मंडी बोर्ड वेस्ट सब्जियों से बनाएगा खाद मंजूरी के लिए प्रपोजल चंडीगढ़ भेजा गया

Jalandhar News - मकसूदां मंडी में गली सड़ी सब्जियों को खाद में तब्दील करवाने के लिए निगम की टीम ने मंडी का दौरा किया और मंडी...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:55 AM IST
Jalandhar News - mandi board will be made from west vegetables proposal was sent to chandigarh for approval
मकसूदां मंडी में गली सड़ी सब्जियों को खाद में तब्दील करवाने के लिए निगम की टीम ने मंडी का दौरा किया और मंडी अधिकारियों के साथ मीटिंग की। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की मंडी में लगाए गए वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट में गली-सड़ी सब्जियों से खाद तैयार की जा रही है। लेकिन मकसूदां मंडी में इन सब्जियों को ऐसे ही डंप पर फेंका जा रहा है और वे किसी काम नहीं आ रहीं। एेसे में गंदगी अलग से फैल रही है। नगर निगम के हेल्थ अफसर श्रीकृष्ण ने मंडी अधिकारियों के साथ शनिवार को मीटिंग करके गीले और सूखे कूड़े को अलग-अलग करने के बारे में जानकारी दी कि कैसे खाद तैयार की जाती है और कितना खर्च आता है।

बता दें कि एक साल से नगर निगम मंडी बोर्ड को वेस्ट मैनेजमेंट करने के लिए कह रहा था, लेकिन न मंडी बोर्ड गंभीर हुआ और न ही नगर निगम सख्त। दैनिक भास्कर की मंडी में गंदगी के आलम संबंधी गहराई से भरी रिपोर्ट के बाद दोनों विभाग सक्रिय हुए। डाॅ. श्रीकृष्ण ने बताया कि उन्होंने डीएमओ वरिंदर खेड़ा व सेक्रेटरी परमजीत सिंह चीमा के साथ मीटिंग की है और अपनी टीम को मंडी का दौरा करवाया। इस दौरान सेमी आटोमैटिक मशीन के जरिये गली-सड़ी सब्जियों को काटकर प्लास्टिक के क्रेटों में डाला जाता है। उसमें एंजाइम भी डाले जाते हैं। कुछ दिन थ्रेडर मशीन में रखने के बाद खाद तैयार हो जाती है।

निगम हेल्थ अफसर ने मंडी अधिकारियों को खाद तैयार करने की जानकारी दी

गाजियाबाद की मंडी में गली सड़ी सब्जियों को खाद बनाने के लिए मशीन में डालते हुए कर्मचारी।

निगम 50 किलो कूड़ा उठा सकता, टनों के हिसाब से निकलने वाला कूड़ा नहीं

डाॅ. श्रीकृष्ण ने बताया कि निगम केवल 50 किलो कूड़ा ही उठाता है लेकिन मंडी में हर रोज 10 टन से अधिक कूड़ा निकल रहा है। मंडी अधिकारियों को प्रोसेसिंग यूनिट के बारे में जानकारी दे दी गई है। इसके साथ ही पटेल चौक मंडी में भी सब्जी विक्रेताओं व प्रधान के साथ मीटिंग की है। डाॅ. श्रीकृष्ण ने बताया कि मंडी अधिकारियों को बताया कि किस तरह से प्रोसेसिंग यूनिट से कूड़े से खाद तैयार की जाती है। मंडी से निकलने वाला कूड़ा 5 दिन बाद खाद में तब्दील हो जाएगा और 5.50 रुपए सरकारी रेट पर किसानों व लोगों को बेचा जा सकता है। इससे मंडी बोर्ड मुनाफा कमा सकता है।

सेमी आटोमैटिक मशीन 6 लाख और पिट्स 6 हजार रुपए में हो जाता है तैयार

मंडी से निकलने वाले कूड़े को खाद बनाने के लिए सेमी आटोमैटिक मशीन अगर मंडी मार्केट कमेटी के अधिकारी लगाते हैं तो एक मशीन को लगाने के लिए 6 लाख रुपए तक का खर्च आएगा और शेड व अन्य सामान डालकर 4 लाख रुपए अलग से खर्च पड़ेगा। मंडी में दो सेमी आटोमैटिक मशीनों की जरूरत है यानि 20 लाख रुपए ही खर्च आना है। इससे 5 से 10 दिन में खाद तैयार हो जाएगी। दूसरी तरफ पिट्स इसके मुकाबले का काफी सस्ता साधन है। एक पिट पर 6 हजार रुपए का खर्च आएगा और मंडी में निकलने वाले टनों के हिसाब से कूड़े को खाद बनाने के लिए 150 पिट्स चाहिए यानी एक लाख रुपए में काम हो जाएगा।

मंडी बोर्ड को हर हाल में लगाना होगा अपना प्लांट...निगम अधिकारी श्रीकृष्ण ने बताया कि मंडी अधिकारियों के अलावा विधायक बावा हैनरी के साथ भी मीटिंग कर ली है। उन्होंने मंडी के कूड़े को लेकर सारा प्लान बता दिया है। मंडी से जितना कूड़ा निकल रहा है, उसे निगम किसी भी हालत में नहीं उठा सकता। इसके लिए मंडी अधिकारियों को अलग से प्लांट लगाना ही होगा। ये कूड़ा मंडी का है और मंडी के अंदर ही गिर रहा है। जल्द से जल्द इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी जानी चाहिए। सेक्रेटरी परमजीत सिंह चीमा ने कहा है कि वे इसकी प्रपोजल चंडीगढ़ जल्द ही भेजेंगे।

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