66 साल के बलवंत रोजाना 2 Km घोड़े के साथ लगाते हैं दौड़, बचपन में खरगोश और कुत्तों के साथ करते थे रेस / 66 साल के बलवंत रोजाना 2 Km घोड़े के साथ लगाते हैं दौड़, बचपन में खरगोश और कुत्तों के साथ करते थे रेस

युवाओं को मैसेज - इन चीजों से दूर रहोगे तो मेरे जैसा आप भी घोड़ा बनोगे 

जय तिवारी

Feb 11, 2019, 11:48 AM IST
Jalandhar Punjab News 66-year-old balwant  running with horses

बटाला/जालंधर। जिस उम्र में घुटनों के दर्द और बीमारियों से परेशान होकर लोगों का चलना मुश्किल हो जाता है उस उम्र में 66 साल के बलवंत सिंह रोजाना 2 किलोमीटर घोड़े के साथ दौड़ लगाते हैं। शरीर इतना फिट कि अपने गांव से 31 किलोमीटर दूर गुरदासपुर तक दौड़कर डेढ़ घंटे में पहुंच जाते हैं। अब तक रेस में 100 से अधिक मेडल, सर्टीफिकेट्स और ट्राफियां अपने नाम कर चुके हैं। उनका घाेड़ा और कुत्ता इतने ट्रेंड हैं कि वह उसके साथ दौड़ते हैं। घोड़े को रस्सी से पकड़कर नहीं दौड़ना पड़ता है अपने आप ही साथ दौड़ते हैं।

घोड़े के साथ दौड़ने के कारण उन्हें लोग बलवंत घोड़ा नाम से ही बुलाते हैं। इतनी दौड़ के बाजवूद कभी बंलवंत सिंह की सांस नहीं चढ़ती। बलवंत सिंह को बचपन से ही दौड़ने का शौक था। 18 साल में कबड्डी खेलनी शुरू की लेकिन आतंकवाद के दौर में छोड़ दी। पिछले दिनों अटारी बाॅर्डर पर बीएसएफ द्वारा आयोजित दौड़ में पहला स्थान हासिल कर 5100 रुपए का इनाम जीता था। मुंबई में हुई दौड़ में तीसरा स्थान हासिल किया। इसके अलावा मुंबई, लखनऊ, इलाहाबाद, हरियाणा, चंडीगढ़, जालंधर, अमृतसर, दिल्ली, गुड़गांव, पटियाला, संगरूर आदि में हुई दौड़ों में भी भाग ले चुके हैं।


बचपन में खरगोश और कुत्तों के साथ लगाते थे दौड़


बलवंत सिंह ने बताया कि वह बचपन में खरगोश और कुत्तों के साथ दौड़ लगाते थे। पत्नी, दो बेटियां और तीन बेटे हैं। मैं कितना भी दौड़ लगा लूं थकान नहीं होती। जिंदगी में इंसान को कभी थकना नहीं चाहिए और निरंतर चलते रहते रहना चाहिए, चाहे कितनी भी मुश्किलें रास्ते में आएं।


- 2015 से 2018 तक ये मेडल नाम किए
- 2015 जीएनडीयू में 21 किमी. दौड़ में गोल्ड मेडल
- 2016 हरियाणा में 1500 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल
- 2016 चंडीगढ़ में 5 किलोमीटर दौड़ में गोल्ड मेडल
- 2017 चंडीगढ़ में 21 किमी. दौड़ में गोल्ड मेडल
- 2018 चंडीगढ़ में 800 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल

युवाओं को मैसेज - नशे से दूर रहोगे तो मेरे जैसा घोड़ा बनोगे


उन्होंने बताया, वह सादा भोजन और 100-150 ग्राम देसी घी रोज खाता हूं। नशे के सख्त खिलाफ हूं। युवा पीढ़ी को मेरा संदेश है कि नशे से दूर रहें। डाइट संतुलित रखें। पढ़ाई के साथ खेलें भी। मेरी उम्र में आप भी मेरे जैसा घोड़ा बने रहोगे।


टार्गेट : बलवंत सिंह 60 से अधिक आयु वर्ग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलकर अपने देश का नाम रोशन करना चाहते हैं।

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