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पिता ओलंपिक में स्टैंडबॉय, बेटे ने 1980 ओलंपिक में जीता गोल्ड

1964 ओलंपिक टूर्नामेंट के लिए अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी राज कुमार को भारतीय टीम में स्टैंडबॉय रखे जाने के कारण वे...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 04:20 AM IST
1964 ओलंपिक टूर्नामेंट के लिए अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी राज कुमार को भारतीय टीम में स्टैंडबॉय रखे जाने के कारण वे प्लेइंग टीम का हिस्सा नहीं बने, लेकिन उन्होंने अपने दोनों बेटों को हॉकी के लिए तैयार किया और ओलंपियन बनवाया। बड़े बेटे चरणजीत कुमार ने 1980 ओलंपिक में भारत के लिए गोल्ड मेडल हासिल किया। जबकि छोटा बेटा गुनदीप कुमार 1988 साउथ कोरिया ओलंपिक टूर्नामेंट में भारतीय टीम का हिस्सा बना। ओलंपियन चरणजीत कुमार ने बताया कि ओलंपिक टूर्नामेंट में अमेरिकन ग्रुप के बायकॉट करने पर 6 टीमों ने हिस्सा लिया था। लेकिन भारत ने स्पेन को हराकर गोल्ड मेडल जीता था, जोकि एक अच्छी टीम थी। उन्होंने 1976 से 1984 तक भारतीय टीम की तरफ से हॉकी खेली। उसके बाद 1987 में हॉकी में एनआईएस फर्स्ट क्लास पास करने के बाद 1980 से 1991 में पंजाब टीम के कोच भी रहे।

1981 में पंजाब सरकार ने दिया महाराजा रणजीत सिंह अवॉर्ड

मैच देखने के लिए बंद हो जाती थी पूरी मार्केट

चरणजीत कुमार

हॉकी की शुरुआत

पिता राज कुमार और हॉकी में लगाव के चलते चरणजीत कुमार ने हॉकी की शुरुआत की। 1960 में जब पटियाला से जालंधर पुलिस लाइन में शिफ्ट हुए तो उनकी उम्र महज चार साल थी। पिता के साथ हॉकी ग्राउंड्स में जाने लगे, जिससे हॉकी में इंट्रेस्ट बनने लगा। 1967 में सरकारी सीनियर मॉडल स्कूल लाडोवाली रोड में एडमिशन ली और जूनियर टीम के कैप्टन बने। 10वीं में इंटर डिवीजन टूर्नामेंट खेले और 1972 में स्कूल की तरफ से टीम में सेटर फारवर्ड खिलाड़ी के रूप में इंटर डिस्ट्रिक टूर्नामेंट खेले।

ओलंपियन दविंदर सिंह गरचा से स्कूल से ही दोस्ती है: चरणजीत कुमार ने बताया कि पहले समय में लोगों में हॉकी का इतना क्रेज था कि जब स्कूल में सीनियर मॉडल स्कूल लाडोवाली रोड व दोआबा खालसा स्कूल लाडोवाली रोड के बीच मैच होता था तब पूरी मार्केट बंद हो जाती थी। लेकिन आज हॉकी की लोकप्रियता कम है। स्कूल से ही ओलंपियन दविंदर सिंह गरचा, सुरिंदर सिंह सोढी व गुरमेल सिंह के साथ दोस्ती है।

फैमिली


प|ी कामिनी कुमार, इंग्लैंड क्राउन कोर्ट में जॉब करती हैं।

छोटे भाई ने किया बड़े भाई को रिप्लेस : चरणजीत कुमार ने बताया कि 1985 में एशियन कप के लिए भारतीय टीम में उन्हें उनके छोटे भाई गुनदीप कुमार ने रिप्लेस किया। इससे पहले गुनदीप जूनियर इंडिया टीम के कप्तान थे। उन्हें इस बात की बेहद खुशी थी कि उन्हें टीम में उनका छोटा भाई ही रिप्लेस कर रहा है। गुनदीप कुमार भी 1988 साउथ कोरिया ओलंपिक टूर्नामेंट में भारतीय टीम का हिस्सा रहे।

जॉब

महज 20 साल की उम्र में 1977 में चरणजीत बीएसएफ में इंस्पेक्टर भर्ती हुए थे। 1980 ओलंपिक में गोल्ड मेडल के बाद 1981 में बीएसएफ से पंजाब पुलिस में डेपुटेशन पर इंस्पेक्टर शामिल हुए। 1987 में बीएसएफ ने डीएसपी प्रमोट किया लेकिन पंजाब पुलिस ने 1994 को दोबारा सीधा डीएसपी भर्ती किया। 2004 में एसपी बने और साल 2016 में एनआरआई विंग से एआईजी रिटायर्ड हुए।