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कुड़ी मार रैकेट / हम टीम मांगते रहे, सिविल सर्जन डॉ. जसप्रीत कहती रहीं पहले अस्पताल का नाम बताओ



We were asking for the team, the civil surgeon Dr. Jaspreet, called the fir
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We were asking for the team, the civil surgeon Dr. Jaspreet, called the fir
  • भोगपुर में लिंग जांच मामले में अंबाला टीम का खुलासा
  • -कहा, जिस वक्त जांच के लिए टीम भेजनी थी, उस वक्त सिविल सर्जन रिटन ऑर्डर मांगती रहीं

Dainik Bhaskar

Sep 16, 2018, 12:16 AM IST

जालंधर. भोगपुर स्थित बाघा अस्पताल में अंबाला से आई टीम ने कई खुलासे किए हैं। टीम का कहना है कि जब लिंग जांच करने वाले गायनिकॉलोजिस्ट डॉ. एचएस कंग को जब पकड़ने के लिए एक्शन लेना था, उस वक्त हमारी सिविल सर्जन डॉ. जसप्रीत कौर उनकी टीम से रिटन ऑर्डर मांग रही थीं।

 

टीम जब उनसे तुरंत भोगपुर पहुंचे को कह रही थीं, उस समय सिविल सर्जन उनसे अस्पताल का नाम पूछने में दिलचस्पी दिखा रही थीं। अंबाला सिविल सर्जन ने एडीसी को जो रिपोर्ट भेजी है, उनमें कई एेसी बातें हैं, जो सीधे जालंधर सिविल सर्जन और यहां के स्टाफ की ओर इशारा करती हैं कि उन्होंने अंबाला की टीम को जॉइन करने की बजाय उन्हें ढाई घंटे इंतजार करवाया। यह वह समय था, जब आरोपी डॉक्टर लिंग जांच करने के बाद स्कैनिंग सेंटर को ताला लगाकर स्टाफ समेत फरार हो गया।

डॉ. कंग को भगाने के आरोपों में घिरीं सिविल सर्जन डॉ. जसप्रीत कौर सेखों के खिलाफ हरियाणा सेहत विभाग ने रिपोर्ट में कहा है कि हम 12 बजे से डॉ. जसप्रीत कौर सेखों को कॉल कर रहे थे कि आप भोगपुर में टीम भेज दो, लेकिन उन्होंने 2:30 घंटे बाद टीम भेजी।
 

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि हरियाणा से आई टीम से अस्पताल का नाम पता करने में सिविल सर्जन ने ज्यादा दिलचस्पी दिखाई। वे इस बात पर अड़ी थीं कि अस्पताल का नाम बताओ, हमें ऑर्डर पर छपवाना है। जबकि अस्पताल का नाम पूछने का पीएनडीटी एक्ट में ऐसा कोई प्रावधान ही नहीं है।

 

जालंधर सिविल सर्जन को बार-बार कॉल करने पर एक ही जवाब मिल रहा था कि वे टीम बना रहे हैं। टीम बनाने में वक्त लग रहा है। जबकि इस तरह के मामलों में तो बिना वक्त गंवाए टीम भेजी जाती है। जब भी बाहरी राज्य से कोई टीम आती है तो उसे लोकल टीम की मदद से ऑप्रेशन को अंजाम देना होता है। मामला जालंधर में दर्ज होना चाहिए था लेकिन सिविल सर्जन दफ्तर ने कार्रवाई करने से मना कर दिया।

 

रिपोर्ट के अहम तथ्य...
-11 सितंबर की सुबह 7:30 बजे जब वे वहां से चले, तब उन्हें नहीं पता था कि पंजाब के किस शहर में लिंग जांच होनी है। हमारी मुखबिर और डिकॉय गर्भवती महिला आगे गाड़ी में थीं। वे दूसरी गाड़ी में उनका पीछा कर रहे थे। 
-राजपुरा से होते हुए गाड़ी फगवाड़ा और फिर आदमपुर की ओर चल पड़ी। यहां हमें पता चला कि लिंग जांच भोगपुर में होनी है। 11:45 पर हमने सिविल सर्जन अंबाला को कॉल की, जिन्होंने 12 बजे के करीब सिविल सर्जन जालंधर को टीम भोगपुर भेजने को कहा। 


-सिविल सर्जन डॉ. जसप्रीत कौर ने कहा कि आप अपनी टीम को कहिए- सीधे मेरे दफ्तर लिखित आर्डर लेकर आ जाएं।

 

-सिविल सर्जन अंबाला कहते रहे- ऐसे मामलों में लिखित आदेश की जरूरत नहीं होती। आप तुरंत टीम भोगपुर भेजें ताकि अल्ट्रासाउंड मशीन पर बैठे डॉक्टर को सुबूतों के साथ पकड़ा जा सके।

 

-भोगपुर पहुंचने पर महिला दलाल हरजीत कौर ने 3-4 महिलाओं को कॉल की। उनके आने के बाद डिकॉय और हमारी गवाह बाघा अस्पताल पहुंच गईं।

 

-बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के हरियाणा व चंडीगढ़ के स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. जीएल सहगल ने भी जालंधर सिविल सर्जन को कॉल कर टीम तुरंत भेजने को कहा।

 

-इसी दौरान हरजीत कौर हमारी डिकॉय अल्ट्रासाउंड टेस्ट करवाकर वापस आ गईं। हमारी टीम इंतजार कर रही थी।

 

अंबाला सिविल सर्जन ने एडीसी को ऐसे 30 मामलों की लिस्ट भी सौंपी है, जिसमें ठीक इसी तरह की छापेमारी में पंजाब में ही एफआईआर दर्ज की गई थी। सवाल यह भी है कि जालंधर सिविल सर्जन की ऐसी क्या मजबूरी थी कि उन्होंने एक्शन लेने की बजाय उलटा डॉ. कंग के दूसरे अस्पताल को 4 दिन खुला रखा। एफआईआर भी दर्ज नहीं होने दी।

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