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सिटी रिपोर्टर|खन्ना

सिटी रिपोर्टर|खन्ना वीरवार को पेश किए गए देश के आम बजट पर जब लोगों के मन की बात जानी, तो ज्यादातर सरकार से खफा ही...

Danik Bhaskar | Feb 02, 2018, 04:15 AM IST
सिटी रिपोर्टर|खन्ना

वीरवार को पेश किए गए देश के आम बजट पर जब लोगों के मन की बात जानी, तो ज्यादातर सरकार से खफा ही दिखाई दिए। अधिक लोग बजट से निराश दिखे और कुछेक ने ही इसकी सराहना की। कुल मिलाकर 70 प्रतिशत लोगों ने इसे जन विरोधी करार दिया, तो 30 फीसदी ने कहा कि बजट फायदेमंद है। आम बजट पर व्यापारी, किसान, स्टूडेंट वर्ग के लोगों की मिली जुली राय रही। कुछेक किसानों ने इस बजट को खेती के लिए फायदेमंद करार दिया, तो कुछेक ने कहा कि बजट में किसानों के लिए कुछ खास नहीं है।

लोगों ने कहा कि लागत से डेढ़ गुणा ज्यादा मूल्य देने का सरकार का दावा झूठा है। अगर सरकार चाहती तो चार सालों में स्वामीनाथन रिपोर्ट की सिफारिशें लागू कर सकती थी। खेती का धंधा तभी फायदे में होगा, जब स्वामीनाथन की रिपोर्ट लागू की जाएगी। जो किसान बजट के पक्ष में बोल रहे थे, उनका कहना था कि डेढ़ गुणा ज्यादा मूल्य मिलने से किसानों को फसल की लागत पर पड़ रहा घाटा दूर होगा। किसानों की आर्थिक दशा बदलेगी। इस बार इन्कम टैक्स स्लैब में किसी प्रकार की छूट न देने पर आम लोगों का कहना था कि उन्हें उम्मीद थी कि सरकार इन्कम टैक्स में छूट की सीमा बढ़ाएगी। लेकिन बजट सुनकर उनके पल्ले निराशा ही पड़ी है। एजुकेशन और हेल्थ पर 1 फीसदी सेस बढ़ाना भी निंदनीय है। सरकार टीबी के मरीजों को पांच सौ रुपए मासिक आर्थिक सहायता देने की बात कर रही है। आज तक इन्हें समय पर मेडीसन उपलब्ध नहीं हो रही। अस्पतालों में सुधार पर बजट में कोई बात नहीं की गई। ट्रेनों में सीसीटीवी और वाई फाई सुविधा पर लोगों की प्रतिक्रिया यह रही कि सरकार चार सालों में समय पर ट्रेनें नहीं चला सकी। बड़े बड़े दावे करने का कोई फायदा नहीं है।