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शिक्षा / लाइब्रेरी में अलग-अलग राइटर्स की बुक पढ़नी शुरू कीं और बनी गोल्ड मेडलिस्ट

Dainik Bhaskar

Sep 12, 2018, 02:41 AM IST


The success story of Gold Medalest
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The success story of Gold Medalest

जालंधर
बीकॉम में मेरी यूनिवर्सिटी में थर्ड पोजीशन थी। तब मुझे लगता था कि मुझे अपने टाइम- टेबल व पढ़ने के क्राइटेरिया में कुछ बदलाव लाना चाहिए ताकि मैं और बेहतरीन पोजीशन हासिल कर सकूं। तब प्रो. अशोक कपूर ने मुझे सलाह दी कि अगर टॉप करना है तो अपनी रेगुलर बुक्स के अलावा लाइब्रेरी में जाकर अलग-अलग राइटर्स की किताबों को पढ़ना चाहिए। इससे हमें एग्जाम में लिखने के लिए प्वाइंट्स मिलते हैं और हम अपने उत्तर को बेहतरीन तरीके से प्रेजेंट कर सकते हैं। ये कहना है - एमकॉम में 82 परसेंट अंक हासिल कर यूनिवर्सिटी में गोल्ड मेडलिस्ट रही डीएवी कॉलेज स्टूडेंट नैना का। 
वह इसी साल एमकॉम कंपलीट कर कॉलेज में ही बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त हुईं। उसने बताया कि वह आगे पीएचडी करना चाहती है। बीकॉम में 80 फीसदी अंक थे। शिव ज्योति स्कूल से बारहवीं की और 96.2 फीसदी अंक लेकर जिले में तीसरे स्थान पर रही थी।

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