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‘ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट वाल’ पर शहर के दो गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ियों का नाम लिखने से चूका प्रशासन

जालंधर | बीएमसी चौक फ्लाईओवर में ओलंपिक मेडलिस्ट वाल पर जिला प्रशासन और नगर निगम जालंधर, वेल्फेयर सोसायटी दो नाम...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 03:15 AM IST

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    जालंधर | बीएमसी चौक फ्लाईओवर में ओलंपिक मेडलिस्ट वाल पर जिला प्रशासन और नगर निगम जालंधर, वेल्फेयर सोसायटी दो नाम लिखना भूल गई है। इस दीवार पर 1980 मास्को ओलंपिक्स में स्पेन को 4-3 से हराकर गोल्ड मेडल जीतने वाले खिलाड़ी चरणजीत कुमार व दविंदर सिंह गरचा का नाम नहीं लिखा गया है।

    दोनों खिलाड़ियों ने देश को ओलंपिक गोल्ड मेडल दिलाने में उतना ही संघर्ष किया है, जितना बाकी भारतीय टीम के खिलाड़ियों ने। 1980 ओलंपिक के बाद देश को हॉकी में कोई पदक नहीं मिला। ओलंपिक्स के पूरे टूर्नामेंट में दविंदर सिंह गरचा और चरणजीत कुमार ने विरोधी टीमों पर आक्रमक रुख अपनाते हुए गोल करके टीम को गोल्ड मेडल दिलाया।

    अनदेखी

    1980 मॉस्को ओलंपिक्स में इंडिया को मेडल दिलाने वाले खिलाड़ी चरणजीत कुमार व दविंदर गरचा को भूले, भाई ने जताई नराजगी

    1980 ओलंपिक के बाद देश को हॉकी में कोई पदक नहीं मिला। - भास्कर

    दोनों ओलंपियन पंजाब पुलिस से एआईजी रिटायर्ड हैं

    फैमिली के साथ विदेश में है चरणजीत कुमार

    चरणजीत कुमार अपनी फैमिली के साथ विदेश में है लेकिन प्रशासन की तरफ से हुई इस चूक पर उनके भाई ओलंपियन गुंदीप कुमार ने बताया कि उनके बड़े भाई ने देश को गोल्ड मेडल दिलाया है लेकिन उनका नाम न लिखना दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए। दीवार पर गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ियों का नाम लिखना काफी सम्मान वाली बात है लेकिन अगर दो खिलाड़ियों के नाम नहीं लिखे गए तो इसकी जांच होनी चाहिए और गलती को सुधारना होगा। ओलंपियन दविंदर सिंह गरचा, चरणजीत सिंह, सुरिंदर सोढी और गुरमेल सिंह चारों पंजाब पुलिस से रिटायर्ड हैं।

    प्रशासन और स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट जिम्मेदार

    गोल्ड मेडलिस्ट दविंदर सिंह गरचा ने कहा कि इसके लिए जिला प्रशासन व स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट जिम्मेदार है। उन्होंने गोल्ड मेडल जिताने में काफी संघर्ष किया है लेकिन अगर बाकी खिलाड़ियों के नाम लिखे हैं तो उनका और चरणजीत कुमार का नाम भी जरूर लिखना चाहिए था। क्योंकि शहर स्पोर्ट्स हब है और हॉकी ओलंपिक्स पर दीवार में पेंट से नाम लिखे गए हैं, जो सम्मान की बात है। इसलिए उनके नाम भी लिखने चाहिए, लेकिन अगर फिर भी प्रशासन नहीं लिखता तो हम दोनों खिलाड़ी गोल्ड मेडलिस्ट हैं और दुनिया हमें इससे ही जानती है तो इस सच्चाई को नहीं मिटाया जा सकता।

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