जालंधर

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कम खर्च के चलते फीफा कम में भारत से ऑर्डर छीन ले गया पाकिस्तान

चौंकाने वाली बात...इंडस्ट्री 10 साल से कर रही रिसर्च एंड डेवेल्पमेंट सेंटर की मांग।

Dainik Bhaskar

Jun 14, 2018, 11:51 AM IST
अलकेशन कोहली, प्रेसिडेंट स्पो अलकेशन कोहली, प्रेसिडेंट स्पो

. चौंकाने वाली बात... इंडस्ट्री 10 साल से कर रही रिसर्च एंड डेवेल्पमेंट सेंटर की मांग।
. जालंधर में स्पोर्ट्स इंडस्ट्री - (A) यूनिट - 350 (B) टर्नओवर - 1000 करोड़ रु. सालाना, 50% घरेलू सप्लाई (C) केटेगरी - स्माल, माइक्रो एंड मिडियम इंडस्ट्रीज (D) इंप्लॉयमेंट बेस - फैक्ट्रियों के अलावा घरों में घरों में होने वाले जॉब वर्क। करीब 80 हजार लोगों को रोजगार।

जालंधर. फुटबाल में देश का रैंक चाहे 98 है पर जब वर्ल्ड कप होता है तो जालंधर के स्पोर्ट्स मार्केट में अलग ही रौनक होती थी, पर अब समय बदल गया है। फुटबाल वर्ल्ड कप तो शुरू है लेकिन मार्केट में खास हलचल नहीं है। जहां जालंधर ने 2006 में 100 करोड़ रुपये के फुटबाल व किट्स का कारोबार किया था, आज ये 20-25 करोड़ रुपये पर आ गिरा है। जबकि पाकिस्तान पिछले 3 फुटबाल वर्ल्ड कप में लगातार बिजनेस बढ़ा रहा है।


- मौजूदा फुटबाल वर्ल्ड कप में पाक ने मल्टी नेशनल कंपनियों को 10 मिलियन फुटबाल बेचे हैं। जबकि फीफा का ऑफिशियल फुटबाल भी पाक के शहर सियालकोट में बना है।

- पहले चीन ने जालंधर की इंडस्ट्री को चैलेंज दिया, अब पाक सस्ती लेबर से ऑर्डर छीन रहा है।

- स्पोर्ट्स इंडस्ट्री परेशान है कि टेक्नोलाजी अपग्रेडेशन न होने, हाई टैक्स स्लैब, रिसर्च एंड डेवेल्पमेंट सेंटर न होने से जो मेन्युफैक्चरिंग बेस लगातार कमजोर हो रहा है, इसे बचाना होगा।

पाक ने ग्लू से जोड़कर फुटबाल बनाने शुरू किए

- 2006 तक जालंधर से जो फुटबाल विदेश भेजे जाते थे, उनकी घरों में महिलाएं व पुरुष सिलाई करते थे। बाद में पाकिस्तान के सियालकोट से भी फुटबाल एक्सपोर्ट स्टार्ट हुआ।

- पाक में अब ग्लू से जोड़कर फुटबाल तैयार किए जा रहे हैं। दोनों देशों में से एक के फुटबाल वर्ल्ड कप के मेन मुकाबलों में इस्तेमाल होते हैं।

- प्रोमोशनल स्कीमों के लिए कंपनियां जो फुटबाल लोगों में बांटती हैं, उनकी सप्लाई जालंधर से 20-25 करोड़ जबकि पाकिस्तान ने ताजा फुटबाल इवेंट में ही करीब 200 करोड़ रुपये का कारोबार किया है।

10 साल से शुरू हुआ पाक को आर्डर मिलने का सिलसिला

- खेल उद्योग संघ के कनवीनर रविंदर धीर कहते हैं- फुटबाल के ऑर्डर पाकिस्तान शिफ्ट होने का सिलसिला 10 साल पहले शुरू हुआ था। तब पीयू शीट भारत से ही जाती थी।

- बाद में पाक ने खुद बनानी शुरू कर दी और नई टेक्नोलाजी चीन से भी खरीदी। हम डेढ दशक से रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर, जीरो वैट की डिमांड करते रहे हैं, उल्टे जीएसटी में 28 परसेंट तक टैक्स लगा दिया।

सरकार ने इंसेटिव से हाथ वापस खींचा

- अलकेशन कोहली, प्रेसिडेंट स्पोर्टेक्स ने हताया कि सिर्फ स्पोर्ट्स में पाक हमसे आगे है। वहां साल में 5000 करोड़ का कारोबार होता है।

- वे साल में भारतीय करेंसी के अनुसार 4000 करोड़ की एक्सपोर्ट कर देते हैं। भारत में 900 करोड़ की एक्सपोर्ट में 150 करोड़ का एक्सपोर्ट तरह-तरह की गेंद का होता है।

- गेंदों में 90 करोड़ की हिस्सेदारी फुटबाल की है। हमारी सरकार ने एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने वाले इंसेटिव खत्म कर दिए हैं।

- पाकिस्तान में सरकार ने स्पोर्ट्स इंडस्ट्री को खूब वित्तीय मदद दी है। उसके लिए अलग एयरपोर्ट बना दिया है, जिससे फुटबाल में हाईब्रिड टेक्नोलॉजी आई है।

- इस बार के फीफा वर्लड कप के लिए चिप लगे फुटबाल पाकिस्तान से तैयार किए हैं।

पाकिस्तान को बिजनेस मिलने की 4 वजह...

1. सस्ती लेबर। कम एक्सपोर्ट ड्यूटी। चार महीने में 10 मिलियन फुटबाल बनाने की कैपेसिटी।

2. एक्सपोर्ट कंपनियों को सरकार की वित्तीय सहायता। फुटबाल पीयू शीट से बनते हैं। चीन-भारत से ये शीट मंगाने में सरकार की मदद।

3. बेहतर क्वालिटी के लिए मशीनरी यूरोप से इंपोर्ट की गई। हाथ से फुटबाल सिलते थे, अब इसके कंपोनेंट गोंद से जोड़े जाने लगे।

4. सरकार ने सियालकोट को स्पोर्ट्स गुड्स की हब के तौर पर प्रचारित किया। नए कारखाने लगे।

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