--Advertisement--

GST : 1.5 लाख कारोबारी बढ़े, 15 हजार करोड़ रेवेन्यू मिला, लेकिन रिटर्न और रिफंड अब भी सिरदर्द

ज्यादातर व्यापारियों की नजर में... एक साल बाद भी जीएसटी यानी जटिल समस्या टैक्स...

Danik Bhaskar | Jul 01, 2018, 02:37 AM IST
  • 3.5 लाख से बढ़कर 5 लाख कारोबारी दायरे में आए
  • 723 मामले टैक्स चोरी के दो माह में, 4.39 करोड़ रुपए पेनल्टी

...सरकार को राहत

  • वैट से मिलते थे 11 हजार करोड़, जीएसटी से 4000 करोड़ राजस्व और बढ़ा

पटियाला/जालंधर/लुधियाना. जीएसटी का एक साल। इस दौरान सूबा सरकार का रेवेन्यू तो बढ़ा लेकिन व्यापारी आज भी जीएसटी रिफंड में देरी और रिटर्न भरने में अधूरे ऑनलाइन सिस्टम से परेशान हैं। आम आदमी की बात करें तो उसे सामान अब भी बगैर बिल के बेचा जा रहा। बावजूद इसके टैक्स का पैसा भी उसी से वसूला जा रहा है। ऐसे ही 723 मामले टैक्स चोरी में पकड़े गए और अंतिम 2 महीने में ही 4.39 करोड़ रुपए की पेनल्टी व्यापारियों से ली गई है। इस दौरान अच्छी खबर ये है कि प्रदेश में वैट सिस्टम में जहां 11000 करोड़ टैक्स कलेक्शन होती थी, वो जीएसटी में 15000 करोड़ हो गई है। पहले 3.5 लाख वैट डीलर होते थे जो जीएसटी लागू होने के बाद बढ़कर 5 लाख हो गए हैं। हालांकि, वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल का मानना है कि केंद्र की जीएसटी इंप्लीमेंटेशन की कमियों के चलते व्यापारी परेशान हुआ, ऊपर से 10% लोगों से ही सारा रेवेन्यू आया, 90% तो अब भी बच जाते हैं। जीएसटी को लागू करते हुए सरकार ने वादा किया था कि ये टैक्स सरल होगा। इससे आम आदमी को भी फायदा होगा। एक साल बाद भी व्यापारियों का मानना है कि सरकार ने केवल टैक्स लेने पर ही जोर दिया है। जीएसटी रिटर्न में जो दिक्कतें हैं, उन्हें दूर नहीं किया जा सका है। कारोबारी शहरों जालंधर, लुधियाना, पटियाला और अमृतसर के कारोबारियों की मिलीजुली प्रतिक्रिया है। उन्होंने कहा कि कारोबारी माहौल सुधरा है लेकिन सिस्टम में दिक्कतें दूर होनी चाहिए। व्यापारी का अरबों का जीएसटी रिफंड अटक गया। अब ये रिलीज होने लगा है। केंद्र तो अपना हिस्सा जारी कर देता है लेकिन प्रदेश के अफसर देरी कर रहे हैं।

फायदे... सरल टैक्स सिस्टम, बैरियर खत्म, रिफंड का प्रॉसेस भी हुआ आसान

1. टैक्स सिस्टम सरल हुआ। सी फार्म, रोड परमिट, एंट्री टैक्स और एक्साईजेबल और नाॅन एक्साईजेबल बिलों की प्रोसेस बंद हो गई।
2. देश में 1 ही टैक्स दर लागू हुई। पंजाब बाॅर्डर स्टेट है। यहां कच्चा माल भी बाहर से आता है, वैट दर भी अधिक थीं, जिससे व्यापारी कंपीटीशन में परेशान थे। अब सभी बराबर और बराबर का संघर्ष।
3. टैक्स बैरियरों पर लंबी कतारें लगी रहती थीं, जिससे ट्रक कई दिन देरी से पहुंचते थे। अब ये दिक्कत हल हुई है। सारे बैरियर खत्म हो गए हैं।
4. वैट के मुकाबले जीएसटी रिफंड प्रोसेस सरल हुआ है। शुरुआती महीनों में तैयारी अधूरी होने से रिफंड का पैसा रुका, लेकिन अब रेगुलर होने लगा है।
5. एक्सपोर्ट यूनियनों को भारी टैक्स छूट मिली। अब प्रोत्साहन इंसेटिव नीति का इंतजार है।

नुकसान... 4 स्लैब, जीएसटीआर-2 में करेक्शन न हो पाना, अफसरों का ढीला रवैया

1. रिटर्न का सिस्टम अब भी जटिल। डाटा ऑनलाइन मैच करने वाली बी सीरीज की रिटर्न में आनलाइन सिस्टम अधूरा है। सभी रिटर्न जैसे जीएसटीआर 1,2,3 अलग-अलग आ रही है। जीएसटीआर-2 में करेक्शन न हो पाने से परेशानी।
2. चार स्लैब होने से छोटे व्यापारी परेशान। नियमों की जानकारी न होने से सीए से सेवा लेनी पड़ रही, जिस पर एक्सट्रा खर्च आ रहा है।
3. पहले वैट की दर 14%होती थी, जीएसटी में 5, 18,28 की तीन दरें आ गई हैं। टैक्स चुकाने के लिए व्यापारियों को बैंक से उधार लेकर पैसा कारोबार में लगाना पड़ रहा।
4. जीएसटी रिफंड में केंद्र तो तेजी दिखा रहा है, लेकिन राज्य के टैक्सेशन अफसरों का कामकाज ढीला है।
5. सामान अब भी बगैर बिल बेचा जा रहा है, टैक्स देने वाले कंपीटीशन में कमजोर पड़ रहे हैं। फर्जी बिल काटे जा रहे हैं।

एक्सपर्ट व्यू, जहां पर इंडस्ट्री कम, वहां जीएसटी से हुआ फायदा

- कम इंड्रस्ट्री वाले राज्यों को जीएसटी का सबसे ज्यादा फायदा हुआ है। वहीं, पंजाब इनमें एक है। हरियाणा को भी फायदा हुआ है। जबकि महाराष्ट्र को भी जीएसटी में घाटा हुआ है। जीएसटी के स्लैब कम होने चाहिए। समाज के हर तबके को इसका फायदा होगा। -डॉ. डीके मदान, सेक्रेटरी, इंडियन इकोनॉमिक्स एसोसिएशन
जीएसटी जरूरी था, लेकिन जल्दबाजी में लागू किया गया: जीएसटी जरूरी था, मगर जल्दबाजी में लागू हुआ। दर भी सही नहीं है। फिजिकल एजुकेशन और कसरत से जुड़े सामान को भी हाई टैक्स स्लैब में रखा गया है। खेल सामान पर टैक्स 5% होना चाहिए। -रविंदर धीर, स्पोर्ट्स इंडस्ट्री (जालंधर)
भविष्य के लिए अच्छा, एच फार्म, सी फार्म भरने से मिला छुटकारा: जीएसटी भविष्य के लिए अच्छा है। व्यापारियों को एच फार्म, सी फार्म भरने से छुटकारा मिला है। बदलाव के साथ जीएसटी आसान हो रहा है। रिर्टन 3 महीने में भरने का सुविधा मिलनी चाहिए। -महिंदर अग्रवाल, महासचिव, पंजाब प्रदेश व्यापार मंडल
रिटर्न दाखिल करना उलझन भरा, 30 फीसदी ट्रेड हुए बंद : जीएसटी का सरलीकरण करने की बात कही गई थी, लेकिन रिटर्न दाखिल करना और ई वे बिल बनाना बहुत उलझन भरा काम है। इसकी वजह से करीब 30 फीसदी ट्रेड (छोटे कारोबार) बंद हो गया है। -अनिल कपूर, प्रधान अमृतसर डिस्ट्रिब्यूटर्स एसो.
अफसरों को ही जानकारी नहीं, आम लोगों को क्या होगी : टैक्स इंस्पेक्टर तक जीएसटी से जुड़े सवाल का जवाब 3-4 दिन में दे पाता है। विभाग के अफसरों तक को जीएसटी की बारीकियों की जानकारी नहीं है। तो आम लोगों इसका क्या पता होगा। -नरिंदर सग्गू, प्रधान, जालंधर फोकल प्वाइंट इंडस्ट्री
गलतियां सुधारने का ऑप्शन नहीं, रिफंड सिस्टम भी मैनुअल: रिटर्न फाइल में गलतियों को सुधारने का आॅप्शन नहीं है। रिफंड अप्लाई करने का सिस्टम ऑनलाइन न होकर मैनुअल है। इसकी वजह से छोटे कारोबारियों को परेशानी होती है। -कमल डालमिया, इंडस्ट्रियलिस्ट
कागजी कार्रवाई में लग रहा ज्यादा वक्त, कारोबार मुश्किल: जीएसटी के कारण कारोबार चलाना मुश्किल हो गया है। कागजी कार्रवाई बढ़ने से काम पर ध्यान ही नहीं दे पा रहे। जाॅब वर्क पर भी ई-बिल लगा दिया है। अगर सिस्टम सरल किया जाए तो सबको फायदा हो सकता है। -नितिन तांगड़ी, डाइंग एसो.
सिस्टम तो ठीक है, बस सही ढंग से लागू नहीं किया गया: जीएसटी सिस्टम ठीक है, बस ढंग लागू से नहीं किया गया। महंगाई घटी नहीं बढ़ी है। केंद्र से राज्य को फंड लेट मिलने से विकास पर भी असर पड़ रहा है। अगर सिस्टम ठीक हो तो इससे काफी लाभ हो सकता है। -वरिंदर शर्मा, प्रधान सेल्ज टैक्स बार एसो.
समस्याएं हल हों तो वैट से भी आसान हो जाए जीएसटी सिस्टम: एक बार तो कारोबार काफी प्रभावित हो गया था। अब आसान हो रहा है। पर कई बार रिटर्न फाइल करते समय दिक्कत अाती है। अगर सरकार इन समस्याओं का हल करती है तो ये वैट से आसान बन जाए। -सुनील मेहरा, सेक्रेट्री, पंजाब व्यापार मंडल
  • यह कैसा जीएसटी, जिसमें हर मीटिंग में करना पड़ा संशोधन
- सीधी बात, मनप्रीत सिंह बादल, वित्त मंत्री
- पंजाब को जीएसटी समेत अन्य टैक्सों से साल में करीब 24 हजार करोड़ रुपए मिले हैं। इसमें से कुछ हिस्सा राज्य का और कुछ केंद्र का है। जीएसटी को लेकर वन नेशन वन टैक्स की बात सही थी। हालांकि, हमने दूसरे देशों की नकल मारी, लेकिन यह पूरी तरह लागू नहीं हो सका। कारण यह रहा कि जीएसटी लागू करने से पहले कई चीजों को नजरंदाज किया गया। इसके चलते हर मीटिंग में जीएसटी में संशोधन करने पड़ रहे हैं। हैरानी है कि 21 जुलाई को होने वाली बैठक में भी 200 अमेंडमेंट की जा रही हैं। उद्योगपति तो परेशान हुए ही आम जनता भी दुखी है। टैक्स पेई 10% होते हैं। उनके लिए 90% अन्य लोगों को परेशान किया जा रहा है।

जो फायदे बताए थे, वो नहीं मिले: मनप्रीत ने कहा कि जीएसटी लागू करते समय बताए गए फायदे हमें मिले नहीं। हमें बताया गया था कि टैक्स भरना आसान हो जाएगा, आर्थिकी बेहतरी होगी, रेवेन्यू में इजाफा होगा और इंडस्ट्री व कारोबार में कंपीटिशन बढ़ेगा। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।

अभी भी जीएसटी रिटर्न को लेकर कनफ्यूजन: बादल ने कहा कि जीएसटी लागू करने के लिए पहले तो सारा मुल्क इकट्ठा कर लिया गया। उसके बाद सभी को नाराज किया। जीएसटी रिटर्न भरने में कंप्यूटर नेटवर्क तक क्रैक हो जाता है। छोटे बिजनेसमैन और अन्य छोटी इकाइयां तो तबाह हो गई हैं।

व्यापारियों और ट्रेडर्स की बात जरूर सुननी चाहिए: 2000 करोड़ की जीएसटी चोरी पकड़े जाने के बारे में मनप्रीत ने कहा कि यह तो छोटा आंकड़ा है। जहां प्रतिमाह लाखों इकट्ठे होते हैं, वहां 2000 करोड़ की चोरी छोटा अमाउंट है। सदी में एक बार ही कुछ अच्छा करने का मौका मिलना था, जो हाथ से निकल गया। व्यापारियों और ट्रेडर्स की बात जरूर सुननी चाहिए।

व्यापारियों की बात नहीं सुनी: मनप्रीत ने कहा कि जीएसटी तो ठीक है, लेकिन केंद्र को इसे सही तरीके से इम्प्लीमेंट करना नहीं आया। एक साल से व्यापारी बोल रहे हैं कि 28 परसेंट टैक्स ज्यादा है, लेकिन उनकी बात ही नहीं सुनी जा रही।