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वर्कशॉप में पंडित देवेन्द्र वर्मा ने संगीत, स्वर, राग, ताल अौर बंदिश के विविध पहलुओं पर प्रकाश डाला

Jalandhar News - राष्ट्रीय संगीतज्ञ परिवार के सहयोग से लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में राष्ट्र स्तरीय स्वर शांति संगीत समारोह...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 08:07 AM IST
Jalandhar News - in the workshop pandit devendra verma threw light on various aspects of music voice raga rhythm and bandhish
राष्ट्रीय संगीतज्ञ परिवार के सहयोग से लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में राष्ट्र स्तरीय स्वर शांति संगीत समारोह करवाया जा रहा है। 2 चरणों में होने वाला कार्यक्रम यूनिवर्सिटी की संस्थापिका स्व. शान्ति देवी मित्तल को समर्पित है। पहले चरण में प्रसिद्ध संगीतविद् पंडित देवेंद्र वर्मा ने संगीत कार्यशाला करवाई। इसका शुभारंभ दिल्ली के युवा अौर होनहार शास्त्रीय गायक रविपाल के राग नट भैरव के गायन से हुआ। राग नट भैरव में तीन बंदिशें प्रस्तुत कीं। पहली बंदिश बिलावत एकताल, दूसरी तीनताल अौर तीसरी बंदिश द्रुत एकताल में निबद्ध थी। इसका समापन उस्ताद बड़े गुलाम अली खान की प्रसिद्ध ठुमरी याद पिया की आये से किया। पंडित देवेन्द्र वर्मा की तरफ से संगीत, स्वर, राग, ताल अौर बंदिश आदि के विविध पहलुओं पर प्रकाश डाला गया अौर स्वर अभ्यास, रागाभ्यास, बंदिश का अभ्यास अौर आलाप तान के विविध पक्षों पर विशद चर्चा करते हुए राग भीमपलासी की सुपरिचित बंदिश जा जा रे अपने मंदिरवा प्रस्तुत। इस कार्यशाला का समापन एक गीत ईश्वर अल्लाह तेरे जहां में नफरत क्यूं है जंग है क्यूं से किया। प्रो. मोनू कुमार ने हारमोनियम, मुकेश मित्तल अौर शिवाकर ने तबले पर सहयोग दिया।

दूसरे चरण में 2 बजे से समारोह का आगाज हुआ। शुभारंभ शुभाशीष मजूमदार (महानिदेशक), डॉ. सौरभ लखनपाल, पं. देवेन्द्र वर्मा, पं. ओम प्रकाश थापर, संगत राम, डॉ. गोपाल कृष्ण शाह, समीर भालेराव और डॉ. कुलजीत सिंह ने दीप प्रज्वलित करके किया। पहली प्रस्तुति प्रो. मोनू कुमार के निर्देशन में तैयार की गई सरस्वती वंदना, जिसे परफोर्मिंग आर्ट्स डिपार्टमेंट के विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किया। विश्वविद्यालय के विद्यार्थी जसकरण सिंह का तीनताल में एकल तबला वादन अौर राहुल सहोता का राग वृंदवानी सारंग का एकल शास्त्रीय गायन व ठुमरी गायन हुआ। हारमोनियम पर प्रो. मोनू कुमार अौर तबले पर मुकेश मित्तल ने संगति की। डॉ. गोपाल कृष्ण शाह (दिल्ली विश्वविद्यालय) का एकल सितार वादन हुअा।

समीर भालेराव की शास्त्रीय गायन द्वारा राग पूरिया धनाश्री की प्रस्तुति श्रोताओं को सुखद अनुभूति प्रदान कर रही थी। अंतिम प्रस्तुति थी पद्मविभूषण नृत्य सम्राट पंडित बिरजू महाराज की सुयोग्य शिष्या प्रीति गुप्ता का मनोहारी कथक नृत्य। यहां संगत राम, डॉ. कंवलजीत सिंह, डॉ. सौरभ लखनपाल, डॉ. कुलविंदर दीप, रमेश मोदगिल, पूर्व मेजर जनरल डॉ. लखविंदर सिंह वोहरा, समरजीत सेन कोलकाता, प्रो. अर्शप्रीत सिंह अौर जसपाल जीरवी मौजूद रहे।

पहले चरण में प्रसिद्ध संगीतविद् पंडित देवेंद्र वर्मा ने संगीत कार्यशाला करवाई। इसका शुभारंभ दिल्ली के युवा अौर होनहार शास्त्रीय गायक रविपाल के राग नट भैरव के गायन से हुआ। - भास्कर

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