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जीतने की जिद्द पालने वाला हॉकी खिलाड़ी मौत से हारा, ऑटो की टक्कर से फट गया था लिवर, घरवालों ने डोनेट की आंखें, पिता बोले- चाहते हैं बेटे की आंखें उन्हें देखें

अंतिम संस्कार के बाद भी कई घंटे तक श्मशानघाट में बैठे रहे टीम के साथी, कोच बोले- हमने सबसे टेलेंटेड हीरा खो दिया

Dainik Bhaskar

Jan 10, 2019, 05:05 PM IST

जालंधर कैंट (पंजाब)। टीम में जीत की जिद्द और जज्बा पैदा करने वाला गांव बड़िंग में रहने वाला 17 साल का अंकित पॉल मंगलवार रात 1:05 पर जौहल अस्पताल में मौत से हार गया, पर जाते-जाते वह दो नेत्रहीनों को जिंदगी भर के लिए रोशनी दे गया। उनके पिता जगराम ने अंकित की आंखें दान करने का फैसला लिया। उन्होंने बताया कि वे चाहते हैं कि किसी न किसी रूप में अंकित जिंदा रहे और उसकी नजरें हम सभी को दोबारा देखें। लुधियाना के समाज सेवी संगठन के हैप्पी मल्ही ने अंकित की आंखें कलेक्ट कीं। अंकित को सोमवार कैंट के दशहरा ग्राउंड चौक पर टैंपो ने टक्कर मार दी थी, जिस कारण उसका लीवर फट गया था। परिवार में माता-पिता के अलावा एक छोटी बहन है। जगराम आरओ आदि रिपेयर का काम करके घर का गुजारा चलाते हैं।


एक ऑपरेशन के बाद भी नहीं हुआ था हालत में सुधार, सिर में भी लगी थी गंभीर चोट


मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक हादसे में अंकित का लीवर काफी डैमेज हो गया था। सोमवार दोपहर को हादसे के बाद जौहल अस्पताल में उसका ऑपरेशन हुआ था लेकिन हालत नाजुक थी। हालत में सुधार होने पर 48 घंटे बाद दूसरा ऑपरेशन होना था। डॉ. बीएस जौहल ने बताया कि लीवर फटने और सिर पर गहरी चोट के कारण अंकित काे बचाया नहीं जा सका। उधर, थाना कैंट के एएसआई कुलदीप के मुताबिक सोमवार साइकिल पर जा रहे अंकित को पीछे से आए टैंपो ने टक्कर मार दी थी। ऑटो ड्राइवर चंदन ने कहा था कि हड़बड़ाहट में एक्सीलेटर पर पैर दब गया था। गिरफ्तार ऑटो ड्राइवर को जमानत पर छोड़ दिया था लेकिन बुधवार को अंकित की मौत के बाद आईपीसी की धारा 304-ए भी जोड़ दी गई।


हमने सबसे टेलेंटेड हीरा खोया : कोच कुलबीर सिंह


स्कूल के कोच व बड़िंग स्पोर्ट्स क्लब के ऑनर कुलबीर सिंह ने बताया कि दो साल जगराम ने अंकित को क्लब में भर्ती करवाया था। अंकित बेहतरीन फार्वर्ड खिलाड़ी था और गजब का स्टेमिना था। वह सभी खिलाड़ियों में जीत का जज्बा पैदा करते हुए अंत तक मैदान में जूझता था। अंकित ने मंगलवार को मोगा में होने वाली ऑल पंजाब हॉकी क्लब कंपीटिशन में भाग लेना था। उसकी मौत से टीम का मनोबल टूटा है। उधर, राम बाग दीपनगर में अंतिम संस्कार के बाद कई घंटे उसकी टीम के खिलाड़ी वहीं बैठे रहे।

80 साल की उम्र तक दान की जा सकती हैं आंखें


80 साल तक की उम्र के मृतक की आंखें 6 घंटे के बीच दान की जा सकती हैं। चश्मा, मोतियाबिंद की सर्जरी का इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता लेकिन काला मोतिया, एचआईवी, वायरल फीवर और कैंसर के रोगी ऐसा नहीं कर सकते। मृत्यु के बाद मृतक की बाद आंखें बंद रखें और उन पर भीगी हुई रूई या नम कपड़ा रखें। पॉलीथीन पैकेट में बर्फ के टुकड़े डालकर माथे पर रख सकते हैं। गुरु नानक मिशन आई बैंक के इंचार्ज सुशील कुमार ने बताया कि आंखें दान करने संबंधी किसी भी समय 97799-55569 पर संपर्क किया जा सकता है।

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