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सैनिक स्कूल के दर्जा चार दो कर्मियों की पुलिस वैरीफिकेशन झूठी निकली, दोनों पर दर्ज थे मामले, ढाई साल बाद केस दर्ज

एक वर्ष पहले
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सैनिक स्कूल कपूरथला में कांट्रैक्ट बेस पर काम कर रहे दो लोगों ने स्कूल प्रबंधन को अपने बारे में सही जानकारी नहीं दी। मौजूदा स्कूल प्रबंधन को उन पर शक हुआ तो स्कूल प्रिंसिपल की ओर से गठित किए बोर्ड की मदद से दोनों कर्मचारियों की जांच की।

जांच में दोनों लोगों की ओर से जमां करवाए कागजातों में पुलिस वैरिफिकेशन गलत निकली। स्कूल प्रंबधन ने उक्त दोनों को काम से निकाल दिया। साथ ही इसकी जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने ढाई साल बाद स्कूल प्रिंसिपल की शिकायत पर कार्रवाई क दो लोगों पर धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

सैनिक स्कूल के प्रिंसिपल कर्नल विकास मोहन के मुताबिक साल 2017 में स्कूल में काम कर रहे क्लास फोर कर्मचारियों से एफिडेविट मांगे थे। इसमें क्लास फोर कर्मचारियों को अपने बारे जानकारी देने के लिए कहा गया।

कर्मचारियों में कुछ कर्मचारी कांट्रैक्ट बेस पर
भी काम कर रहे थे। इनमें रमन लाल उर्फ हैपी पुत्र कुलवंत सिंह और मंगलजीत सिंह उर्फ मंगा पुत्र बलबीर सिंह दोनों निवासी मोहल्ला मेहताबगढ़ भी शामिल थे। दोनों कागज जमां करवाने के लिए टाल-मटोल करने लगे।

सैनिक स्कूल का बाहरी दृश्य। -भास्कर

2013 से 2017 तक दोनों कर्मचारियों ने स्कूल में किया था काम

थाना कोतवाली और सिक्योरिटी ब्रांच से रिकॉर्ड लेकर कार्रवाई की गई

थाना सिटी के एसएचओ हरजिंदर सिंह ने बताया कि स्कूल प्रिंसिपल की शिकायत दो लोग रमन लाल और मंगलजीत सिंह पर 420, 465,468,471, व धारा 200 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। थाना कोतवाली और सिक्योरिटी ब्रांच की ओर से रिकॉर्ड हासिल करने के बाद ही उक्त कार्रवाई की गई है, इस कारण इतना समय लग गया है। मामले में त्रुिट न हो, इसलिए जांच में समय लिया गया।

प्रिंसिपल कर्नल विकास मोहन ने बोर्ड का गठन किया। इसमें लैफ्टिनेंट दिलप्रीत सिंह और कुछ टीचर्स को शामिल किया गया। लैफ्टिनेंट दिलप्रीत सिंह ने दोनों के कागजातों को खंगालना शुरू किया तो पता चला कि क्लास फोर रमन लाल साल 2013 से स्कूल में कांट्रैक्ट बेस पर काम कर रहा था जबकि मंगलजीत सिंह 2016 में तैनात हुआ था। जांच में पाया गया

कि रमन लाल को पहले भी कई बार काम से निकाला जा चुका था। वह फिर किसी न किसी तारीके वापस आ जाता था जबकि दूसरा कर्मचारी पिछले एक साल से डेलीवेज पर काम कर रहा था। बोर्ड की ओर से कहने के बाजवूद जब दोनों कर्मचारियों ने एफिडेविट जमां नहीं करवाए तो प्रिंसिपल कर्नल विकास मोहन और लैफ्टिनेंट दिलप्रीत सिंह को उनपर शक हुआ। दोनों कर्मचारियों की ओर से स्कूल प्रबंधन को जमां करवाए गए कागजात जांच तो कागजों में पुलिस वैरीफिकेशन भी शामिल थी। प्रिंसिपल के मुताबिक दोनों पर मामला दर्ज था। उन्होंने 2017 में दोनों को काम से निकाल दिया औ उनके खिलाफ पुलिस को शिकायत दर्ज करवाई।
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