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एमआर टीके के बाद बच्चे को बुखार, गांववालों ने डाक्टर को तीन घंटे तक बंधक बनाया, जांच में बच्चा ठीक-ठाक

मीजल्स-रुबेला टीके के बारे में फैली अफवाह के बाद भ्रम दूर करने के सेहत विभाग के तमाम प्रयासों के बावजूद लोग डरे हुए...

Dainik Bhaskar

May 03, 2018, 02:35 AM IST
एमआर टीके के बाद बच्चे को बुखार, गांववालों ने डाक्टर को तीन घंटे तक बंधक बनाया, जांच में बच्चा ठीक-ठाक
मीजल्स-रुबेला टीके के बारे में फैली अफवाह के बाद भ्रम दूर करने के सेहत विभाग के तमाम प्रयासों के बावजूद लोग डरे हुए हैं और टीका लगने के बाद कुछ बच्चों को बुखार आने पर अपना आपा खो दे रहे हैं। टीका लगने के बाद कुछ बच्चों को बुखार आना स्वाभाविक है। सेहत विभाग की बार यह बात स्पष्ट भी कर चुका है कि बुखार आने पर डरने की कोई बात नहीं, लेकिन इतना सब होने के बावजूद एक छात्र ने एमआर का टीका लगाए जाने के बाद असहज महसूस किया, तो गांववासियों ने एक डाक्टर को लगभग तीन घंटे तक बंधक बना लिया। पुलिस ने गांव पहुंचकर डाक्टर को छुड़वाया। बाद में डाक्टरों ने बकायदा बच्चे की जांच की और वह बिल्कुल ठीक-ठाक है लेकिन हंगामा तो बरपा हो गया।

मंगलवार को सरकारी स्कूल काहलवां के 11 वर्षीय छात्र रविंदर सिंह पुत्र हरपाल सिंह निवासी को एमआर का टीका लगाया गया था। टीका लगने के बाद घर जाकर बच्चे की हालत खराब हो गई। बुधवार को जब सीएचसी भाम के हेल्थ वर्करों की टीम गांव काहलवां में एमआर टीकाकरण के लिए पहुंची तो पहले से गुस्से में बैठे गांववासियों ने डा. कुलदीप सिंह को छात्र रविंदर के घर ले जाकर बंधक बना लिया। गांववासी हेल्थ वर्कर से कह रहे थे कि हमारी जानकारी के बिना ही हमारे बच्चे को कल कैसे टीका लगाया गया है। गांववासियों का कहना था कि बच्चा अच्छा-भला कल स्कूल गया था लेकिन टीका लगने के बाद वह बार बार सिरदर्द तथा बुखार की शिकायत कर रहा है। इसकी हालत टीका लगाए जाने के बाद ही खराब हुई है तथा बच्चा काफी घबराहट महसूस कर रहा है। हेल्थ वर्करों की टीम में शामिल लेडी स्टाफ किसी तरह गांववासियों की गिरफ्त में आने से बच गया। डा. कुलदीप सिंह ने किसी तरह पुलिस तथा मेडिकल अधिकारियों को अपने बंधक बनाए जाने की जानकारी दी। लगभग तीन घंटे के बाद पुलिस की टीम एएसआई सुभाष की निगरानी में गांव में पहुंची। डा. निरंकार सिंह एसएमओ कादियां तथा डा. हरप्रीत सिंह मेडिकल अफसर भी मौके पर पहुंच गए। मेडिकल टीम को भी गांववासियों के रोष का सामना करना पड़ा। एएसआई सुभाष की सूझबूझ से मामला और बिगड़ने से बच गया। यह बात वर्णनीय है कि एमआर टीकाकरण करने से पहले छात्रों के अभिभावकों को यदि विश्वास में ले लिया जाता तो काहलवां में यह विवाद पैदा न होता।

टीका लगाने के वक्त अभिभावकों को स्कूल बुला लेने से टल सकते हैं ऐसे विवाद

बंधक बनाए गए डॉ. कुलदीप सिंह घिरने के बावजूद एमआर टीके के बारे में लोगों को समझाते हुए (दाएं) डाक्टरों की टीम छात्र के स्वास्थ्य की जांच करती हुई।

एमआर टीके को लेकर अफवाह से बचें : एसएमओ

डाक्टर निरंकार सिंह ने बताया कि हम सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल कादियां तथा सैक्सस स्कूल कादियां में अब तक 200 छात्रों को टीका लगा चुके हैं तथा सारे छात्र बिल्कुल ठीक-ठाक हैं। उन्होंने आम लोगों को एमआर टीके के बारे फैलाए जा रहे गलत भ्रम से बचने की अपील की है।

शिकायत आई है, जांच की जा रही है : एसएचओ

थाना कादियां के एसएचओ सुदेश कुमार ने बताया कि हमारे पास सिविल सर्जन किशन शर्मा और एसएमओ कादियां निरंकार सिंह व एसएमओ भाम चेतना की शिकायत आई है कि डॉ. कुलदीप सिंह से बदसलूकी व मारपीट की गई है। मामले की जांच की जा रही है।

डाक्टरों की टीम ने किया बच्चे रविंदर का चेकअप

सरकारी स्कूल काहलवां में 11 साल के बच्चे रविंदर को लगाए टीके के बाद हुए हंगामे पर गांव में पहुंची डाक्टरों की टीम ने रविंदर का मेडिकल चेकअप किया। वहीं, बच्चे की जांच के बाद डाक्टरों ने बताया कि बच्चा रविंदर बिल्कुल ठीक-ठाक है। उन्होंने बताया कि एमआर टीके से बुखार हो जाता है, इसलिए इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने छात्र के माता-पिता को ग्लूकोज चढ़ाने के लिए अस्पताल आने की सलाह भी दी।

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