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अमल न करें तो सत्संग में सुने हुए प्रवचन बेमानी

जब व्यक्ति के पुण्यफल फलित होते हैं तो उसे सत्संग और संतों का सानिध्य मिलता है। सत्संग रूपी जल की बौछारों से...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 04:15 AM IST

जब व्यक्ति के पुण्यफल फलित होते हैं तो उसे सत्संग और संतों का सानिध्य मिलता है। सत्संग रूपी जल की बौछारों से व्यक्ति की आत्मा पावन होती है। कर्म का मैल धुल जाता है, जो शख्स गुरु-संतों की बात सत्संग में मन से सुनते हैं उनका जीवन सुधर जाता है। इन आशीर्वचनों से स्वामी सिकंदर महाराज ने साधकों को कृतार्थ किया। जो प्राचीन शिव मंदिर दोमोरिया पुल में आयोजित साप्ताहिक बगलामुखी यज्ञ की अध्यक्षता कर रहे थे। यज्ञ अखिल भारतीय दुर्गा सेना संगठन की तरफ से किया गया।

सत्संग तो वह स्थान है जहां प्रभु के नाम का प्रचार किया जाता है। सच्चे महात्मा के सत्संग में जात-बिरादरी और धर्म-समाज या व्यक्ति विशेष की निंदा नहीं होती है। हम जब संसार में पैदा हुए तो जात-बिरादरी लेकर नहीं आए थे। जब हम में मन, बुद्धि और चेतना आई तो नाम मिला कर्म के आधार पर वर्ण व्यवस्था में बंध गए। हमने रिश्ते-नाते बना लिए। जमीन-जायदाद बना ली और इसे अपना समझकर बैठ गए लेकिन जब जाने का वक्त आता है तो वैसे ही चले जाते हैं जैसे आए थे।

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