मन, वाणी और क्रिया से एक जैसा व्यवहार हो तो ही बनेंगे प्रभु की कृपा के पात्र: स्वामी कमलानंद

Kapurthala News - श्री स्नेह बिहारी मंदिर जलौखाना कांप्लेक्स कपूरथला में 11 दिवसीय श्रीराम कथा के 9वें दिन हरिद्वार से आए...

Dec 04, 2019, 08:17 AM IST
Kapurthala News - if you behave the same way with mind speech and action then you will be eligible for the grace of god swami kamalanand
श्री स्नेह बिहारी मंदिर जलौखाना कांप्लेक्स कपूरथला में 11 दिवसीय श्रीराम कथा के 9वें दिन हरिद्वार से आए महामंडलेश्वर स्वामी कमलानंद गिरि जी ने प्रवचन किए। उन्होंने कहा कि अरण्यकांड के भगवान श्री राम बनवास कालका भावमय प्रसंग सुनाते हुए कहा कि दंडकारण्य में भगवान श्री राम की दो महिलाओं से मुलाकात हुई। एक थी शूर्पणखा और दूसरी शबरी जी। दोनों के स्वभाव में भारी अंतर है। शूर्पणखा अंदर से कुरूप है और ऊपर से मोहक रूप बनाकर आती है, अति चंचल, क्रूर और कपटी स्वभाव की है। उधर, शबरी जी ऊपर से कुरूप जैसी दिखाई देती हैं लेकिन हृदय से अति निर्मल और पवित्र है।

महाराज ने बताया कि शबरी जी जीवन की उपासना है, स्थिरता है, वैराग्य है, भक्ति की ऊंची श्रेणी का नाम शबरी है। व्यक्ति भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के माध्यम से जब ऊंचाइयां छू लेता है तो बाहर की सुरुपता, शारीरिक श्रृंगार की परवाह किए बगैर प्रभु प्राप्ति की छटपटाहट एवं हृदय से तड़पन बढ़ती जाती है। इसीलिए शबरी माता को मिलने भगवान स्वयं चल कर आए हैं। महाराज जी ने बताया कि भगवान ने शूर्पणखा को देखा तक नहीं बल्कि नाक और कान काट कर उसको कुरुप बनाकर भेज दिया। शूर्पणखा प्रभु के सामने जाकर झूठ बोलती है। और अपने भाई रावण के पास जाकर सत्य बोलती है। गुरुजनों एवं परमात्मा के समक्ष जो असत्य संभाषण करेगा उसका हश्र वही होगा जो शूर्पणखा का हुआ।

स्वामी जी ने बताया कि रावण सीता का हरण करने के लिए जब गया तो बिना भटि साधु का वेश धारण करके गया। उधर, भगवान ने भी सोचा कि रावण कभी भी सीता के असली स्वरूप का स्पर्श नहीं कर सकेगा, अतः लीला को पूर्ण करने के लिए सीता जी को मायावी रूप धारण करने का संकेत दिया। सीता जी के हरण के बिना रावण का मरण नहीं हो सकता। रावण ने मरीज को नंलआकर प्रणाम किया। मारीच रावण के परिणाम से प्रसन्न नहीं हुआ बल्कि दुखी हुआ की नीच, अहंकारी व्यक्ति किसी को प्रणाम करे तो समझो विपत्ति आने वाली है। रावण कभी किसी का प्रणाम लेता भी नहीं, यदि यह आज प्रणाम कर रहा है तो कोई संकट आने वाला है।

रावण के डराने से मारीच मन में सोचता है एक तरफ दुष्ट रावण के हाथों मरना दूसरी ओर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के कर कमलों से मेरी मुक्ति होना है। उसने प्रभु श्री राम के हाथों मरना ही उचित माना और स्वर्णमृग बनकर प्रभु की कुटिया के पास गया। स्वामी जी ने कहा कि प्रभु कभी किसी को मारते नहीं हैं, बल्कि ईश्वर के क्रोध में भी जीव का भल्ला छुपा होता है। प्रभु हमेशा उसका उद्धार ही करते हैं। झूठे सिद्धांतों का जाल बिछाकर जानकी जी को रावण हरण करके ले जाता है। आज समाज में किसी तरह की व्यवस्था में देखने को मिल रही है। बाहर से कुछ और अंदर से कुछ और। मन वाणी और क्रिया से व्यक्ति एक जैसा व्यवहार करे तभी प्रभु की कृपा का पात्र बन सकता है।

इस अवसर पर राजू शर्मा हरिनाम संकीर्तन मंडल के प्रधान, पाली जी ब्रह्मकुंड मंदिर के प्रधान, दिव्या आश्रम कपूरथला से पवन सूद, पंडित राजेश शर्मा पिन्नी, बाबा पंडित, योगेंद्र लाल शर्मा तहसीलदार, विनय शर्मा, पंकज गोयल, दीपक चोपडा, सतीश शर्मा, सुभाष चंद, प्रोफेसर सागर, मास्टर सहगल, वेद प्रकाश पसरीचा, नरेश बहल सुभाष मौजूद थे।

श्री स्नेह बिहारी मंदिर में श्रीराम कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालु।

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