Hindi News »Punjab »Jalandhar» किसी ब्लड बैग पर लेबल नहीं था कि उसमें कौन-सा खून है

किसी ब्लड बैग पर लेबल नहीं था कि उसमें कौन-सा खून है

रक्तवाहिनी के ब्लड बैंक में एक के बाद एक गड़बड़ी का खुलासा हो रहा है। जॉइंट कमिश्नर ड्रग को मिली रिपोर्ट में...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 09, 2018, 04:11 AM IST

रक्तवाहिनी के ब्लड बैंक में एक के बाद एक गड़बड़ी का खुलासा हो रहा है। जॉइंट कमिश्नर ड्रग को मिली रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ब्लड बैंक ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट की लगभग एक दर्जन से ज्यादा नियमों की अनदेखी कर रहा था। ब्लड बैंक ने किसी भी खून की थैली की न तो कलर कोडिंग की थी और न ही उन पर यह लिखा था कि यह दान में मिला है या रिप्लेसमेंट में। लाइसेंस बीटीओ और 4 अन्य कर्मचारियों के नाम जारी हुआ था। ब्लड बैंक की नर्स और एक अन्य लैब टेक्नीशियन अभी भी गैरहाजिर हैं और पुलिस उनकी तलाश भी कर रही है। उधर, ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट के तहत अगर ब्लड बैंक स्टाफ में कोई बदलाव करता है तो जानकारी ड्रग विभाग को देनी होती है। मगर बैंक ने 2 नए कर्मचारी रखे लेकिन जानकारी विभाग को नहीं दी।

गुलाबदेवी अस्पताल स्थित इस ब्लड बैंक को हरियाणा की संस्था रक्तवाहिनी चला रही थी। 4 अगस्त की आधी रात को हिंदुस्तान वेलफेयर ब्लड डोनर्स को अस्पताल की गड़बड़ियों की जानकारी मिली तो ड्रग विभाग को शिकायत दी। उसी रात ब्लड बैंक सील कर दिया गया। जो अभी भी बंद है। बड़ी गड़बड़ी 1 नंबर के कई ब्लड बैग जारी करना ही थी।

ब्लड बैंक का लाइसेंस रद्द होना तय, नष्ट किए ब्लड का रिकॉर्ड नहीं

किसी भी बैग पर नहीं लिखा था कि यह रिप्लेसमेंट है या किसी वालंटियर ने दान किया है।

खून के बैग्स पर एक्सपायरी डेट नहीं थी। कुछ पर महज एक्सपायरी मंथ ही लिखा था।

बीटीओ मौके पर नहीं था। जबकि ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट के तहत वहां बीटीओ का होना लाजमी था।

ब्लड बैग की न तो कलर कोडिंग की गई थी और न ही सही से बलिंग थी। हर ब्लड ग्रुप का अलग रंग और स्टीकर होता है ताकि किसी भी सूरत में मरीज को गलत खून न चढ़ जाए।

ब्लड बैंक के कर्मचारी वर्दी में नहीं थे।

44 में से 24 ब्लड बैग फ्रिज की बजाय थर्मोकोल के डिब्बों में एक अलमारी में रखे गए थे। खून 6 डिग्री सेल्सियस की बजाय लगभग 28 से 32 डिग्री में रखा गया था, जिससे वह कुछ समय में ही खराब हो जाता है।

ज्यादातर बैग्स के ब्यौरे डोनर या इश्यू रजिस्टर पर नहीं लिखे गए थे।

डिस्कार्ड यानी नष्ट किए गए ब्लड बैग्स का कोई रजिस्टर ही नहीं रखा गया था, जिससे ऐसा लगता है कि दो साल में एक भी डोनर के खून में एक भी बीमारी नहीं मिली, जोकि ड्रग विभाग को हजम नहीं हो रही।

ब्लड बैंक की नर्स इंद्रजीत कौर, टेक्निकल सुपरवाइजर राम दास और लैब टेक्नीशियन प्रमोद कुमार गैरहाजिर चल रहे हैं। ड्रग विभाग ने इन तीन लोगों की जानकारी भी मांगी है।

हिरासत में लिए गए दिनेश कुमार और बबलू को ब्लड बैंक में नौकरी देने के बाद रक्तवाहिनी ने यह जानकारी ड्रग विभाग को नहीं दी थी।

कुछ ब्लड बैग्स पर तो नंबर भी नहीं लिखे थे तो कुछ नंबरों पर एक से अधिक ब्लड ग्रुप के बैग्स बेच दिए गए थे।

ब्लड डोनेशन कैंप के कारण नहीं हो पाई सैंपलों की जांच

ब्लड बैंक से मिले ब्लड बैग्स में से छह के टेस्ट बुधवार को होने तय थे मगर अस्पताल का स्टाफ खूनदान कैंप में व्यस्त था। अब वीरवार को सैंपल टैस्ट होंगे। इससे पहले मंगलवार को तीन बैग के टैस्ट हो चुके हैं, जो सही पाए गए थे। उनमें किसी तरह की बीमारी फैलाने वाले कीटाणु नहीं मिले थे।

थाना-2 के एसएचओ मनमोहन सिंह ने मंगलवार को बताया कि हमें अदालत से छठे आरोपी डॉ. आईजी अग्रवाल के खिलाफ वारंट नहीं मिला है। वारंट मिलने के बाद ही टीमों को रवाना करेंगे।

हरियाणा के टोहाना से शुरू हुई रक्तवाहिनी के पंजाब में 5 में से 3 ब्लड बैंक ड्रग विभाग की कार्रवाई के चलते बंद हो चुके हैं। सिर्फ जालंधर के कर्मचारियों पर ही पर्चा दर्ज हुआ है जबकि बाकी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जानकार यह भी बता रहे हैं कि जैसे ही जालंधर ब्लड बैंक के कर्मचारियों पर पर्चे हुए, बाकी ब्लड बैंकों के बीटीओ और लैब टेक्नीशियन इस्तीफा देकर काम छोड़ गए। वहीं ड्रग विभाग ने भी इन ब्लड बैंकों पर कार्रवाई कर रिकॉर्ड जब्त कर लिया है।

पुलिस को वारंट नहीं मिला

कंपनी के चार ब्लड बैंक हो चुके हैं बंद

अस्पताल ने कुछ समय पहले अपना स्टाफ बदला पर ड्रग विभाग को नहीं बताया

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Jalandhar

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×