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भीड़ ज्यादा होने के कारण गेटमैन बंद नहीं कर पाया था फाटक, लोगों ने घेरा तो डरकर बोला था- ट्रेन आने की सूचना नहीं आई

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:56 AM IST

Jalandhar News - मानांवाला से होशियारपुर की तरफ जा रही ट्रेन वीरवार को सिग्नल न मिलने से जिंदा फाटक से पहले ही रोक दी गई। इसका कारण...

Jalandhar News - the gateman was unable to stop because of the overcrowded gate people scared of the hoop had not heard of the arrival of the train
मानांवाला से होशियारपुर की तरफ जा रही ट्रेन वीरवार को सिग्नल न मिलने से जिंदा फाटक से पहले ही रोक दी गई। इसका कारण गेटमैन द्वारा फाटक बंद न करना था। इस केस की इंक्वायरी की गई तो न गेटमैन की गलती निकली और न ही सुच्ची पिंड के स्टेशन मास्टर की। करतारपुर रेलवे स्टेशन के सुपरिंटेंडेंट अशोक ने बताया कि दरअसल गर्मी ज्यादा है और लोगों का ध्यान रखते हुए फाटक ज्यादा देर पहले बंद नहीं किया जा रहा। जब ट्रेन आने वाली थी तो गेटमैन ने फाटक बंद करने की कोशिश की लेकिन फाटक पर भीड़ ज्यादा होने के कारण फाटक बंद नहीं हो पाया। इतने में ट्रेन आ गई और करीब 400 मीटर पहले खड़ी हो गई।

ट्रेन आती देख राहगीर घबरा गए और उन्होंने गेटमैन को घेर लिया। गुस्साई भीड़ देखकर गेटमैन भी घबरा गया और उसने कह दिया कि उसे ट्रेन आने की सूचना ही नहीं मिली। उन्होंने कहा कि अब सिस्टम अपग्रेड हो चुके हैं और इंटरलाॅकिंग सिस्टम के चलते अगर ट्रेन को सिग्नल नहीं मिलता है तो वह फाटक से पहले रोक दी जाती है।

एसएस अशोक ने बताया कि गेटमैन और सुच्ची पिंड के स्टेशन मास्टर दोनों अपनी जगह ठीक हैं। उन्होंने बताया कि ट्रेन के गार्ड को सिग्नल न मिलने के कारण उसने ट्रेन रुकवा दी थी। उन्होंने बताया कि अब जितने भी फाटक हैं, सभी सिग्नल कंट्रोल वाले हैं। सूरानुस्सी से जिंदा फाटक की दूरी 800 मीटर के करीब है। स्टेशन से निकलते वक्त दो सिग्नल होते हैं, जिसमें एक सिग्नल गेट को कंट्रोल करता है। इसमें एक परमिशन देने के लिए होता है और एक गेट का अपना सिग्नल रेड होता है। गार्ड को सिग्नल न मिलने से ही गाड़ी को पहले रोक दिया गया।

अशोक ने बताया कि रेलवे के नियमानुसार गेट को आधा घंटा पहला बंद करना होता है। लेकिन पब्लिक को ध्यान में रखते हुए ऐसा नहीं किया जा रहा है। अगर फाटक ज्यादा देर बंद कर दिया जाए तो पब्लिक लड़ने लगती है। इस सेक्शन पर जितने भी फाटक हैं, वहां इंटरलॉक सिग्नल हैं। इंटरलॉक सिस्टम इसीलिए लगाए गए हैं ताकि गाड़ी को सिग्नल न मिले तो फाटक से पहले ही रोक दी जाए। सिग्नल गेट बंद होने के बाद ही होता है। इसलिए किसी बात का कोई खतरा नहीं है।

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