करोड़ों खर्च कर शहर में बनाए गए 5 अर्बन कम्युनिटी हेल्थ सेंटर, 2-3 साल के बाद भी एक का शुभारंभ नहीं

Ludhiana News - पब्लिक के टैक्स से करोड़ों रुपए खर्च कर सरकार की ओर से जिले में पांच अर्बन कम्युनिटी हेल्थ सेंटर्स बनाए गए हैं।...

Nov 11, 2019, 08:20 AM IST
पब्लिक के टैक्स से करोड़ों रुपए खर्च कर सरकार की ओर से जिले में पांच अर्बन कम्युनिटी हेल्थ सेंटर्स बनाए गए हैं। इनकी बिल्डिंग तैयार हो गई, लेकिन इन्हें सुचारू रूप से शुरू करने के लिए न ही सरकार द्वारा उपकरण दिए गए न ही स्टाफ दिया गया। अगर सरकार समय रहते इनका शुभारंभ करा देती तो डेंगू का दंश और प्राइवेट हॉस्पिटल्स के खर्चों का बोझ झेल रहे लोगों का राहत मिल सकती थी। इन सेंटर्स को बनाने का मकसद यह भी था कि सिविल हॉस्पिटल का बोझ कर हो सके और लोगों को छोटी-मोटी बीमारियों का इलाज उनके इलाके में नकदीकी सेंटर पर मिल सके। उधर, जिले में डेंगू के कंफर्म मरीजों का आंकड़ा अब तक 799 और सस्पेक्टेड केस 1843 पहुंच चुका है। सिविल अस्पताल में तो तमाम इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं।

राज्य सरकार द्वारा 2014-15 के दौरान शहर में पांच जगह पर अर्बन कम्युनिटी हेल्थ सेंटर बनाने की शुरुआत की थी। हर बिल्डिंग पर 5-8 करोड़ रुपए की लागत आई। अब इमारत बनने के दो-तीन साल बाद भी यहां न ही उपकरण हैं, न ही स्टाफ। सरकार ने न तो टेकओवर लिया, न ही इन सेंटर्स का उद्घाटन कराया। जनता के पैसों की इससे ज्यादा बर्बादी क्या हो सकती है? जब लोगों को मेडिकल सुविधा मिल ही नहीं रही है।

लुधियाना में सुभाष नगर, जवद्दी, 32 सेक्टर, शिमलापुरी और सिविल सर्जन दफ्तर में अर्बन कम्युनिटी हेल्थ सेंटर(यूसीएचसी) के लिए नींव पत्थर रखे। 2016-17 के दौरान ये बिल्डिंग्स बन कर तैयार भी हो गई। इनमें से सुभाष नगर, जवद्दी, 32 सेक्टर और सिविल सर्जन दफ्तर में बनी बिल्डिंग का काम पूरा हो चुका है। वहीं, शिमलापुरी में बनाई जा रही बिल्डिंग का काम अभी तक अधूरा है। सिविल सर्जन डॉ. परमिंदर सिंह सिद्धू के कार्यकाल के दौरान इन इमारतों की प्रगति के लिए कमेटी भी बनाई गई थी। उस टीम ने देखा था कि किस बिल्डिंग में किस चीज की जरूरत है। फिर कमेटी द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं के अनुसार अपनी सिफारिश दी गई थी। जोकि आज तक न ही पूरी हुई, न ही कोई काम आगे बढ़ पाया।

सिविल अस्पताल में मरीजों का दबाव कम करने और लोगों को उनके आसपास ही सेहत सुविधाएं देने के मकसद से बनाए गए थे हेल्थ सेंटर, लेकिन एक भी सुचारू रूप से काम नहीं कर रहे, जबकि कई इलाकों में डेंगू-वायरल से लगातार बढ़ रहे मरीज

ज्यादातर हेल्थ सेंटरों में न स्टाफ और न हीं उपकरण, खानापूर्ति के लिए चला दी गईं डिस्पेंसरी

हर सेंटर पर चाहिए विशेषज्ञ डॉक्टर: अर्बन कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में चार स्पेशियलिटी पर मुख्य ध्यान है। इसमें मेडिसिन, सर्जरी, पीडियॉट्रिक्स और गाइनीकोलॉजी के स्पेशलाइज्ड डॉक्टर होने चाहिए। ताकि मुख्य समस्याओं को स्पेशलाइज्ड डॉक्टर हल कर सकें। इसके अलावा ऑपरेशन थिएटर, लेबर रूम, एक्स-रे, पैथ लैब की सुविधा भी होनी चाहिए। वहीं, इन अर्बन कम्युनिटी हेल्थ सेंटर्स में आम लोगों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए कम कीमत में उपचार उपलब्ध करवाना है। लेकिन राज्य के स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन हॉस्पिटल्स में भी प्राइवेट पार्टनरशिप को बढ़ावा देने पर विचार चल रहा है। इसके लिए लुधियाना के लोकल राजनेताओं ने हेल्थ मिनिस्टर के सामने भी प्रस्ताव रखा है। जिस पर विचार भी चल रहा है। लेकिन बड़ा सवाल है कि सरकारी बिल्डिंग का प्राइवेटाइजेशन होने से क्या आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी?

सुभाष नगर

बिल्डिंग तैयार लेकिन न स्टाफ, न ही मेडिकल उपकरण

30 बेड वाले अर्बन कम्युनिटी हेल्थ सेंटर(यूसीएचसी) हॉस्पिटल सुभाष नगर में बस्ती जोधेवाल के प्राइमरी हेल्थ क्लीनिक को शिफ्ट किया गया है। 2017 से यहां पर चल रही है। लेकिन दो सालों में भी यहां न तो मेडिकल केयर के उपकरण पहुंचे, न ही परमानेंट स्टाफ पहुंचा। यहां तक कि प्राइमरी हेल्थ क्लिनिक में भी सिर्फ एक डेंटिस्ट है। उनके पास भी डेंटिस्ट्री के कोई उपकरण नहीं हैं। आसपास के लोग वायरल, बुखार,जुकाम की ही दवाइयां लेकर आ जाते हैं। ये डॉक्टर सोमवार से बुधवार को सुभाष नगर में लोगों की जांच और वीरवार से शनिवार सिविल हॉस्पिटल में ऑपरेशन करती हैं।

सेक्टर-32: हॉस्पिटल में परमानेंट स्टाफ की कमी

शिमलापुरी : अधूरी बिल्डिंग में ईएसआई की डिस्पेंसरी

20 के बाद हो जाएंगे शुरू : सेहत मंत्री


वर्धमान मिल के नजदीक 32 सेक्टर में मदर चाइल्ड हॉस्पिटल का नींव पत्थर 2015 में रखा गया था। 2017 में बिल्डिंग तैयार हुई। 30 बैड की क्षमता वाले इस हॉस्पिटल में परमानेंट स्टाफ की कमी है। टेंपरेरी तौर पर ही यहां पर स्टाफ है। वहीं, इसी जगह पर ही ईएसआई की डिस्पेंसरी नंबर-2 भी चलाई जा रही है। मेडिकल केयर की पूरी सुविधाएं भी इस हॉस्पिटल में नहीं हैं।

जनता नगर से ईएसआई की 7 नंबर डिस्पेंसरी को शिमलापुरी में अर्बन कम्युनिटी हेल्थ सेंटर की अधूरी बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिया गया। इसे 2017 में यहां पर शिफ्ट किया गया था। बिल्डिंग के कुछ कमरों में तो मेडिकल स्टाफ बैठ कर लोगों का इलाज कर रहे हैं, लेकिन अधूरी बिल्डिंग होने से स्टोर में रखे हुए सामान व अन्य चीजों के चोरी होने की समस्या है।

बिजली के बिल पर कनफ्यूजन : सरकार ने पहले प्राइवेट बिल्डिंग से निकाल कर सभी गवर्नमेंट डिस्पेंसरी व ईएसआई डिस्पेंसरी को खाली पड़ी सरकारी बिल्डिंग्स में भेजने का आदेश दिया था। इसके बाद इन बिल्डिंग्स में डिस्पेंसरी चलाने के लिए अनुमति तो दे दी लेकिन अब बिजली बिल के भुगतान के लिए समस्या का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि ईएसआई में पंजाब सरकार का 12 फीसदी और ईएसआई कॉरपोरेशन का 88 फीसदी का योगदान है।

जवद्दी: ईएसआई डिस्पेंसरी नं. 4 हफ्ता पहले शुरू हुई

सीएमओ ऑफिस: 10 बेड क्षमता, काम दफ्तर का

ओपीडी शुरू, अन्य सुविधाएं भी जल्द : सीएमओ


वेस्ट हलके में साल 2015 में अर्बन कम्युनिटी हेल्थ सेंटर की बिल्डिंग बनाने की शुरुआत हुई। 6-8 करोड़ रुपए खर्चकर 2017 में तैयार हो गई, लेकिन दो साल से सरकार ने टेकओवर नहीं किया। 30 बेड की क्षमता वाले इस हॉस्पिटल से पांच हजार से भी ज्यादा परिवारों को फायदा मिल सकता है। अब 31 अक्टूबर को ईएसआई की डिस्पेंसरी नं. 4 को यहां शिफ्ट किया गया है।

सिविल सर्जन दफ्तर में बनी 10 बैड की क्षमता वाली नई बिल्डिंग में फिलहाल कोई भी ओपीडी तक नहीं चल रही। बिल्डिंग में दफ्तरी काम ही हो रहा है। शहर के मध्य में स्थित होने से ज्यादा लोग इसका फायदा ले भी सकते हैं। जिससे कि उन्हें सिविल हॉस्पिटल लुधियाना की तरफ न जाना पड़े। लेकिन सरकार ये भी करने में सफल नहीं हो रही है।

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