पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

‘अपनी गलती मानने में कोई दोष नहीं’

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
अखिल भारतीय सोहम महामंडल वृंदावन की ओर से श्री शिव शक्ति मंदिर सूफियां चौक में चल रहे विराट संत सम्मेलन के चौथे दिन प्रवचन करते हुए स्वामी सत्यानंद जी महाराज ने फरमाया कि अनंत जन्मों में किए कर्मों के फलों को तो भोगना ही पड़ता है। लेकिन भजन करने से जप करने से उनकी तीव्रता कम हो सकती है। परंतु जब जप चिंतन करते हैं तो बहुत अड़चनें आएंगी। परंतु जप करते समय मल, विक्षेप और आवरण को दूर करना चाहिए। उपासना का मतलब है उप आसना, अपनी गलती मानने में कोई दोष नहीं। मन को जप के द्वारा शांत रखने की कोशिश करनी चाहिए। आवरण ज्ञान से दूर होगा, तभी सारी समस्याएं दूर होती चली जाएगींं। इसलिए जप मनन, प्रभु भजन अत्यंत जरुरी है। तभी भव से पार होगें। इसी श्रृंखला में म.म. स्वामी शिव चैतन्य ने प्रेम के बारे में बताया कि जब परमात्मा से मिलने की तीव्र आतुरता जागृत होती है, तभी प्रेम पैदा होता है। म.म. स्वामी शुकदेवानंद ने बताया कि दया यदि मन में नहीं होगी तो साधना प्रारंभ नहीं होगी। स्वामी प्रीतम दास ने मां के समान की बात बताई और स्वामी निगमानंद, स्वामी रामानंद, स्वामी प्रकाशानंद, स्वामी सदानंद, ब्रहमचारी गौरव स्वरुप महाराज ने अन्त: प्रेरणादायक प्रसंग द्वारा भक्तों को आनंदित किया। समिति सदस्य और गणमान्य व्यक्तियों ने संतों का माल्यार्पण करके अभिनंदन किया। इस मौके पर सुनील सिंगला, विजय गर्ग, नरेश बुद्धिराजा, अमृतलाल, वीरेंद्र चोपड़ा, रमेश कुंद्रा, नरेश कुंद्रा, रघुवीर बांसल, डॉ. भोला, ज्ञान आदि मौजूद रहे। महिला मंडल की निर्मला बहन, रमल चौपड़ा और उर्मिला देवी ने मधुर संकीर्तन करके भगवान की आरती की।

विराट संत सम्मेलन में भक्तों ने लगाई हाजिरी।

खबरें और भी हैं...