आरटीए में भ्रष्टाचार का नया तरीका

Jalandhar News - पेंडेंसी के कारण ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक की अपॉइंटमेंट 60 दिन के लिए बंद हाे चुकी है। दाे महीने तक अाम अादमी...

Nov 11, 2019, 08:01 AM IST
पेंडेंसी के कारण ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक की अपॉइंटमेंट 60 दिन के लिए बंद हाे चुकी है। दाे महीने तक अाम अादमी ड्राइविंग ट्रैक की अपॉइंटमेंट नहीं ले सकता जबकि एजेंटाें काे पैसे देकर लाइसेंस धड़ल्ले से बन रहे हैं। भास्कर इन्वेस्टिगेशन में पता चला कि ट्रैक की अपॉइंटमेंट में ही हर राेज एक लाख रुपए की रिश्वत का खेल है। रिश्वत का यह पैसा ऊपर तक जाता है। दफ्तर में रिश्वतखाेरी के बारे में प्रशासनिक अमले काे पूरी जानकारी है लेकिन काेई ध्यान देने काे राजी नहीं। डीसी तक अारटीए दफ्तर में फैली अव्यवस्था की अनदेखी करते हैं। सारे फसाद की जड़ वो 7 एजेंट हैं, जिन्हें सरकारी बाबुअों ने ही अाॅफिस में जगह दे रखी है। विधायक राजिंदर बेरी ने जिला शिकायत निवारण कमेटी में इनकी कंप्लेंट की मगर फिर भी बड़ी कारईवाई नहीं हुई।

पहले वर्किंग अाॅवर्स में सुबह टेस्टिंग ट्रैक का इस्तेमाल करने को वाहन नामक साॅफ्टवेयर से सुबह अपॉइंटमेंट मिलती थी, फिर ये समय रोजाना रात 12 बजे से कर दिया। अब अाम लोग रात जागकर अपॉइंटमेंट के लिए लागइन करने को मोबाइल फोन पर वन टाइम पासवर्ड का ही इंतजार करते रह जाते हैं जबकि 8-10 मिनट में सारे के सारे 120 स्लाट बुक होने का मैसेज अा जाता है। इसके बाद लोग एजेंटों के पास जाते हैं जो कि वीवीअाईपी कोटा दिलाने के नाम पर 1000 से 2000 रुपए तक ले रहे हैं। विधायक राजिंदर बेरी ने कहा कि अारटीए दफ्तर में एजेंट राज खत्म करने के लिए सरकार के सामने मामला रखेंगे। अवैध तौर पर कार्यरत रिश्वतखोर सिस्टम को खत्म करके ही अाम अादमी को राहत मिलेगी। जब पड़ोसी राज्यों में अासानी से लोगों को डीएल मिलता है तो जालंधर में क्यों नहीं मिले।

अपॉइंटमेंट दिलाने में ही महीने में 24 लाख तक की दलाली

दरअसल, आॅनलाइन सिस्टम में अर्जी के साथ स्कूटर-कार लाइसेंस पर 520 रुपए फीस जमा होती है। कायदे से ये अर्जी के साथ ही टेस्ट देने को अपाॅइंट नहीं दी जाती। ये अलग से मांगनी होती है। अारटीए अाॅफिस में 7 लोगों को सरकारी बबूअों को रखा है। ये अाफीस में बैठकर बाकी काम के साथ साथ सरकारी लागइन भी इस्तेमाल कर रहे हैं। सब एजेंट इनके पास लोगों की फाइलें लेकर पहुंचते हैं, प्रति फाइल 500 से 1000 रुपए लेकर प्राप्त करके प्रोसेस की जाती है। अब दिक्कत ये है कि अाम अादमी की बारी नहीं अा रही जबकि सिफारिशी तुरंत तारीख ले रहे हैं। महीने में 20 दिन में 2400 लोगों के टैस्ट होने होते हैं जबकि लोग अर्जियां 6000 लेकर अाते हैं। पहले ये अंतर नहीं था, किसी की एप्लीकेशन पेंडिंग नहीं होती थी, सबको साथो साथ टैस्ट की तारीख मिल रही थी।

डीएल के लिए रात 1:00 बजे खुलता है पोर्टल, सिर्फ दलाल आॅपरेट कर रहे

120 आवेदन का है नियम, दलाल वीआईपी के लिए 20 छोड़कर 100 के 100 बुक कर देते हैं

एेसे हाईजैक हो रहा सिस्टम

जब लोग अाॅनलाइन अपॉइंटमेंट मांगते हैं तो इसकी तारीख अारटीए के लागइन से फिक्स होती है। सरकारी अवकाश, इमरजेंसी अवकाश या फिर सिस्टम में मेंटेनेंस की दिक्कतों के कारण कई दिन बंद रखे जाते हैं। इसके अलावा प्रति दिन 120 अपॉइंटमेंट में से कुछ सिफारिशी लाेगाें के लिए रिजर्व होते हैं, जिन्हें अाम बोलचाल में वीवीअाईपी कोटा कहा जाता है। लागइन के एक्सपर्ट एजेंट अपाना सारा डाटा तैयार रखते हैं, जैसे ही रात 12 बजे पोर्टल खुलता है तो इसे अोके कर देते हैं। इससे अधिकतर अपॉइंटमेंट उन्हें मिलते हैं। बिलकुल उसी तरह जैसे रेलवे की टिकटें एजेंटों के पास अा जाती हैं। फिर जो लोग टेस्ट नहीं देने अाते, उन्हें खाली स्लाट को अपने ग्राहकों के लिए इस्तेमाल करते हैं। एजेंटों ने पूरा सिस्टम हाईजैक कर लिया है।

ऑफलाइन में बनते थे रोज 400 लाइसेंस

अारटीअाई एक्टिविस्ट संजय सहगल ने शिकायत भेजी है। साथ ही अारटीअाई से ये जानकारी भी मांगी है कि कितने लाइसेंस अब तक बने। वे कहते हैं अाॅफलाइन में रोज 400 डीएल बनते थे, अब 120 ही टेस्ट पास कर डीएल बनते हैं। फिर रात 1 बजे अपॉइंटमेंट अप्लाई करने के खेल से एजेंटों को शह मिली है। अाम लोगों की बारी नहीं अा रही, ये समय फिरसे सुबह 9 बजे से किया जाए।

कैमरा स्क्रीन पर दिखाता है सिर्फ लकीर, फेल होने वालों को एजेंट ही कराते हैं पास

अाॅनलाइन सिस्टम में एक और खेल होता है। जो कैमरा ट्रैक पर गाड़ी का संचालन देखकर फेल या पास करता है, उसमें ड्राइवर की वीडियो नहीं होती बल्कि राडार की तरह कंप्यूटर स्क्रीन पर लकीर अाती है। एेसे में हर हाल में टैस्ट पास कराने के लिए एजेंट खुद लोगों की गाड़ी चलाते हैं। जिसमें रिजल्ट पास हो जाता है।

अचानक छुट्टी घोषित होने पर जिनके टेस्ट नहीं होेते उन्हें दोबारा अप्लाई करना पड़ता है

डीएल टेस्ट के लिए पहले मिली डेट 12 सितंबर, फिर मिली 11 नवंबर और अब कब... पता नहीं है। सरकारी अवकाश होने पर जिनके टेस्ट की अपॉइंटमेंट पहले से तय होते हैं, उन्हें खुद ही परिवहन विभाग को अगली तारीख देनी चाहिए लेकिन एेसा नहीं होता। लोगों को या तो एजेंट के पास जाकर समय लेना पड़ता है या फिर दोबारा अप्लाई करते हैं।

दिक्कतों के बारे में अफसरों से पूरी जानकारी लूंगा : परिवहन सचिव

इस बारे में राज्य के परिवहन सचिव जीएस खैहरा ने कहा कि जालंधर में नए डीएल पर रोक लगने की जानकारी मुझे नहीं दी गई। जहां तक समय बदलकर रात को करने का सवाल है, ये सारे राज्य में फिक्स किया था। लोगों की दिक्कतों के बारे में अाॅफिसर्स के जानकारी लेकर दूर करेंगे।

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