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जालंधर. कुल्हड़ में पीएं-पिलाएं चाय और पत्तल पर खाएं खाना, अब नहीं चलेगा कोई बहाना। अगर बहाना किसी के पास है भी तो उसका भी इलाज हमारे पास मौजूद है और यह इलाज करने का बीड़ा सिटी के राकेश मिनोचा नामक एक बैंकर ने उठाया है। पर्यावरण प्रदूषण के चलते आए दिन बढ़ रही चिंता को कम करने के मकसद से इन्होंने एक खास मुहिम का आगाज किया है। यहां तक कि सोशल मीडिया पर भी इस अभियान को यही नाम दिया है। आइए जानते हैं कि क्या है यह खास किस्म का अभियान, कहां से आई प्रेरणा और आने वाले दिनों में इस खास अभियान के लिए राकेश का क्या विजन है।
शहर के मास्टर तारा सिंह नगर के रहने वाले राकेश मिनोचा बैंक ऑफ बड़ौदा में सेवारत हैं। इन्हें प्रकृति के करीब रहना अच्छा लगता है और शुरुआत से कुछ न कुछ नया करते रहने का शौक है और इसी के चलते जन साधारण की आत्मा को जगाने के मकसद से अब एक नई व्यवस्था लेकर आए हैं। ब्याह-शादियों में, लंगर-भंडारों में इस्तेमाल होने वाले सिंगल-यूज प्लास्टिक की वजह से आए दिन हमारा वातावरण खतरे में पड़ता जा रहा है। जालंधर शहर हो, पंजाब या फिर चाहे भारत देश की ही बात क्यों न हो, प्लास्टिक कचरा एक विकराल समस्या बन चुका है।
इस समस्या के निराकरण के लिए राकेश मिनोचा ने एक खास मुहिम का आगाज किया है कि लोग कुल्हड़ (मिट्टी से बने छोटे पात्र) में चाय या पानी वगैरह पीएं और भोजन पत्तल पर करें, जो प्लास्टिक की अपेक्षा आसानी से डिजॉल्व हो सकें। राकेश मिनोचा ने सोशल मीडिया पर भी इस अभियान को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की मंशा से काम किया है।
अपने फेसबुक पेज 'कुल्हड़ में चाय, पत्तल पर खाना' के बारे में राकेश बताते हैं कि महीनाभर ही हुआ है, जब 22 फरवरी को वह फुर्सत के पलों में फेसबुक अपडेट्स चेक कर रहे थे। इसी दौरान लखनऊ के एक व्यक्ति द्वारा शेयर की गई महज 13 रुपए में पत्तल पर पूरी-भाजी दे रहे एक फूड सर्विस वाले जानकारी देखी तो राकेश के मन में आया कि क्यों न इसी एक आदत को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने का काम किया, जिससे कि आने वाले दिनों में हम सभी की अच्छी सेहत की कामना पूरी हो सके। कोलकाता में अपने ननिहाल में बचपन से कुल्हड़ में चाय या दूसरे पेय पदार्थ वह देख-देखकर बड़े हुए हैं। इन दोनों बातों को मिलाकर बनी पंचलाइन से उन्होंने फेसबुक पेज बना डाला।
अब बात आती है कि प्रदूषण के खिलाफ उपदेश तो हर कोई करता नजर आता है, पर सामने आने वाली चुनौतियों का हल देने की दिशा में बहुत कम लोग सोचते हैं। इस पर राकेश मिनोचा ने काम किया है। बकौल, राकेश लोगों को सबसे बड़ी चुनौती प्लास्टिक या थर्मोकॉल सीट से बनी प्लेट्स और गिलास वगैरह के विकल्प की आती है। ऐसे में हमारी कोशिश होगी कि जिस किसी को भी यह चुनौती आए, वह हमसे मोबाइल नंबर 9814230303 और उनकी ई-मेल आई rakeshminocha19@gmail.com पर खुले दिल से संपर्क कर सकता है। हम उसे विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में पूरी मदद करेंगे। कम्युनिटीज वगैरह में पत्तल की मैन्युफैक्चरिंग का काम शुरू करवाया जा सकता है, वहीं आधुनिकता की मार से जूझ रहे कुम्हारों को भी इससे खासी मदद मिलेगी। उनका कारोबार बढ़े-फलेगा। अगर इसके लिए एक बैंक अधिकारी होने के नाते पैसे (लोन) वगैरह की मदद भी उपलब्ध कराया जा सकता है।
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