एक्सपोर्टर्स को मिलने वाली वित्तीय सहायता पर अमेरिका का ऐतराज, नई स्कीम आएगी, सर्वे शुरू

Jalandhar News - एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट फ्रॉम इंडिया स्कीम की जगह केंद्र सरकार नई स्कीम लागू...

Nov 10, 2019, 08:06 AM IST
एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट फ्रॉम इंडिया स्कीम की जगह केंद्र सरकार नई स्कीम लागू करेगी। सरकार नया फार्मेट अमेरिका के ऐतराज के बाद बना रही है। जालंधर में नई स्कीम लाने से पहले फीडबैक सर्वे स्टार्ट हो गया है। इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रोमोशन कौंसिल के फोकल पॉइंट एक्सटेंशन स्थित अॉफिस ने सभी मेंबर कंपनियों सरकार के सर्वे की जानकारी दी है। इस सर्वे के फार्म भरने को लेकर कारोबारी गाइडेंस यहीं से ले रहे हैं। एथेंटिक जानकारी जुटाने के लिए फार्म पर लिखा गया है कि जो जानकारी यहां दी जा रही है, उसके दस्तावेज उपलब्ध हों। इन्हें अधिकारी चेक करेंगे।

15 से पहले भरकर देने हैं फार्म, जालंधर में 325 से अधिक कंपनियां ईईपीसी की मेंबर

दरअसल, जालंधर में 325 से अधिक इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट कंपनियां हैं, जिनकी सेवा ईईपीसी कर रही है। मगर बाकी जिम्मेदारी बाकी प्रोडक्ट्स की काउंसिलों की है। लेदर, फुटवियर एक्सपोर्ट व बाकी सामान विदेश भेजने वाली कंपनियों के लिए भी सर्वे चल रहा है। ये सर्वे 15 नवंबर तक पूरा होगा। सरकार इस सर्वे के लिए पूरे भारत से डाटा मंगवा रही है कि हमारी कंपनियों को कैसी मदद चाहिए। सरकार आर्थिक मदद के लिए फंड्स प्रबंधन की जरूरतों का भी स्टीक अंदाजा लगा सकेगी। ईईपीसी के रीजनल डायरेक्टर ओपिंदर सिंह कहते हैं कि हमने सर्वे की जानकारी सभी मेंबर्स को जालंधर में प्रदान की है। उधर, एक्सपोर्ट कंपनियों के मालिक भी आज सारा दिन सर्वे फार्म भरने के काम में लगे रहे। फाइनल सर्वे में पता चलेगा कि आखिर कितनी रकम जालंधर की कंपनियों को मिलती रही है। ईईपीसी के हैंडटूल पैनल के चेयरमैन अजय गोस्वामी कहते हैं - इंटरनेशनल लेवल पर कंपीटिशन बेहद तेज हो चुका है। हमारी कंपनियां बगैर सरकार की तकनीकी अौर वित्तीय मदद से आगे नहीं बढ़ सकती हैं। हमें सरकार की स्कीम का इंतजार है।

सरकार कैसे देती है मदद?

एक्सपोर्ट कंपनियों को टैक्स रिफंड कर दिया जाता है। यानी जो पैसा लोग टैक्स में देते हैं, वह सरकार एक्सपोर्ट की गई वस्तु के आधार पर वापस कर देती है। दूसरी मदद इंटरनेशनल एग्जीबिशन में हिस्सा लेने के खर्च की मदद अौर टैक्स छूटों में देती है। अब नई स्कीम विश्व व्यापार संगठनों के नियमों के मद्देनजर शुरू होगी।

अमेरिका का प्रेशर क्यों?

विश्व व्यापार संगठन में सभी मेंबर्स की तरफ से दी जाने वाली सब्सिडी संबंधी नियम बने हैं। सेहतमंद कंपीटिशन की सोच के आधार पर ये नियम बनाए थे। चीन के साथ व्यापारिक युद्ध में फंसे अमेरिका ने भारत की स्कीम पर भी ऐतराज जताया था।

क्यों नए विकल्प तलाश रही सरकार?

अमेरिका ने विश्व व्यापार संगठन में मामला रखा था कि भारत अरबों रुपए की सहायता अपनी कंपनियों को देता है, जिससे उसकी कंपनियों का नुकसान हो रहा है। भारत की स्कीमों को विश्व व्यापार संगठन के नियमों के खिलाफ बताया था। आरोप है कि भारत ने 2015 के मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट फ्रॉम इंडिया स्कीम शुरू की थी, जिसमें 8,000 से ज्यादा समानों को शामिल किया गया है। इनकी संख्या इसके शुरू होने के समय आधी थी। इसी तरह साल 2000 से 2017 के बीच स्पेशल इकोनॉमिक जोन से होने वाला एक्सपोर्ट 6,000 पर्सेंट बढ़ गया है। साल 2016 में भारत से होने वाला 30 पर्सेंट एक्सपोर्ट स्पेशल इकोनॉमिक जोन्स से हो रहा है जिसकी कीमत लगभग 82 अरब डॉलर है। इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर टेक्नोलॉजी स्कीम जैसे सेक्टर में स्पेसिफिक स्कीम्स के कारण साल 2000 से 2016 के बीच एक्सपोर्ट में 160 पर्सेंट का इजाफा हुआ है।

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