अब ट्रेडर, दुकानदार भी इंडस्ट्री रिकवरी कोर्ट में रख सकेंगे केस

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 08:05 AM IST

Jalandhar News - जिन व्यापारियों से माल खरीदकर ग्राहकों ने भुगतान के पैसे दबा रखे हैं, अब वे भी माइक्रो, स्माल, मीडियम इंटरप्राइजेज...

Jalandhar News - now the trader shopkeeper can be kept in the industry recovery court
जिन व्यापारियों से माल खरीदकर ग्राहकों ने भुगतान के पैसे दबा रखे हैं, अब वे भी माइक्रो, स्माल, मीडियम इंटरप्राइजेज फेसिलिएशन कौंसिल में केस रख सकेंगे। इस कौंसिल को अाम लोग रिकवरी कोर्ट के तौर पर पुकारते हैं। पहले केवल सामान के निर्माता ही यहां केस रख रहे थे जबकि अब विक्रेता भी अपने केसों की सुनवाई यहां कर सकेंगे। बशर्ते कि उन्होंने माइक्रो, स्माल, मीडियम कैटेगरी की इंडस्ट्री से सामान खरीदे हों। अाप रिटेलर, होलसेलर,शापकीपर, कोआपरेटिव सोसायटी या फिर कानूनी तौर पर मान्यता प्राप्त कोई भी बाडी अापरेट कर रहे हैं तो केस रख सकेंगे। अभी तक वह सिविल कोर्ट में जा रहे थे। जबकि उक्त कौंसिल में 90 दिन में केस निपटाने का नियम है। दूसरा फायदा यह है कि विपक्षीय पार्टी ने इसके फैसले को किसी दूसरी अदालत में दोबारा अपील डालनी है तो उसे कम से कम 75 परसेंट रकम पहले जमा करानी होगी, जितनी पर विवाद है।

मकसद : कारोबारियों को उनका वो पैसे वापस दिलाना, जो खरीददार किसी भी कारण दबा लेते हैं

माइक्रो, स्माल, मीडियम इंडस्ट्रीज के लिए फेसिलिएशन कौंसिल का गठन करने के अादेश नए एमएसएमई एक्ट के तहत दिए गए थे। इसका मकसद कारोबारियो को वो पैसे वापस दिलाना है जो अलग अलग खरीददार दबा लेते हैं। इससे पहले लोग सिविल कोर्ट जाते थे। इस रिकवरी कोर्ट में जो लोग केस लगाते हैं इनमें 3 फायदे हैं। पहला लाभ बगैर वकील के होने वाली सुनवाई की अाप्शन है। दूसरा लाभ 90 दिन में केस की सुनवाई है। तीसरा लाभ ये है कि सर्वसम्मति से भी फैसला हो सकता है। इसमें कारोबारियों की तरफ से प्रतिनिधि शामिल हैं। स्टेट लेवल की कोर्ट में कारोबारियों के प्रतिनिधि राजन गुप्ता ने कहा कि अाज उद्योग भवन में हुई मीटिंग में नियमों पर मंथन हुअा, जिसमें ये बात सामने अाई है कि कानूनी तौर पर सामान के विक्रेता भी उक्त फेसिलिएशन कौंसिल यानी रिकवरी कोर्ट में केस रखने के हकदार हैं। पहले समझा जा रहा था कि केवल निर्माता यानी फैक्ट्री वाले ही केस रख सकते हैं। जबकि नियम में लिखा है कि कोई भी कंपनी, कोअापरेटिव सोसायटी, ट्रस्ट या बाडी, जिसे कानूनी मान्यता प्राप्त है, उसे जो भी कहा जाता हो, उसे फेसिलिएशन कौंसिल की सेवाएं दी जाएंगी। बशर्ते कि उसने एमएसएमई कैटेगरी के कारखानों के बनाए गुड्स सेल किए हों। ये बड़ी राहत है। उधर, जालंधर में कौंसिल की स्थानीय डेस्क के पास पहले जो रिटेलर बगैर केस दर्ज कराए लौटे थे, अब वह भी यहां इंसाफ ही गुहार कर सकेंगे। जालंधर में 100 करोड़ रुपये के करीब की रिकवरी की रकम के केस सुनवाई के लिए पहुंत;े हैं, अब इनकी गिनती तेजी से बढ़ेगी।

केस के लिए जरूरी हिदायतें

केस दायर करने के लिए आपके पास ये सबूत जरूरी

केस करने के लिए सप्लाई किए सामान का बिल, बैंक ट्रांजेक्शन, ट्रांसपोर्ट की बिल्टी और रिसीविंग के डाक्यूमेंट्स में से कुछ न कुछ होना ही चाहिए। साथ में कागज पर अपनी बात और रिकवरी की रकम, कंपनी और बकाएदार का नाम-एड्रेस लिखना कर जिला इंडस्ट्री केंद्र में जिला प्रबंधक को देना होगा। आप अपना केस खुद भी लड़ सकते हैं वकील करना जरूरी नहीं है।

डीसी होंगे पैनल चेयरमैन...

इस पैनल का चेयरमैन डीसी होता है। बाकी मेंबर्स में जिला इंडस्ट्री मैनेजर, जिला लीड बैंक मैनेजर, एमएसएमई डिपार्टमेंट का अधिकारी, 1 इंडस्ट्री संचालक और 1 वकील शामिल हैं। जालंधर में इंडस्ट्री की तरफ से जालंधर चेंबर आफ इंडस्ट्री एंड कामर्स के वाइस प्रेसिडेंट शांत गुप्ता हैं।

90 दिन में आएगा फैसला, देरी होने पर पैनल जवाबदेह... हर केस का फैसला 90 दिन में होगा। देरी होने पर सुनवाई करने वाला पैनल जवाबदेह होगा। दोनों पक्षों का आपसी सहमति से भी समझौता हो सकता है। ऐसा होने पर केस वहीं समाप्त हो जाएगा।

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