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शिक्षा में लूट... क्राइस्ट किंग स्कूल के पास दुकान में किताबों के दाम ज्यादा वसूलने पर अभिभावकों से विवाद, डीईओ पहुंचे, स्कूल प्रबंधन से मांगा जवाब
आईसीएससी बोर्ड की ओर से प्रमाणित क्राइस्ट किंग कॉन्वेंट स्कूल की ओर से सरकार के आदेशों के बावजूद मिलीभगत से अभिभावकों से बुक्स के दाम ज्यादा वसूलने का मामला सामने आया है। स्कूल प्रबंधन की शह पर परिसर के नजदीक चल रही एक शॉप के कर्मियों से अभिभावकों का विवाद हो गया। सूचना मिलते ही जिला शिक्षा अधिकारी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने स्कूल प्रबंधन को विशेष हिदायत जारी की है लेकिन मात्र उक्त स्कूल की ही बुक्स एक शॉप पर बिक्री होने को लेकर स्कूल प्रबंधन और शॉपकीपर पर फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की गई है। अभिभावकों में रोष है कि स्कूल की ओर से बताई गई बुक्स लेने की हिदायत गई गई है जबकि उक्त बुक्स स्कूल के नजदीक बनी अनाअधिकृत शॉप से ही मिलती हैं और दाम भी प्रिंट रेट से ज्यादा वसूल रहे हैं। दूसरी तरफ कॉन्वेंट स्कूल के पीआरओ ने स्कूल के पीआरओ प्यारा सिंह ने कहा कि उनकी जिला शिक्षा अधिकारी से बात हो गई है। जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से स्कूल प्रिंसिपल को लेटर जारी कर हिदायत जारी की है कि प्रिंट रेट पर ही किताबें बेची जाएं। उन्होंने स्कूल की प्रिंसिपल को बुधवार को अपने दफ्तर बुलाया है। वहीं, स्कूल की प्रिंसिपल के मोबाइल पर संपर्क करना चाहा तो उन्हें फोन बंद आ रहा था।
यदि दुकान के मालिक के पास अथॉरिटी हुई तो स्कूल भी होगा मामले में शामिल: रिटायर प्रिंसिपल केवल सिंह
सरकारी स्कूल के रिटायर्ड प्रिंसिपल केवल सिंह का कहना है कि स्कूल के पास अनाधिकृत दुकान से अधिक दाम पर बुक्स मिलने से यह साबित हो रहा है कि स्कूल प्रबंधन की शह पर ही उक्त शॉप का कर्मचारी ऐसा काम कर रहा है। इसमें दो बातें जरूर है पहली तो यह कि स्कूल की ओर से उक्त शॉप कर्मी को अथॉरिटी दी गई होगी। यदि उस दुकानदार के पास स्कूल की अथॉरिटी होगी तो इस खेल में स्कूल भी शामिल होगा। दूसरी बात यह कि यदि शॉप कर्मी के पास अथॉरिटी नहीं होगी तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
स्कूल की ही किताबें दुकान में बिकने के कारण प्रबंधन और शॉपकीपर पर फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की
स्कूल की अथॉरिटी न हुई तो दुकानदार पर होगा केस
जिला शिक्षा अधिकारी मस्सा सिंह को सूचना मिली तो वह प्राइमरी डीईओ को अपने साथ लेकर मौके पर पहुंच गए। दुकानदार अपनी ही मौज में बुक्स बेच रहा था। डीईओ ने जब अभिभावकों को पूछा तो सभी अभिभावकों ने आपबीती सुनाई। उन्होंने बुक्स शॉप के कर्मचारी से सवाल भी किए लेकिन उसने किसी का जवाब नहीं दिया। डीईओ का कहना है कि स्कूल के पास खोली गई दुकान अनाधिकृत है। उन्होंने स्कूल प्रिंसिपल को लेटर जारी कर दिया है। यदि शॉप कर्मचारी के पास बुक्स बेचने की स्कूल अथॉरिटी नहीं हुई तो उसपर अधिक दामों पर बुक्स बेचने का मामला दर्ज करवाएंगे।
डीईओ मस्सा सिंह किताबों की जांच करते हुए। अभिभावक जानकारी देते हुए।
किताब का रेट 597, वसूल रहे 797 रुपए
क्राइस्ट किंग कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ने वाले एक बच्चे की मां उक्त बुक शॉप से बुक्स खरीदने के लिए आई थी। बुक शॉप के कर्मचारी ने स्कूल की लूज और बंडल में बुक्स दी जा रही थी। ऐसे में उक्त बच्चे की मां ने लूज बुक्स निकलवाई, जिसमें स्पीक इंग्लिश की बुक्स मौजूद थी। बुक्स पर रेट 597 रुपए लिखा था लेकिन जब बुक शॉप के कर्मचारी ने बिल थमाया तो बिल के पीछे उस किताब का रेट 797 रुपए देने के लिए कहा। इसपर दुकान पर खड़े अन्य अभिभावकों ने दुकानदार को शांत करवाने की कोशिश की। महिला ने उसे बुक्स वापस कर दी लेकिन उक्त ली गई बुक्स का बिल दुकानदार को वापस नहीं दिया। वहां खड़े अभिभावकों ने खरीदी हुई बुक्स का बिल चेक किया गया तो किसी अभिभावक को प्रिंट रेट से अधिक तो किसी को प्रिंट रेट पर बुक्स दी गई थी। अभिभावकों में रोष था कि वह सुबह से लाइन में लगकर बुक्स खरीद रहे है लेकिन डीलिंग सही न होने के कारण वह बेरंग लौट रहे हैं। दुकान पर मौजूद अभिभावकों ने अपने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि स्कूल प्रबंधन की ओर से ही उक्त बुक्स शॉप से बुक्स खरीदने के लिए कहा गया है। स्कूल की ओर से जिन लेखकों की लिस्ट उन्हें दी गई है वह बुक्स किसी अन्य दुकान से नहीं मिल रही है।