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राणा के अपनाए देसी जुगाड़ से संत सीचेवाल ने दो दिन में बेईं से 200 मीटर तक निकाली जंगली बूटी

जो काम सरकार नहीं कर पाई। वातावरण प्रेमी संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने दो दिन में कर दिखाया है। हम बात कर रहे है काली...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:40 AM IST

जो काम सरकार नहीं कर पाई। वातावरण प्रेमी संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने दो दिन में कर दिखाया है। हम बात कर रहे है काली बेईं कांजली वेटलैंड में उगी जंगली बूटी की। तीन महीने पहले 14 अक्टूबर को विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री राणा गुरजीत सिंह ने देसी जुगाड़ से जंगली बूटी निकालने की शुरुआत की थी। बाद में राणा की कुर्सी छिन गई तो वह यह वादा भी भूल गए। हालात यह बब गए कि जंगली बूटी से पानी भी पुल से आगे नहीं जा पा रहा था। मामला संत सीचेवाल के ध्यान में आया तो वह बुधवार को खुद अपनी टीम के साथ यहां पहुंचे। सीचेवाल और उनके दर्जन भर सेवादार कांजली वेटलैंड में क्रेन और वाटर वोट की मदद से जंगली बूटी निकाल रहे है। दो दिन में 200 मीटर से बूटी निकाल दी। संत सीचेवाल ने इससे पहले साल 2005 से 2014 तक दर्जन बार काली बेईं की बूटी निकालकर सफाई करवा चुके हैं लेकिन 19 गांवों, शहर के सीवरेज और फैक्टरियों का दूषित पानी पड़ने से बूटी फिर आ जाती है।

बता दें कि 25 दिसंबर को डीसी मोहम्मद तैयब ने आला अधिकारियों के साथ काली बेईं में कांजली वैटलेंड पर सफाई करने की शुरुआत की थी। डीसी खुद सफाई करते दिखे थे। अब आगे भी वह इसके सुधार करने की कोशिश कर रहे हैं।

संत सीचेवाल ने साल 2005 से 2014 तक की थी काली बेईं में सफाई, सीवरेज और फैक्ट्रियों के दूषित पानी से फिर आ गई जंगली बूटी, बोले-आज वेटलैंड-डे पर काली बेईं में दौड़ेगी नांव

देसी जुगाड़ से काली बेईं से बूटी निकालते संत सीचेवाल के सेवादार। सफाई का जायजा लेने पहुंचे प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के चेयरमैन काहन सिंह पन्नू, डीसी मोहम्मद तैयब।

प्रकाशपर्व से पहले बेईं पूरी तरह साफ हो जाएगी : सीचेवाल

राणा बेईं से जंगली बूटी निकालने में सफल नहीं हुआ लेकिन उनका देसी जुगाड़ संत सीचेवाल भी अपना रहे है। इन्होंने भी क्रेन के आगे बकट की जगह कंघी (तीखे सरिए) लगा रखे हैं। जिससे बूटी खींच कर बाहर कर दी जाती है। पानी नीचे गिर जाता है। अंतर इतना है कि राणा ने नगर कौंसिल की जेसीबी की मदद ली थी उनके आगे देसी जुगाड़ में बकट लगाई गई थी। जिसके सरिए सीधे नहीं थे। अब यहां बड़ी क्रेन लाई गई है। कंघी को तीखे और सीधे सरिए लगाए गए है। इतना ही नहीं क्रेन से नाव में काटी गई बूटी को क्रेन के पास धकेल कर लाया जाता है। संत सीचेवाल का दावा है कि आज 2 फरवरी को विश्व वेटलैंड डे पर कांजली की काली बेईं के बीच नाव दौड़ने लगेगी। साल 2019 में आ रहे श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर यह बेईं पूर्ण रुप में साफ हो जाएगी।

सीवरेज और फैक्ट्रियों का पानी बेईं में गिराने का होगा विरोध

संत बलबीर सिंह सीचेवाल का कहना है कि काली बेईं में शहर के सीवरेज का दूषित और फैक्ट्रियों का जहरीला पानी पड़ने से पवित्र काली बेईं का पानी दूषित हो रहा है। कई गांवों का पानी भी बेईं में पड़ रहा है। वह हर गांव और शहर में इसका कड़ा विरोध करेंगे, जहां पानी बेईं में फेंका जाता है। उनका एक ही मकसद है कि काली बेईं को 2019 में आ रहे 550वें प्रकाश पर्व तक साफ किया जाए। इस लिए सभी गांव और शहरवासियों का सहयोग जरूरी है। उन्होंने कहा कि पहले भी बेईं की सफाई करवाई गई थी। यदि दूषित पानी इसी तरह बेईं में गिरता रहा तो बेईं से बूटी हटाने का लाभ नहीं होगा।

फतेहगढ़ साहिब में ट्रायल सफल होने पर राणा गुरजीत सिंह ने कपूरथला में किया था प्रयास

जालंधर ड्रेनेज विभाग के एक्सईएन अजीत सिंह के मुताबिक काली बेईं से बूटी निकालने के लिए पूर्व कैबिनेट मंत्री राणा गुरजीत सिंह की निर्देश पर देसी जुगाड़ तैयार किया था। जेसीबी के आगे देसी बकट सरिए को जोड़ कर बनाई गई थी। बकट से जेसीबी जब पानी से बूटी निकालती है तो पानी नीचे गिर जाता था। बूटी असानी से बाहर आ जाती है। बकट के बिना पानी और बूटी दोनों आते थे। बकट से पहले फतेहगढ़ साहिब ट्राइल लिया गया था। वहां ट्रायल ड्रेन में सही रहा। बाद में उसे कपूरथला लाकर प्रयास किया गया था। यह बकट कोटकपुरा से तैयार करवाया है। जेसीबी आम ही है। केवल बकट ही लगाई गई है। जो जेसीबी के आगे पिन लगाकर लगाई जाती है।

संत सीचेवाल ने लगाई जेसीबी के आगे कंघी

संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने जंगली बूटी निकालने के लिए भी देसी जुगाड़ अपनाया है। बूटी निकालने के लिए बड़ी क्रेन लाई गई है। उसके आगे देसी कंघी बनाकर लगाई है। राणा ने जेसीबी के आगे बकट का सहारा लिया था। जिसको तीखे सरिए लगाकर बनाया गया था लेकिन कंघी से बूटी निकालना आसान दिख रहा है। यह जुगाड़ संत सीचेवाल ने खुद तैयार करवाया है।

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