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सीबीएसई के स्कूलों में बनेंगी जल प्रबंधन समितियां

9 महीने पहले
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  • जल ही जीवन है समितियों में स्कूल प्रशासन, शिक्षक, छात्र व उनके अभिभावक और आम लोग होंगे शामिल
  • स्कूलों में पानी बचाने के विशेष प्रयास किए जाएंगे
  • पानी की बर्बादी रोकने का प्रयास सीबीएसई ने पानी बचाने के लिए कसी कमर
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नंवाशहर. सीबीएसई से संबंधित स्कूलों में पानी बचाने के लिए विशेष उपाय किए जाएंगे। इसे लेकर बोर्ड की ओर से सभी स्कूलों को निर्देश जारी किए गए हैं। सभी स्कूलों में पानी के बेहतर प्रबंधन को अब आवश्यक बनाया गया है। पानी का बेहतर इस्तेमाल करने वाले स्कूलों की यह भी जिम्मेदारी होगी कि वे स्कूल जल प्रबंधन समिति का गठन करें।

गठित समिति में स्कूल प्रशासन, शिक्षक, छात्र, गैर शैक्षणिक स्टाफ, अभिभावक और आम लोगों को शामिल किया जाएगा। ये समिति स्कूलों में पानी के बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने, उसकी समीक्षा और पानी की बर्बादी की निगरानी कर उसे रोकने के काम को सुनिश्चित करेगी। बोर्ड ने छात्रों, शिक्षकों के बीच जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए पाठ्यक्रमों में पानी से संबंधित पाठों को बढ़ाए जाने का भी सुझाव दिया है। जल साक्षरता बढ़ाने के लिए समय-समय पर शैक्षिक कार्यशालाएं आयोजित करने का भी निर्देश दिया है। सीबीएसई का जल संरक्षण में स्कूलों को सक्षम बनाने का उद्देश्य यह है कि इससे न केवल स्कूल के बुनियादी ढांचे में बदलाव आएगा, बल्कि स्कूल चलाने वाले और पढ़ने वालों में जल संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित होगी।
 

स्वचलित और सेंसर युक्त टैप लगाने के निर्देश 
सीबीएसई ने स्कूलों से कहा है कि वे अपने यहां के पुराने उपकरणों और मशीनों में बदलाव लाएं, ताकि पानी की बचत ज्यादा से ज्यादा की जा सके। स्वचालित और सेंसर युक्त टैप और दोहरे फ्लश वाले टैंक लगाएं जाएं। यह भी नियमित तौर पर सुनिश्चित किया जाए कि जो भी उपकरण लगाए जाएं, उनमें लीकेज की समस्या न हो और न ही किसी प्रकार की टूट-फूट हो।
 

2020 तक भू-जल स्तर में गिरावट आने की चिंता 
हर दिन स्कूलों में पानी का बहुत ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इनमें पीने के लिए, वॉशरूम, कैंटीन, लेबोरेटरी, मैदान, लॉन और गार्डन शामिल है। जल संरक्षण की मदद से स्कूलों की प्रदूषण से निपटने के प्रति जवाबदेही बढ़ाई जाएगी। सीबीएसई ने यह प्रयास उस समय किया है, जब देश के कई शहरों में 2020 तक भूजल स्तर में भारी गिरावट आने को लेकर चिंता जताई जा रही है।

वाटर ऑडिट होगा 
स्कूलों को नियमित तौर पर नए मापदंडों के मुताबिक वाटर ऑडिट करानी होगी, ताकि वे अपने यहां जल संरक्षण के उपायों का सख्ती से पालन कर सकें। इसमें स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं से लेकर स्कूल में मौजूद हरे-भरे क्षेत्रों में सिंचाई के तौर-तरीकों की जांच की जाएगी।

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