रीजनल पासपोर्ट ऑफिस के बाहर न बेंच, न पेयजल सुविधा, न शौचालय

3 वर्ष पहले
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बस स्टैंड के पास नए बने रीजनल पासपोर्ट ऑफिस में पहुंचने वाले एप्लीकेंट्स को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। एप्लीकेंट के साथ आने वाले लोगों को अंदर जाना मना है। बाहर बैठने के लिए कोई इंतजाम नहीं है। न कुर्सियां हैं न बेंच। पासपोर्ट ऑफिस में कई बार काफी समय लगता है पर टॉयलेट की व्यवस्था न होने के कारण लोग यहां-वहां भटकते हैं। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे ऑफिस के पास बने फुटपाथ पर बैठकर इंतजार करते हैं।

दफ्तर के बाहर रिटायर्ड फौजियों को एप्लीकेंट्स की मदद के लिए बैठाया गया है। इन्हें भी कोई कमरा नहीं दिया गया। टेबल-कुर्सी पर ही सारा काम चल रहा है। पासपोर्ट बनवाने के लिए जालंधर सहित बाहर के जिलों से भी लोग पहुंचते हैं। बुजुर्गों और महिलाओं की सहायता के लिए एक सहयोगी होता है। पासपोर्ट ऑफिस के बाहर पानी, बेंच, शौचालय और शेड का इंतजाम नहीं है।

पासपोर्ट ऑफिस के बाहर दुकानोें के बाहर बैठे पासपोर्ट बनाने पहुंच रहे एप्लीकेंट्स के रिश्तेदार। -भास्कर

पासपोर्ट ऑफिस के बाहर फुटपाथ पर बैठे फौजियों से फार्म भरवाते हुए एप्लीकेंट। (दाएं) रीजनल पासपोर्ट ऑफिस। -भास्कर

सरकार की तरफ से नहीं दी जा रही कोई सुविधा...
बुधवार को रीजनल पासपोर्ट ऑफिस पहुंचे होशियारपुर के निर्मल सिंह, भुल्लथ से निर्मल कौर व फिल्लौर से मनजीत कौर ने बताया कि साथ आने सहयोगियों को सरकार की तरफ से कोई सुविधा नहीं दी जा रही। गर्मियों में समस्या और बढ़ेगी।

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