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गौशालाओं और डेयरियों में पड़े हैं 250 मृत पशु, 5 लोगों के खिलाफ 11 करोड़ जुर्माने का नाेटिस

5 महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो।
  • मृत पशु उठाने वालों ने काम रोका, पीपीसीबी ने बंद कराया बूचड़खाना
  • इनका कैसे होगा निपटारा- पीपीसीबी और नगर निगम के पास नहीं है कोई जवाब

लुधियाना. शहरवासियों के लिए एक नया वायरस बीमारी के तौर पर बनने वाला है और यह वायरस भयंकर बीमारियों को भी न्योता देगा। दरअसल मामला ये है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की तरफ से सतलुज दरिया को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए बनाई गई कमेटी के रिटायर्ड जस्टिस और टीम के चेयरमैन जसवीर सिंह गत दिनों शहर में बुड्ढा दरिया को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए किए जा रहे प्रयत्नों का जायजा लेने पहुंचे थे।


इस दौरान उन्होंने सतलुज दरिया किनारे बने बूचड़खाने को देखा और वहां पर पाया कि बूचड़खाने में मांस की कटाई के बाद उसका रॉ मेटेरियल यानी पूरी गंदगी सतलुज दरिया में बहाई जा रही थी। इसे देखते हुए कमेटी के चेयरमैन ने एनजीटी की गाइडलाइन के अनुसार वहां पर मरे हुए पशुओं को लेकर जाने वाले 5 लोगों पर 11 करोड़ रुपए का एनवायरमेंट कंपनसेशन चार्ज लगाने के आदेश जारी किए। इसी के तहत पीपीसीबी की तरफ से उन 5 लोगों को नोटिस भी भेज दिए गए हैं।

निगम ने नहीं बनाया अभी तक कारकस प्लांट
पाले जा रहे पशुओं का मरने के बाद प्रबंध करने के लिए कारकस प्लांट लगाने का प्रपोजल 10 सालों से लटका हुआ था, लेकिन जब शहर स्मार्ट सिटी की दौड़ में शामिल हुआ तो नगर निगम ने इस प्लांट को बनाने की डोर स्मार्ट सिटी के हाथों में थमा दी, हुआ यही लंबे इंतजार के बाद अब सिंधवा बेट में 5 एकड़ की जमीन पर करीब 8 करोड़ की लागत से नया कारकस प्लॉट लगाने का काम शुरू किया गया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि पिछले कई वर्षों से बूचड़खाने दरिया के किनारे चल रहे थे जिनका सारा गंद कई सालों से दरिया में बह रहा था। इस पर जिम्मेदार महकमे में पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड और नगर निगम लापरवाह रहा।

मरे हुए पशु उठाने वाले कृष्ण लाल
हमने कई बार मेयर से मुलाकात भी की है और हड्डा रोड़ी की जगह दूसरी जगह मुहैया कराने या प्लांट लगाकर देने को कहा गया है। ऐसे में अब केंद्र सरकार की तरफ से जो उन पर जुर्माना किया गया है।

पीपीसीबी के सीनियर इनवायरमेंट इंजीनियर संदीप बहल
एनजीटी के आदेश के तहत हमने नोटिस जारी किया है। इसकी भरपाई की करवाई जाएगी जबकि बूचड़खाने में मृत पशुओं को ले जाने की मनाही है। बाकी प्लांट लगाने की जिम्मेदारी लोकल बॉडीज डिपार्टमेंट की है।

बिगड़ने लगे हैं हालात
पीपीसीबी की तरफ से करोड़ों रुपए के नोटिस जारी होने के उपरांत अब नतीजा सामने आने लगा है कि जो लोग शहर की करीब 400 डेयरी और शहर के गौशालाओं से मरे हुए पशुओं को उठाकर लेकर जाते थे, उन्होंने उठाना बंद कर दिया है। गौशालाओं में 30 के करीब और डेयरियों में 200 से ज्यादा बछड़े और बड़े पशु मृत पड़े हैं।

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