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पशु पालिका में अपंग पशुओं के इलाज के लिए फंड की कमी, कर्मचारी भी कम

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 03:27 AM IST

Jalandhar News - पुलिस लाइन स्थित पशुपालिका में स्टाफ की कमी और निगम द्वारा गोबर न उठाने के कारण हालत खराब होते जा रहे हैं। वहां...

Jalandhar News - lack of fund for the treatment of crippled animals in the animal husbandry even less employee
पुलिस लाइन स्थित पशुपालिका में स्टाफ की कमी और निगम द्वारा गोबर न उठाने के कारण हालत खराब होते जा रहे हैं। वहां पशुओं की देखभाल करने वाले डॉ. चंद्रभूषण और समाजसेवी संस्थाएं पूरी मेहनत से बीमार और घायल पशुओं की संभाल में लगे हैं। यहां तक की जानवरों की गंदगी और साफ सफाई का काम भी अधिकारी खुद कर रहे हैं। हालांकि यह काम नगर निगम अधिकारियों का है। पशुपालिका में बीमार और घायल हालत में मिलने वाले पशुओं का इलाज किया जाता है।

चंद्रभूषण ने कहा कि पशुपालिका में सैकड़ों बीमार और घायल पशु हैं। इनकी देखरेख में आर्थिक रूप से भी तंगी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा स्टाफ की भी कमी है। निगम मुलाजिम अक्सर यहां पशुओं को छोड़ जाते हैं, लेकिन मदद ना के बराबर ही मिलती है। वह मेयर और कमिश्नर आदि आला अधिकारियों से मदद की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन सहयोग नहीं मिला। चंद्रभूषण ने कहा कि पशुओं के लिए सरकार को जालंधर में अपना कंपाउंड बनाना चाहिए। आखिर बेजुबान जानवर कहां जाएं।

कई बार कहने के बाद भी निगम नहीं उठवा रहा गोबर

पशुपालिका में जमा गोबर। (दाएं) पशुपालिका में अपंग पशु, जिनका इलाज चल रहा है। -भास्कर

मच्छरों की भरमार, बीमारियां फैलने की आशंका

पशु पालिका में इतना गोबर इकट्ठा हो गया है कि सर्दी में भी काफी मच्छर पैदा हो गया है। अंदर काम करने वाले अधिकारियों ने कहा कि जल्द गोबर नहीं उठाया गया तो मच्छरों के साथ-साथ बीमारियां फैलनी शुरू हो जाएंगी। आधी से ज्यादा पशु पालिका में गोबर पड़ा है। कई बार हेल्थ अफसर डॉ. श्री कृष्ण को कब चुके हैं, लेकिन गोबर नहीं उठाया जा रहा।

अपंग पशुओं की बढ़ती जा रही गिनती...पशु पालिका में दिन-ब-दिन अपंग पशुओं की गिनती बढ़ती जा रही है। इनमें ज्यादातर कुत्ते और गाय हैं, जिनके हाथ-पैर कटे हैं। अपंग पशुओं को संभालने के लिए कर्मचारी की कमी होने के कारण अधिकारियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। इस कारण पशुपालिका अधिकारियों की तरफ से प्रशासन से जल्द कर्मचारियों को भर्ती करने की मांग की जा रही है। अगर कर्मचारी भर्ती न किए गए तो पशुओं को संभालना बेदह मुश्किल हो जाएगा।


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