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सोडल मेला / मन्नत में बदल चुकी है 150 साल पहले शुरू हुई मान्यता, अनंत चौदस पर देश-विदेश से आते हैं लाखों श्रद्धालु



Know facts about Sodal Festival of Jalandhar
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Know facts about Sodal Festival of Jalandhar
  • शेषनाग के रूप में प्रकट हो दिया था नि:संतान दंपतियों के लिए संतान सुख का वरदान
  • अब 4 चार दिन दिन-रात चलता है 1960 के आसपास चंद घंटों तक चलने वाला मेला

Dainik Bhaskar

Oct 12, 2018, 11:36 AM IST

जालंधर। जालंधर स्थित श्री सिद्ध बाबा सोढल मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां अनंत चौदस पर बहुत बड़ा मेला लगता है, जो कई दिन तक चहल-पहल का केंद्रबिंदू बना रहता है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के चलते एक दिन पहले ही हवन से इसकी शुरुआत हो जाती है। आनंद-चड्ढा परिवारों की ओर से बरसों पहले शुरू की गई मेले की रीत अब सभी कौम की आस्था में बदल गया है। एक परिवार का न रहकर सभी का बन गया है। 1960 के आसपास चंद घंटों तक चलने वाला मेला अब 3 से 4 चार दिन तक दिन-रात चलता है। मान्यता के अनुसार, चड्‌ढा और आनंद परिवार के सदस्य एक दिन पहले ही इकट्ठे हो जाते हैं।

 

ये है मान्यता: मान्यता है कि इस तपोभूमि पर आदर्श मुनि तपस्या करते थे। बाबा सोढल की माता जी उनकी सेवा करती थीं। मुनि जी ने कहा- बेटी तुमने कभी मुझसे कुछ मांगा नहीं। इस पर माता जी ने उनसे पुत्र रत्न का वरदान मांगा। मुनि जी ने ध्यान लगाया और कहा- तुम्हारे भाग्य में औलाद सुख नहीं है। मुनि जी ने भगवान विष्णु की अाराधना कर पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया। उन्होंने संतान पर कभी गुस्सा न करने की हिदायत भी दी। एक दिन बाबा जी की मां तालाब पर कपड़े धो रही थीं, तब बाबा सोढल पांच साल के थे। मां ने उन पर गुस्सा किया तो वे तालाब में गायब हो गए। मां को बिलखते देख बाबा सोढल ने नाग के रूप में दर्शन दिए और कहा- मैं सदा यहीं आपके बीच रहूंगा। इस स्थान पर नतमस्तक होने वाले नि:संतान भक्तों को भी औलाद सुख मिलेगा। करीब 150 साल पहले शुरू हुई बाबा सोढल की मान्यता आज लाखों भक्तों की मन्नतों में बदल चुकी है। भक्त अपनी मुरादें पूरी होने पर बच्चों को और अपने सगे-संबंधियों के साथ लेकर ढोल-बाजों के साथ नाचते-गाते आते हैं। मंदिर के चारों तरफ कई किलोमीटर में आने-जाने वाले भक्तों के लिए दिन-रात लंगर चलता है।

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