उसने ने नकार दिया। लोन भी माफ नहीं हुआ।

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