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आर्थिक और राजनीतिक मोर्चे पर घिरी सरकार, कैबिनेट मीटिंग और लंच डिप्लोमेसी में होगी कई मुद्दों पर चर्चा

8 महीने पहले
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पंजाब कैबिनेट की मीटिंग में शामिल सीएम और उनके मंत्री। फाइल फोटो
  • विदेश दौरे से लौटे मुख्यमंत्री के समक्ष 20 दिनों में राजनीतिक से लेकर आर्थिक मोर्चों पर खासा कुछ बदल चुका
  • राज्य सरकार को जीएसटी के 4100 करोड़ रुपए केंद्र सरकार को देने, शराब पर एक्साइज ड्यूटी भी घटी

चंडीगढ़/जालंधर. चंडीगढ़ में सोमवार को पंजाब कैबिनेट की बैठक हो रही है। इस बैठक में आर्थिक और राजनीतिक मामले पर चर्चा होगी। बैठक के बाद मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह लंच डिप्‍लोमेसी भी करेंगे। करीब पौने तीन साल में पहली ऐसी कैबिनेट बैठक होगी, जिसके बाद दोपहर के भोजन का भी इंतजाम किया गया है। आज की मीटिंग में एक दर्जन से ज्यादा एजेंडे हैैं। सबकी निगाहें इस पर लगी हुई हैैं कि आर्थिक संकट पर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का क्या रुख रहेगा।


विदेश दौरे से लौटे मुख्यमंत्री के समक्ष 20 दिनों में राजनीतिक से लेकर आर्थिक मोर्चों पर खासा कुछ बदल चुका है। दरअसल, विपक्ष सरकार को आर्थिक मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है कि भले ही केंद्र सरकार को जीएसटी का 4100 करोड़ रुपए राज्य सरकार को देना है, लेकिन सरकार के अपने राजस्व में भी भारी गिरावट आई है। महत्वपूर्ण यह है कि शराब पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में भी गिरावट देखने को मिल रही है। इसके लिए विपक्ष सीधे राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहा है। आशंका जताई जा रही है कि आर्थिक संकट के कारण सरकारी मुलाजिमों को इस माह वेतन देने में भी मशक्कत करनी पड़ सकती है। वित्तमंत्री मनप्रीत बादल बेशक कह चुके हैं कि वेतन समय पर मिलेगा, लेकिन यह देखना होगा कि मुख्यमंत्री आर्थिक मोर्चे को संभालने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

एक मसला यह भी है बड़ा गंभीर
मुख्यमंत्री के गृह जिले पटियाला में चार कांग्रेस विधायक लगातार सरकारी कामकाज पर उंगली उठा रहे हैं। इस सबके बावजूद अभी तक मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस 'बगावत' को कोई खास तवज्जो नहीं दी है। सरकार ने विधायकों की नाराजगी को दूर करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर जरूर कील-कांटे कसे हों लेकिन कैप्टन ने मोर्चा खोलने वाले विधायकों को शांत करने के लिए सीधे रूप से कमान अपने हाथ में नहीं ली है।

क्या कहते हैं नाराज विधायक?
मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव कैप्टन संदीप संधू ने जरूर विधायकों को बुलाकर उनकी नाराजगी दूर करने के प्रयास किए हों, लेकिन नाराज विधायकों ने उनके साथ बैठक करने से इन्‍कार कर दिया। इससे लगता है कि मामला बिना मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के निपटने वाला नहीं है। शुतराणा के विधायक निर्मल सिंह कहते हैं कि हमारी नाराजगी कोई व्यक्तिगत नहीं है। हमने अफसरशाही पर उंगली उठाई है। मुख्यमंत्री की तरफ से अभी तक कोई संदेश नहीं आया है। जब बुलाएंगे तो उनके सामने वास्तविक स्थिति रखी जाएगी।





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