डेवलपमेंट पर 649 करोड़ होंगे खर्च, पिछला रिकॉर्ड नहीं किया सार्वजनिक
नगर निगम की तरफ से आज साल 2020-21 के लिए 1044 करोड़ का बजट पेश किया जाने वाला है और इस बार बजट में से 649 करोड़ रुपए सिर्फ डेवलपमेंट के लिए रखे हैं। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि निगम में बजट को लेकर तो हर साल 100 से 200 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हो रही है, परंतु अलॉट किए जाते कामों को लेकर कोई पारदर्शिता नहीं हैं। यहां तक कि शहर में 2019-20 के दौरान कहां पर कौन सी सड़क, सीवरेज लाइन से लेकर कहां-कहां पर पिछले साल के रखे बजट में से 544 करोड़ रुपए खर्च किया गया है, इसकी एक भी जानकारी आज तक सार्वजनिक नहीं हो पाई है। ऐसे में सवाल ये भी खड़ा है कि हाउस मीटिंग में मौजूद रहते सत्ताधारी और विपक्ष के कौंसलर भी पारदर्शिता को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं। नतीजा ये सामने है कि आज भी शहर की सड़कें टूटी हैं, पार्कों का बुरा हाल है, सीवरेज जाम और गंदे पानी की समस्या बरकरार है।
हाउस मीटिंग में सत्ताधारी-विपक्ष के कौंसलर भी पारदर्शिता को लेकर रहते हैं चुप
निगम बजट आज
कोर कमेटी की मीटिंग में फैसला, सभी कौंसलर देंगे सिर्फ बजट पर अपनी राय
शहर को स्मार्ट बनाना है तो बजट का एलोकेशन ध्यान से करना चाहिए। वहां के लिए बजट जरूर दें जहां सबसे ज्यादा बुरा हाल है। शहर अब दिल्ली की तरह बनने जा रहा है, पर अभी तक निगम के पास डिजाइनिंग डिपार्टमेंट नहीं है। -संजय गोयल, आर्किटेक्ट
बजट का एलोकेशन ध्यान से करना चाहिए
वॉर्डों की समस्याओं पर बाद में करेंगे चर्चा
बजट की हाउस मीटिंग से पहले मेयर बलकार सिंह संधू ने कोर कमेटी के साथ बुधवार को कैंप ऑफिस में मीटिंग की। इस दौरान कोर कमेटी के साथ ये फैसला हुआ है कि कौंसलर सिर्फ बजट पर ही अपनी राय देंगे। जबकि वॉर्डों में आ रही समस्याओं को लेकर इसके बाद जल्द बुलाई जाने वाली हाउस मीटिंग में रखने को फैसला लिया गया है। कोर कमेटी की मीटिंग में फैसला हुआ है कि हर पार्टी के तीन-तीन कौंसलर मीटिंग में बजट पर तर्क-वितर्क देंगे, इसके बाद ही बजट पर फाइनल मोहर लगेगी। यहां ये भी बता दें कि पिछले साल 2019-20 की बजट हाउस की मीटिंग इन दिनों में बुलाई गई थी, जो सिर्फ पांच मिनट चली और बजट का एक पेज पढ़ते हुए हंगामा होने पर बजट को पास करते हुए मेयर और निगम कमिश्नर सीटों से उठकर चले गए थे। लेकिन इस बार बजट मीटिंग में ऐसा न हो इसलिए कोर कमेटी से पहले ही मीटिंग करके मेयर संधू ने सब कुछ तय कर लिया है कि कौंसलर सिर्फ बजट पर ही बोलेंगे।
निगम के कामों को लेकर अफसर पारदर्शिता लाने को राजी नहीं है, क्योंकि इसके पीछे कारण एक ये भी है कि पार्षद इस मुद्दे पर बोलते ही नहीं है। ऐसे में अगर निगम के फाइनांशियल कामों को लेकर पारदर्शिता हो जाती है तो हाउस मीटिंग में कौंसलरों द्वारा उठाए जाते सवालों का मौके पर ही अफसरों को जवाब देना पड़ेगा। इसी कारण आज तक नगर निगम में पारदर्शिता लाने के लिए निगम की वेबसाइट पर अलॉट किए गए वर्क आर्डरों को सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है।