पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • Kapurthala News Achieved A Place By Taking Higher Education Now Became An Inspiration For Others

उच्च शिक्षा लेकर मुकाम हासिल किया, अब दूसरों के लिए बनीं प्रेरणा

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

महिलाएं हर क्षेत्र में अच्छा काम कर रही हैं चाहे सेना हो, प्रशासनिक सेवा, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य सेवा, मनोरंजन या शिक्षा क्षेत्र हो, हर जगह महिलाओं का परचम है। पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिला काम कर रही है। लेकिन अभी भी पिछड़े वर्गों में महिलाओं को एकाधिकार नहीं मिला है। समाज में कुछ महिलाएं ही उनकी आवाज को बुलंद करने में जुटी हुई हैं। यह महिलाएं सरकारी कार्यस्थल, प्राइवेट इंस्टीट्यूट में तैनात होकर दूसरी महिलाओं की आवाज बन रही है। आज यानि रविवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा है। इस दिवस को मनाने का मुख्य मकसद महिलाओं के अधिकारों को बढ़ावा देना है। हम जिले की कुछ एसी महिला शख्सियतों से रुबरु करवा रहें, जिन्होंने समाज में अपनी अच्छी पैठ बनाई है और इस पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं व लड़कियों को अपनी मंजिलों तक पहुंचाने के लिए मददगार साबित हो रही है।

िहंदू कन्या काॅलेज और हिंदू कन्या काॅलेजिएट स्कूल में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर ‘मेरी कहानी मेरी जुबानी’ प्रोग्राम का आयोजन किया गया। जिसमें नाम कमाने वाली महिलाएं छात्राओं के रूबरू हुईं। उन्होंने अपने तजुर्बे और संघर्ष को छात्राओं के साथ सांझा किया।

मेहनत से हर लक्ष्य पाना संभव : मोनिका लांबा

कपूरथला की सीजेएम मोनिका लांबा ने बताया कि उनके पिता भी ज्यूडिशियल क्षेत्र में है, उन्होंने आठवीं कक्षा में सोच लिया था कि वह इस क्षेत्र में आएंगी और 22 वर्ष की आयु में जज बनीं। उन्होंने कहा कि कई बार जल्दबाजी में किया गया फैसले कई बार सही नहीं होत। बतौर जज उनको भावनाओं से ऊपर उठ कर कार्य करना पड़ता है।

छात्राओं का संवार रही हैं भविष्य, रोजगार दिलवाने में मददगार


हिंदू कन्या कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. अर्चना गर्ग 12 सालों से शिक्षा क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रही है। पति और दो बेटे जो शहर में ही वकालत की प्रैक्टिस कर रहे है। उनकी बेटी नहीं है लेकिन कॉलेज में पढ़ती 750 लड़कियों पर वह अपनी जान निछावर करती हैं। उनका मानना है कि आज भी महिलाएं आजादी, शक्ति और स्वाभिमान को अपने अंदर दबाकर पुरुषों के नियमों को मानने को मजबूर हैं। इसका मूल कारण शिक्षा का अभाव भी हो सकता है। शिक्षा ही एकमात्र ऐसा जरिया है जिससे महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सकती हैं। जिला रोजगार अधिकारी नीलम महें खुद मुश्किलों में पली बढ़ी हैं और इस मुकाम तक पहुंची है। वह जिले की युवा पीढ़ी को रोजगार दिलवाने में मददगार बन रही है। नीलम महें जिले में 2016 से तैनात है। वह अब तक 5800 युवा पीढ़ी को रोजगार दिलवाने में मदद कर चुकी है। उनका कहना है महिलाएं अपने कार्यस्थल पर भी लगन से काम करती हैं। उनकी दो छोटी बेटियां हैं। उन्हें अपनी बेटियों पर नाज है कि वह बड़ी होकर समाज को आगे ले जाने में अहम भूमिका निभाएंगी। जिले की स्पोर्ट्स अधिकारी जसमीत कौर का मानना है कि खेलों में भी लड़कियों को बेहतर विकल्प मिल सकता है। जरूरत है समाज को बदलने की। जहां पर लड़कियों के खेल कूद पर उनके माता पिता द्वारा पाबंदी लगाई जाती है। महिलाओं को समाज के सभी बंधनों से स्वयं को आजाद कर इतना सशक्त होने की जरूरत है जिससे कोई भी उसकी ओर बुरी नजर से देखने की हिम्मत तक न कर सके।

कभी भी पंजाबी विरसे को नहीं भूलीं : सर्वजीत

पंजाब की लोक गायिका और राष्ट्रपति अवार्ड विजेता सर्वजीत कौर ने बताया कि किस तरह गरीबी के हालातों में उन्होंने गायकी को चुना और पैसा कमाया। पैसे कमाने के चक्र में उन्होंने कभी भी अपनी सभ्यता का दामन नहीं छोड़ा और लचर गायकी से दूर रहे। उन्होंने छात्राओं को कहा कि हमेशा ईमानदारी से मेहनत की ओर ध्यान दो, पैसा और अवार्ड अपने आप आपके पीछे आएंगे।

असफलता से न घबराएं चाहिए : डा. सिमरत

एसीपी भुलत्थ डा. सिमरत कौर 4 बार इंटरव्यू में फेल हुईं और सिविल सेवाओं का लक्ष्य छोड़ मेडिकल प्रोफेशन में आ गईं। शादी के बाद फिर परीक्षा की कोशिश की और सफल हो गईं। उन्होंने छात्राओं को कहा कि असफलताओं से कभी भी घबराएं नहीं, मेहनत करते रहने के लिए प्रेरणा देते हुए कहा कि देर सवेर सफलता जरूर आपके कदम चूमेगी।

लड़कियां अपनी सोच बदलें : नवनीत कौर

पुडडा के एस्टेट आफिसर नवनीत कौर बल ने बताया किस तरह वह डीसी जालंधर श्रुति सिंह की शख्सियत से प्रभावित होकर सिविल सेवाओं में जाने का सोचा। उन्होंने बताया कि इस समय जरूरत लड़कियों को अपनी सोच बदलने की है। हमेशा यह समझना चाहिए कि वह किसी से कम नहीं है और वह किसी भी जिम्मेदारी को बखूबी निभा सकती हैं।

डॉ. अर्चना गर्ग, नीलम महंे और जसमीत कौर।
खबरें और भी हैं...