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पति, सास और ससुर ने मांगा दहेज तो मिली ये सजा, 5 लाख की कार की थी मांग

हादसे के समय विवाहिता 6 माह की थी गर्भवती, कई बार खाने को नहीं देते थे रोटी।

Dainik Bhaskar

Dec 19, 2017, 05:13 AM IST
10-year jail term for husband-father-in-law for dowry murder

लुधियाना. दहेज को लेकर गर्भवती की हत्या के मामले में एडिशनल सेशन जज वरिंदर अग्रवाल ने तीन दोषियों को सजा सुनाई। कोर्ट ने मरने वाली महिला ममता के पति संदीप कुमार, सास ममता रानी व ससुर विजय कुमार को 10-10 साल की कैद व हर एक को 55 हजार रुपए जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने पर दोषियों को 2 साल 3 महीने की अतिरिक्त सजा भुगतने पड़ेगी। जुर्माने की कुल राशि से 1 लाख रुपए की राशि मरने वाली महिला के परिवार को देने के हुक्म दिए गए हैं। ममता के भाई राजीव शर्मा के बयानों पर थाना बस्ती जोधेवाल की पुलिस ने तीनों लोगों के खिलाफ जुलाई 2014 में दहेज हत्या के आरोप में मामला दर्ज कर तीनों को गिरफ्तार कर लिया था।

हादसे के समय विवाहिता 6 माह की थी गर्भवती, कई बार खाने को नहीं देते थे रोटी

पुलिस को दी शिकायत में राजीव शर्मा ने बताया था कि उसकी बहन ममता की शादी न्यू बसंत नगर काकोवाल रोड लुधियाना के रहने वाले संदीप कुमार सोनू पुत्र विजय कुमार के साथ हुई थी। संदीप अपने भाई मंदीप के साथ रेलवे स्टेशन पर पल्लेदारी करता था। शादी के समय ममता के ससुर परिवार ने 19 मिलनियों की मांग की थी। मौके पर सोने की अंगूठियां व कंबलों की 15 मिलनियां दे दी गई। बाकी की 4 मिलनियों का सामान ममता की सास अपने साथ ये कह कर ले गई थी कि वह खुद अपने परिवार को मिलनियां बांट देगी। कुछ दिन बाद ही ममता का फोन आया कि उसके सुसराल वाले कम दहेज लाने को लेकर ताने दे रहे हैं। संदीप ने शादी के कुछ समय बाद ही अपना कारोबार चलाने के लिए 5 लाख रुपए की मांग करनी शुरू कर दी थी। ससुराल वाले दहेज की मांग को लेकर ममता के साथ मारपीट करते और मानसिक व शारीरिक तौर पर परेशान भी करते। कई बार उसे खाने के लिए रोटी भी नहीं दी जाती थी। इसी दौरान दूसरी बहन मीनू शर्मा के देवर की शादी थी। वे ममता को शादी का कार्ड देने के लिए लुधियाना आए थे। उसकी बहन ममता अकेली ही शादी पर आ गई। उसका पति व परिवार का कोई भी अन्य सदस्य नहीं आया।

उसके बाद कोई उसे लेने भी नहीं आया। कई बार फोन पर उसके पति संदीप से बात की गई। लेकिन हर बार वह दहेज की मांग पूरी करने की बात कहता रहा। ममता उस समय प्रेग्नेंट थी। तब उसका पति व उसके परिवार के अन्य लोग उसे गर्भपात कराने के लिए मजबूर कर रहे थे। इसी दौरान उसका देवर अपनी पत्नी के साथ ममता को लेने के लिए आया और ले गया। उसके बाद वे संदीप कुमार को 50 हजार रुपए दे आए। कुछ दिन बाद ही उसके पड़ोस में रहने वाली बिचौलन का फोन आया कि ममता की मौत हो गई है। उसने पुलिस को बताया था कि उसकी बहन ने दहेज की मांग से परेशान होकर ही आत्महत्या की है।

न्याय प्रणाली में बढ़ा विश्वास

महिला के देवर और उसकी पत्नी को छोड़ दिया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से दोनों के खिलाफ कोर्ट में अपील दायर की जाएगी। कोर्ट ने सराहनीय फैसला दिया है। जनता का विश्वास न्याय प्रणाली में मजबूत हो रहा है। -कार्तिकेय स्वरूप, एडवोकेट

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