इंदिरा जी ने ब्लूस्टार पर अटल जी से बात करने के लिए बनारस में टेलीफोन लाइन बिछवा दी थी / इंदिरा जी ने ब्लूस्टार पर अटल जी से बात करने के लिए बनारस में टेलीफोन लाइन बिछवा दी थी

अटल जी के सबसे करीबी शिवकुमार से बातचीत में उन्होंने उनसे जुड़े किस्से सुनाएं

Bhaskar News

Aug 18, 2018, 02:00 AM IST
अटलजी के अंतिम संस्कार में अलग अटलजी के अंतिम संस्कार में अलग

- अटल बिहारी वाजपेयी का गुरुवार शाम 5.05 बजे एम्स में निधन हुआ

- शुक्रवार को दिल्ली के स्मृति स्थल पर उनका अंतिम संस्कार किया गया

नई दिल्ली. भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी से बात करने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने वाराणसी में एक दिन के भीतर टेलीफोन लाइन बिछवा दी थी। बात 1984 की है। तब अटलजी यहां पेट के अल्सर का इलाज करा रहे थे और ऑपरेशन ब्लू स्टार को लेकर मशविरा लेने के लिए इंदिरा ने उन्हें फोन किया था। अटलजी की अंतिम विदाई के बाद भास्कर संवाददाता अनिरुद्ध शर्मा और शरद पांडेय ने उनके चार दशकों के साथी शिवकुमार से बात की। वे कहते हैं- आज मेरी हालत वैसी ही है, जैसी हजरत निजामुद्दीन के जाने के बाद अमीर खुसरो की हुई थी। खुसरो ने लिखा था- गोरी सोई सेज पे, मुख पर डारे केस। चल खुसरो घर आपने, अब रैन भई चहुं देस।

इंदिरा जी ने अटलजी की बात नहीं मानी : शिवकुमार ने बताया, ''अटलजी का इलाज बनारस के जिंदल नेचुरोपैथी में इलाज चल रहा था। वहां किसी को बात करने की इजाजत नहीं थी। एक दिन अचानक टेलीफोन लाइन डलवाई जाने लगी। हमें अाश्चर्य हुआ। फिर बताया गया कि प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी बात करेंगी। शाम साढ़े 6 बजे फोन आया। इंदिराजी ने फोन करते ही अटलजी से पूछा कि आप कहां हैं? अटलजी ने जवाब दिया कि आप कैसी पीएम हैं। आपको अपने सांसदों के बारे में पता ही नहीं कि वे अस्पताल में भर्ती हैं। हास-परिहास खत्म होते ही इंदिराजी ने कहा कि आपसे एक राय लेनी है। दरबार साहिब में हथियारों के साथ भिंडरावाला घुस गया है। बहुत परेशानी हो रही है। मैं सोच रही हूं कि हमला करके उसे मार दें या गिरफ्तार कर लें। अटलजी ने तुरंत कहा- नहीं ये गलत कदम होगा। वह धार्मिक स्थल है। गिरफ्तार करने के और भी तरीके हैं। इंदिराजी ने जवाब दिया- मैंने तो फैसला कर लिया है। तो अटलजी बोले- ‘इसके परिणाम अच्छे नहीं होंगे। आपको फिर सोचना चाहिए।’ उस बात की परिणिति दुनिया जानती है।''

भैंस मरी तो उसके मालिक को ढूढ़ कर 10 हजार का मुआवजा दिया: शिवकुमार ने कहा, ''ग्वालियर से चुनाव हारने के कुछ महीने बाद मैं और अटलजी क्षेत्र में जा रहे थे। अटलजी की कार मैं ही चलाता था, पर उस दिन ड्राइवर भी साथ था। मथुरा के फरे इलाके में हमारी कार एक भैंस से टकरा गई। हमें चोट नहीं लगी, पर भैंस मर गई। भीड़ जुट गई। लोग अटलजी को नहीं जानते थे। मैंने ड्राइवर से पूछा कि कार स्टार्ट हो सकती है? उसने कहा हां। मैंने कहा भगाओ। कार आगे बढ़ते देख गांव वाले सामने आ गए। मैं रिवाॅल्वर रखता था। हवा में गोली चलाई तो लोग किनारे हो गए। हम सीधे थाने पहुंचे। पुलिस ने अटलजी को पहचान लिया अौर बैठने को कहा। अटलजी बोले- ‘मामला दर्ज कराने आया हूं। मेरी कार से एक भैंस टकराकर मर गई है। कार छोड़कर जा रहा हूं। भैंस के मालिक की पहचान कर मेरे पास भेज देना। ताकि मुअावजा दे सकूं।''

''हम दिल्ली लौट आए। कुछ समय बाद एक नेत्रहीन कवि अटलजी से मिला और अपनी कविता सुनाई। अटलजी को पसंद अाई। उससे पूछा कि कहां रहते हो? उसने बताया कि फरे में। अटलजी को फरे की घटना याद आई। उन्होंने कहा कि फरे में मेरी कार से टकराकर भैंस मर गई थी, उसका मालिक आज तक मुआवजा लेने नहीं आया। क्या उसे मेरे पास ला सकते हो। उसने बताया कि पुलिस वाले उसे घर से बाहर तक निकलने नहीं दे रहे हैं, वो यहां कैसे आएगा। अटलजी ने कहा कि अगर लालकिले पर कविता पाठ करना चाहते हो तो उसे लेकर आआे। वो वापस गांव गया और दो-तीन दिन बाद भैंस के मालिक को लेकर आ गया। अटलजी ने भैंस के मालिक को मुआवजे के तौर पर 10 हजार रुपए दिए और दूसरी ओर नेत्रहीन कवि को लालकिले से कविता पाठ करने का मौका दिलाया।''

लालकिले से लिखा भाषण बुलेट प्रूफ बॉक्स में पढ़ने से असहज हो गए थे: शिवकुमार बताते हैं कि प्रधानमंत्री बनने के बाद अटलजी को लालकिले से बुलेट प्रूफ ग्लास के अंदर से लिखा भाषण देना था। दोनों बातों से वे असहज थे। मैंने कहा- ग्लास हटवा लीजिए। तो बोले- यह व्यवस्था है। हटवा नहीं सकते। उस दिन पहला भाषण पढ़कर दिया। आवास लौटने के बाद मैंने कहा कि आपका भाषण अच्छा नहीं था। क्योंकि इसे सुनने के लिए लोग कई किलोमीटर दूर से आते हैं। अटलजी ने माना कि पढ़कर भाषण दिया, इसलिए यह खराब था।

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