धीणा में सड़कंे टूटीं और सीवरेज जाम, लोग बोले-गांव का 4 साल से नहीं हुआ विकास

3 वर्ष पहले
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केंद्र सरकार की आदर्श ग्राम योजना के तहत हरेक एमपी को एक-एक गांव अडॉप्ट करके उसे मॉडल गांव बनाना था। इसी के तहत राज्यसभा मेंबर नरेश गुजराल ने 2014 में गांव धीना अडॉप्ट किया। लेकिन आज भी यहां के वासी विकास कार्यों को तरस रहे हैं। लोग नालियों में ओवरफ्लो हो रहे सीवरेज की गंदगी के कारण परेशान हैं। निगम के अधीन आने के बाद तो यहां हालात और भी बुरे हो गए हैं। लोग 100-100 रुपए इकट्ठे करके गांव की नालियां साफ करवा रहे हैं।

गांववासियों ने बताया कि 4 साल से कोई विकास कार्य नहीं हुआ। एमपी लैड फंड से गांव में कूड़ा इकट्ठा करने के लिए टैंपो भी मिला था लेकिन कर्मचारी और डीजल के लिए पैसा न होने के कारण गाड़ी पूर्व सरपंच के घर में खड़ी है। गांव के पूर्व सरपंच रह चुके बलवंत राय ने कहा कि एमपी लैड और आदर्श ग्राम योजना के तहत गांव में विकास कार्य किए गए हैं। इसके अलावा कुछ पैसा एक्सईएन पंचायती राज ने भी गांव में खर्च किया है। सरपंच का दावा है कि 45 लाख की लागत से गांव में कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए। भास्कर रिपोर्ट ने जब गांव धीना का दौरा किया तो टूटी सड़कों और नालियों में गंदगी के अलावा कुछ नहीं मिला।

सौ-सौ रुपए इकट्‌ठे कर गांववासी नालियों की सफाई करवा रहे
गांव के बाहर लगा कूड़े का ढेर। नालियों में जमा गंदगी और कच्ची सड़कों की बुरी हालत। -भास्कर

2 साल पहले सीवरेज पाइप डाली, कनेक्ट करने के लिए फंड नहीं आया
8 कॉलोनियों समेत कुल 12,500 आबादी वाले गांव धीना के लोगों की सबसे बड़ी समस्या सीवरेज की है। बिना बारिश लोगों के घरों में आए दिन सीवरेज का पानी आ रहा है, जिसे बोरे लगाकर रोक रखा है। लोगों ने बताया कि कुछ साल पहले गांव में सीवरेज पाइप डाली गई थी मगर उसके बाद किसी को नहीं पता सीवरेज चालू क्यों नहीं हो सका। पूर्व सरपंच का कहना है कि गांव में निकासी नहीं होने के कारण सीवरेज पाइप को रेलवे ट्रैक के नीचे से डाला गया था। सारे गांव में सीवरेज डालने के बाद सीवरेज को फंड न होने के चलते कनेक्ट नहीं किया गया। एमएलए परगट सिंह से कई बार कहा कि इस काम को पूरा कराया जाए मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही।

सरपंच ने कहा- प्ले ग्राउंड, पंचायत घर और कम्युनिटी हाल पर पैसा खर्च किया
आदर्श ग्राम पंचायत के तहत गांव धीना में जितने भी विकास कार्य शुरू किए गए, वे सिरे नहीं चढ़ सके। गांव के पूर्व सरपंच ने कहा कि जब धीना गांव निगम के अधीन आया तो सारे विकास कार्य जहां थे, वहीं रुक गए। डॉ. बीआर अंबेडकर स्पोर्ट्स क्लब के प्रेसिडेंट दीपक ने बताया कि गांव की प्ले ग्राउंड के लिए 6 लाख अलॉट हुए थे, जिसमें से ग्राउंड में 4800 वाट की लाइटें और एक कमरा बना कर दिया गया। प्ले ग्राउंड में लगी लाइट पास के आश्रम से कुंडी डालकर जलानी पड़ती है। पंचायत ने जो कमरा बनाया, वह आधा है। इसके अलावा पंचायत घर और कम्युनिटी हॉल का कार्य भी बीच में अटका हुआ है।

कोई डिस्पेंसरी नहीं...धीणा में न पक्की सड़कें, न पक्के घर, न गार्बेज डिस्पोज करने के लिए कोई प्लांट और न ही डिस्पेंसरी के लिए कोई जगह अलॉट की गई। लोगों का कहना है सरकारी डिस्पेंसरी नहीं है। लोगों को परेशानी होती है। पूर्व सरपंच बलवंत राय ने बताया कि गांव में बने सेवा केंद्र की जगह डिस्पेंसरी को अलॉट कर दी गई है।

स्ट्रीट लाइटें नहीं चलतीं लोगों ने बताया कि आदर्श ग्राम योजना में जो स्ट्रीट लाइटें गांव में लगी हैं, वे आधी से ज्यादा खराब हैं। हालांकि कुछ सोलर लाइटें लोगों ने घरों के बाहर प्राइवेट बिजली के मीटर से लगा रखी हैं। लोगों ने बताया कि गांव के सरपंच ने अपने चहेतों के घरों के बाहर लाइटें लगवाई हैं।

नर्क भरी जिंदगी जी रहे
रमेश लाल, मुख्तयार, ऊषा, जोगिंदर सिंह, गीता, सुनीता ने बताया कि अकाली सरकार के समय लाखों की ग्रांटें गांव के विकास के लिए आई थीं। मगर किसी को कुछ नहीं पता सारा पैसा कहां गया। लोगों का कहना है हमें बस सीवरेज की समस्या से छुटकारा चाहिए।

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