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बिल्ला मर्डर केस में इकलौता गवाह मुकरा, एक्सपोर्टर राजन कोचर बरी

3 जून 2016 को कंपनी बाग चौक के पास इलाहाबाद बैंक के बाहर हुए पाल गारमेंट्स के मालिक अनिल बिल्ला मर्डर केस में कोर्ट ने...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 04:20 AM IST

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    3 जून 2016 को कंपनी बाग चौक के पास इलाहाबाद बैंक के बाहर हुए पाल गारमेंट्स के मालिक अनिल बिल्ला मर्डर केस में कोर्ट ने आरोपी एक्सपोर्टर वरिंदर सिंह उर्फ राजन कोचर को बरी कर दिया है। सेशन जज एसके गर्ग की कोर्ट ने फैसला सुनाया। भीड़-भाड़ वाले इलाके में गाड़ी में बैठे बिल्ला को शूटर तीन गोलियां मारकर फरार हो गए थे। कोई चश्मदीद गवाह न होने और एक मात्र गवाह के बयान बदलने के बाद पुलिस का पक्ष कमजोर पड़ गया। राजन की प|ी ने भी राजन को कातिल नहीं माना था। राजन को पुलिस ने दो जुलाई 2016 को पकड़ा था और वह 28 मार्च 2017 तक जेल में रहा था। उसे जमानत मिल गई थी। राजन के खिलाफ नशे का एक अलग मामला कोर्ट में विचाराधीन है। राजन ने कहा कि-दो साल तक वह और उसकी फैमिली परेशान रही। माथे पर लगा दाग हट गया है।

    400 मीटर की दूरी 36 मिनट में राज...सीसीटीवी कैमरे से क्लियर हुआ था कि 49 साल के बिल्ला 3 जून 2016 को सुबह 6 बजकर 35 मिनट पर फॉरच्यूनर गाड़ी में नामदेव चौक के पास स्थित रमाडा होटल आए थे। होटल से गाड़ी में 9 बजकर 34 मिनट पर निकले थे। उनकी गाड़ी को कंपनी बाग के सामने इलाहाबाद बैंक के पास कैश जमा करवाने आए ग्राहक ने 10 बजकर 10 मिनट पर खड़ा देखा था। गाड़ी में हेलमेट पहने एक शख्स बिल्ला के साथ वाली सीट पर बैठा था। 10 बजकर 20 मिनट पर बैंक गार्ड ने गाड़ी का शीशा और खून देख कर शोर मचाया था। तब के एसएचओ परमजीत सिंह 10 मिनट में क्राइम सीन पर आए थे। एसएचओ बॉडीगार्ड बिल्ला को सिविल अस्पताल ले गए थे, मगर उनकी मौत हो गई थी। होटल से लेकर क्राइम सीन 400 मीटर की दूरी पर था। वहां पहुंचने में एक मिनट ही लगता है, मगर इस दौरान बिल्ला 36 मिनट कहां था कि पुलिस आज तक पता नहीं लगाई पाई।

    2साल 9महीने 8दिन बाद गलत साबित हुए पुलिस के सारे दावे

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    हेलमेट पहने आया था शूटर

    राजन इसलिए बना मेन सस्पेक्ट... क्राइम सीन पर बिल्ला को देखने नहीं आया

    बिल्ला का मर्डर जिस गाड़ी में हुआ था, वह राजन कोचर की पार्टनरशिप में चलने वाली फर्म के नाम पर थी। पुलिस ने 2 जुलाई को राजन को संदिग्ध मानकर पकड़ा था और बिल्ला की प|ी ममता मनकोटिया की स्टेटमेंट पर राजन को आरोपी बनाया था। पुलिस ने पैसे के लेनदेन को मर्डर का कारण बताया था।

    दलील...नमर्डर की कोई वजह और न चश्मदीद

    बचाव पक्ष के एडवोकेट संजीव बांसल ने अदालत में दलील दि कि पुलिस ने ही रिवाल्वर की टेंपरिंग कर राजन को फंसाया है क्योंकि शहर में लगातार मर्डर हो रहे थे। किरकिरी से बचने के लिए पुिलस ने ऐसा किया। उधर, बिल्ला की प|ी ने तो शुरू से लेकर ट्रायल तक राजन को हत्यारा नहीं माना था।

    गाड़ी की फ्रंट सीट पर बैठा

    आरोपी बनाने की 3 वजह

    1. मर्डर का पता लगने के बाद भी क्राइम सीन पर न आना। राजन ने कहा था कि डिस्क प्रॉब्लम के इलाज के लिए जाते हुए उसे सूचना मिली थी।

    2. पुलिस को पता चला था कि शूटर सफेद रंग की एक्टिवा पर आया था। राजन के पास भी सफेद कलर की ही एक्टिवा थी, जो शक की वजह बनी।

    3. बिल्ला को 32 बोर के रिवाल्वर से गोली मारी गई थी। राजन के पास भी 32 बोर का लाइसेंसी रिवाल्वर था। जांच में टेपरिंग की पुष्टि हुई थी।

    और ऐसे फेलहो गई पुलिस थ्यूरियां

    1. न केस में कोई चश्मदीद था और ही मर्डर का कोई कारण मिला।

    3. राजन के घर से एएसआई जगरूप सिंह ने रिवाल्वर जब्त किया और बिना सील किए एसएचओ को सौंप दिया था। राजन को रिवाल्वर बेचने वाले असलहा व्यापारी कोहली ने कोर्ट में गवाही दी कि-उसने सही रिवाल्वर बेचा था।

    2. बिल्ला की प|ी के नाम से पुलिस ने धारा 161 की स्टेटमेंट खुद लिखी थी।

    हाथापाई की, 3 गोलियां मारीं

    आगे क्या

    1. फैसले की कॉपी मिलने के बाद पुलिस सुप्रीम कोर्ट जा सकती है।

    2. ऐसे में नए सिरे से भी जांच शुरू हो सकती है कि बिल्ला को आखिर किसने और क्यों गोलियां मारीं।

    ...तो बिल्ला को गोलियां किसने मारीं

    हत्या के बाद मौके से भागा

    स्कूटर देखने वाला गवाह मुकर गया

    वारदात के दिन क्राइम सीन के पास एक दफ्तर में जॉब करने वाले राजन कश्यप ने मौके पर पुलिस को बयान दिया था कि - उसने गाड़ी के पास एक्टिवा देखी थी और एक हेलमेट पहने आदमी को देखा था। दफ्तर में पानी पिलाने लगा। थोड़ी देर बाद बाहर आया तो एक्टिवा गायब थी। पुलिस ने कश्यप से राजन से बरामद एक्टिवा की पहचान करवाई तो बोला कि यही एक्टिवा है। बाद में गवाही के दौरान वह मुकर गया और बोला कि उसने ऐसा कोई बयान नहीं दिया था। उसने तो ये कहा था आरोपी एक्टिवा पर आया था, बरामद एक्टिवा वह नहीं है। एडवोकेट ने दलील दी कि आधे शहर के पास सफेद रंग की एक्टिवा पर तो क्या सभी शक के दायरे में आंएगे। एडवोकेट ने कहा कि उनका क्लांइट पगड़ी बांधता है तो कोई पगड़ी पर कैसे हेलमेट पहन सकता है।

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