पंजाब / एक देश एक भाषा के समर्थन में सिंगर केएस मक्खन ने सिखी स्वरूप छोड़ा, बोले-नहीं चाहता धार्मिक विवाद

जालंधर में गुरुद्वारे में सिख पंथ छोड़ने से पहले अपनी बात रखते गायक केएस मक्खन। जालंधर में गुरुद्वारे में सिख पंथ छोड़ने से पहले अपनी बात रखते गायक केएस मक्खन।
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जालंधर में गुरुद्वारे में सिख पंथ छोड़ने से पहले अपनी बात रखते गायक केएस मक्खन।जालंधर में गुरुद्वारे में सिख पंथ छोड़ने से पहले अपनी बात रखते गायक केएस मक्खन।

  • हिंदी दिवस पर गृह मंत्री अमित शाह ने दिया था एक देश एक भाषा का बयान
  • कनाडा में गुरदास मान ने पक्ष में बात कही तो विरोध के बीच केएस मक्खन आए समर्थन में
  • गुरुद्वारे जाकर सिखी की निशानियां गुरु चरणों में अर्पित कर बोले-मैं नुकसान के हम में नहीं

दैनिक भास्कर

Oct 02, 2019, 03:10 PM IST

जालंधर. एक देश एक भाषा की बात को लेकर उपजा विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा। ऐसे में एक पंजाबी सिंगर केएस मक्खन ने अपने आप को धार्मिक मान्यताओं से मुक्त करना वाजिब समझा। वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव लड़ चुके गायक मक्खन हाल में देश के गृह मंत्री अमित शाह के एक देश एक भाषा संबंधी दिए गए बयान को लेकर उस वक्त विवाद में आ गए, जब वह पंजाबियत की शान कहे जाने वाले सिंगर गुरदास मान की बात का समर्थन कर बैठे। फेसबुक पर लाइव होकर मक्खन ने कहा कि कुछ लोग उनके नाम के साथ धार्मिक विवाद जोड़ रहे हैं, लेकिन वह कोई विवाद नहीं चाहते।

 

यह है पूरा मामला

हिंदी दिवस पर गृह मंत्री अमित शाह ने एक कहा था, 'जरूरत है कि देश की एक भाषा हो, जिसके कारण विदेशी भाषाओं को जगह न मिले। इसी को याद रखते हुए हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने राजभाषा की कल्पना की थी और इसके लिए हिंदी को स्वीकार किया। हिंदी दिवस के दिन हमें आत्म निरीक्षण करना चाहिए। दुनिया में कई देश हैं जिनकी भाषाएं लुप्त हो गईं। जो देश अपनी भाषा छोड़ता है उसका अस्तित्व भी छूट जाता है। जो देश अपनी भाषा नहीं बचा सकता वो अपनी संस्कृति भी संरक्षित नहीं रख सकता। मैं मानता हूं कि हिंदी को बल देना, प्रचारित करना, प्रसारित करना, संशोधित करना, उसके व्याकरण का शुद्धिकरण करना, इसके साहित्य को नए युग में ले जाना चाहे वो गद्य हो या पद्य हमारा दायित्व है।'

 

इसके बाद पिछले सप्ताह कनाडा में बीसी के एब्सफोर्ड में शो करने गए पंजाबी गायक गुरदास मान एक इंटरव्यू में 'एक राष्ट्र एक भाषा' का समर्थन कर विवादों में घिर गए। पंजाब से लेकर कनाडा तक हायतौबा मच गई है। गुरदास मान ने वैंकुवर के एक नामवर रेडियो रेड एफ को दिए वीडियो इंटरव्यू में कहा, ‘पूरे देश में एक ही भाषा होनी चाहिए, जिसे सभी समझ सकें। जहां पंजाबी हमारी मातृ भाषा है, वहीं हिंदी भी हमारी मौसी है, इसलिए उसका भी उतना ही सम्मान होना चाहिए। लोग हिंदी फिल्में देखते हैं, गाने सुनते हैं। अगर हिंदी बोलनी, लिखनी भी सीख लेंगे तो इसमें क्या हर्ज है। एक देश की एक जुबान तो होनी ही चाहिए।’ हर तरफ जहां गुरदास मान का विरोध हो रहा था, वहीं पंजाबी सिंगर केएस मक्खन सीधे तौर पर उनके समर्थन में आए थे।

 

गुरुद्वारे जाकर बोले-मैं नुकसान के भी हक में नहीं

मंगलवार को अपने फेसबुक पेज पर लाइव होकर मक्खन ने सिख पंथ की निशानियां गुरुद्वारे जाकर गुरु चरणों में समर्पित कर दिए। उनका कहना था कि अगर मैं सिखी से किसी का फायदा नहीं कर सकता तो मैं नुकसान के भी हक में नहीं हूं। कुछ लोग मेरे नाम के साथ धार्मिक विवाद जोड़ रहे हैं। मेरा नाम लेकर धर्म के नाम पर राजनीति हो रही है। मैं नहीं चाहता कि उनकी वजह से कोई धार्मिक विवाद शुरू हो, इसीलिए वह अपना सिख धर्म छोड़ रहा हूं।

 

2006 में ड्रग्स रैकेट चलाने के आरोप में गए थे जेल

गायक मक्खन नशा तस्करी के एक मामले में जेल भी जा चुके हैं। जालंधर के नकोदर थाने में 1 अगस्त, 2006 को मक्खन के खिलाफ तस्करी का केस दर्ज हुआ था। उन पर कनाडा में ड्रग्स रैकेट चलाने का आरोप है। इस मामले में मक्खन को जेल भी जाना पड़ा था। पंजाब में ड्रग नेटवर्क, ब्लैकमनी की कहानी पर बनी फिल्म "जुगनी हत्थ किसे न आउणी" में हीरो की भूमिका भी मक्खन ने निभाई थी।

 

चौथे नंबर पर रहे थे चुनाव में

गायक केएस मक्खन 9 फरवरी, 2014 को बहुजन समाज पार्टी में शामिल हुए थे। फिर उन्होंने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में आनंदपुर साहिब सीट से चुनाव लड़ा था। मक्खन 69124 वोट लेकर चौथे स्थान पर रहे थे।

 

 

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