Hindi News »Punjab »Jalandhar» सिविल के अलावा भी शहर में चार बड़े अस्पताल पर न डॉक्टर हैं और न स्टाफ

सिविल के अलावा भी शहर में चार बड़े अस्पताल पर न डॉक्टर हैं और न स्टाफ

सिविल अस्पताल में रोजाना 1500 से 1700 लोग दवा लेने आते हैं। मगर डॉक्टरों की किल्लत के चलते सेहत सेवाओं की क्वालिटी बुरी...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 03:25 AM IST

  • सिविल के अलावा भी शहर में चार बड़े 
अस्पताल पर न डॉक्टर हैं और न स्टाफ
    +1और स्लाइड देखें
    सिविल अस्पताल में रोजाना 1500 से 1700 लोग दवा लेने आते हैं। मगर डॉक्टरों की किल्लत के चलते सेहत सेवाओं की क्वालिटी बुरी तरह प्रभावित होती है। सिविल का भार कम करने के लिए सेहत विभाग ने शहर में चार अन्य अस्पतालों का निर्माण किया है। इनमें से एक अस्पताल पीएपी कांप्लेक्स में तीन साल पहले शुरू हो चुका है लेकिन वहां कोई भी स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं है। जबकि अन्य तीन अस्पतालों की बिल्डिंगें बनकर तैयार हैं मगर अभी तक कंस्ट्रक्शन कंपनी से हैंडओवर नहीं किया गया है। इनमें 120 फुटी रोड बस्ती गुजां, टीवी टावर खुरला किंगरा की बैकसाइड और दादा काॅलोनी में निगम दफ्तर की बगल में बने कम्युनिटी हेल्थ सेंटर्स शामिल हैं।

    छह महीने पहले बनकर तैयार हो चुके इन अस्पतालों में स्टाफ भेजने के सवाल पर सेहत विभाग यही रट लगाए बैठा है कि बिल्डिंग में कुछ कमियां हैं। इसलिए हम अस्पतालों को टेकओवर नहीं कर रहे। मगर असल में इन अस्पतालों के लिए जरूरी स्पेशलिस्ट डॉक्टर ही उनके पास मौजूद नहीं हैं। पूरा सेहत विभाग डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रहा है। पंजाब में लगभग 350 स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के पद तो पुराने अस्पतालों में ही खाली पड़े हैं। ऐसे में पुरानी वेकेंसी ही जब तक नहीं भरी जाती नए अस्पतालों के लिए विभाग के पास डॉक्टर कहां से आएंगे।

    बनाए गए सभी अस्पताल अगर ऑपरेटिव हो जाएं तो पब्लिक काे हर मर्ज के लिए इलाज के लिए सिविल अस्पताल जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

    तीन अस्पतालों की बिल्डिंग तैयार, डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है सेहत विभाग

    सूबे के पुराने अस्पतालों में ही 350 के करीब स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के पद खाली

    पीएपी में स्थित सीएचसी

    120 फुटी रोड बस्ती बावा खेल रोड पर स्थित सीएचसी

    सेहत सेवाओं पर असर, 30 बेड के अस्पतालों को 50 बेड तक किया जा सकता है अपग्रेड

    अगर डॉक्टर मिल जाएं तो 6 माहिर हर अस्पताल में होंगे

    प्रत्येक अस्पताल में आंख, सर्जरी, गायनी, ईएनटी, मेडिसिन, एनेस्थीसिया जैसे 6 माहिर मरीजों की सेवा के लिए उपलब्ध रहेंगे। 24 घंटे एमबीबीएस डॉक्टर इमरजेंसी में उपलब्ध रहेगा। यानी अब हर मरीज को सिविल अस्पताल ले जाने की जरूरत नहीं होगी। इस अस्पताल के बनने से शहर के चारों हलके नॉर्थ, सेंट्रल, कैंट और सेंटर में अपने अपने 30 बेड के अस्पताल बन जाएंगे। इन्हें 50 बैड तक अपग्रेड किया जा सकता है। मगर सेहत विभाग के रवैये से जनता को ये सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। सेहत सेवाओं की क्वालिटी बुरी तरह प्रभावत हो रही है।

    पीएपी की चारदीवारी के कारण नहीं आ रहे मरीज

    पीएपी हेडक्वार्टर्स में दिसंबर 2015 में ही 30 बेड कैपेसिटी का अस्पताल शुरू हो चुका था। यह अस्पताल सिर्फ पीएपी के जवानों के लिए नहीं बल्कि सेंट्रल हल्के के लोगों के लिए बना था। अस्पताल को पीएपी से बाहर बनाया जाना चाहिए था ताकि मरीज किसी भी वक्त वहां दाखिल हो सकें। मगर पीएपी की चारदीवारी में पांच करोड़ रुपए लागत से बने अस्पताल में बहुत कम लोग जाते हैं। इलाके के ज्यादातर लोगों को तो पता भी नहीं है कि सिविल अस्पताल जालंधर के अलावा यहां कोई दूसरा अस्पताल भी है। तीन साल में इस अस्पताल को पूरा स्टाफ भी नहीं मिल पाया है। एसएमओ डॉ. रमन शर्मा ने बताया कि अस्पताल में सिर्फ एक मेडिकल अफसर और एक डेंटल सर्जन है।

    नया स्टाफ एक साल तक मिलने की उम्मीद नहीं

    सेहत विभाग के जानकार मानते हैं कि सरकार बिल्डिंगें तो बना रही है लेकिन उन्होंने डॉक्टर और स्टाफ की भर्ती का कोई एजेंडा तैयार नहीं किया है। विभाग के पास मौजूदा स्टाफ की सैलरी देने के पैसे मुश्किल से जमा हो रहे हैं। अगर केंद्र सरकार से फंड न मिलें तो सेहत सेवाएं ठप हो जाएंगी। इसके लिए पंजाब सरकार नए स्टाफ के लिए केंद्र से मदद मांग सकता है। यह प्रोसेस लंबा है और इसमें एक साल का समय लग जाएगा। तब तक इन अस्पतालों को केवल डिस्पेंसरियों की तरह ही इस्तेमाल किया जाएगा। इन अस्पतालों में ऑपरेशन थियेटर, लैब, एक्सरे से लेकर कई सेहत सेवाएं उपलब्ध हैं।

    हम फिलहाल पुराने स्टाफ से शुरुआत करेंगे : सिविल सर्जन

    सिविल सर्जन डॉ. जसप्रीत कौर ने बताया कि सोमवार को ही हमने पंजाब हेल्थ सिस्टम कार्पोरेशन को स्टाफ के लिए रिमाइंडर भेजा है। बिल्डिंग में भी कुछ कमियां हैं। उन्हें जबतक दूर नहीं किया जाता अस्पताल शुरू करने में देरी होगी। कमियां दूर हो जाती हैं तो हम पुराने स्टाफ से ही इन अस्पतालों को शुरू कर सकते हैं। डॉ. जसप्रीत कौर ने कहा कि यह सही है कि कम डॉक्टरों का असर सेहत सेवाओं पर पड़ रहा है पर हमारी पूरी कोशिश है कि जल्द से जल्द स्थिति बदले।

    केंद्र सरकार से मिले फंड से बने अस्पताल...तीनों अस्पताल नेशनल अर्बन हेल्थ मिशन के तहत बने हैं। प्रत्येक अस्पताल की बेड केपेसिटी 30 बेड है जिसे आसानी से बढ़ाकर 50 बेड तक किया जा सकता है।

    तीन साल पहले पीएपी में बने अस्पताल में सिर्फ एक मेडिकल अफसर से चल रहा काम

  • सिविल के अलावा भी शहर में चार बड़े 
अस्पताल पर न डॉक्टर हैं और न स्टाफ
    +1और स्लाइड देखें
आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Jalandhar

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×