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30 हजार स्ट्रीट डॉग्स की हुई नसबंदी, अब 25 हजार की नसबंदी की तैयारी

नसबंदी का काम पूरा कर लिया गया था। इसके बाद 5228 और डॉग की नसबंदी का काम पूरा हो चुका है।

Danik Bhaskar | Dec 10, 2017, 07:20 AM IST

लुधियाना. लोगों को स्ट्रीट डॉग से राहत देने के लिए निगम ने नसबंदी के नाम पर 2 करोड़ रुपए बर्बाद कर दिए। बीते दो साल के अंदर निगम अफसरों का दावा है कि 30 हजार स्ट्रीट डॉग की नसबंदी हो चुकी है। अप्रैल 2017 तक सिटी एरिया से 12283 डॉग और 12717 फीमेल डॉग की नसबंदी हो चुकी है। यानी कुल 25 हजार डॉग की नसबंदी का काम पूरा कर लिया गया था। इसके बाद 5228 और डॉग की नसबंदी का काम पूरा हो चुका है।

हैरानी जनक बात है कि शहर के किन एरिया में नसबंदी का काम पूरा हो चुका हैं, इसका डाटा तो निगम अफसरों और नसबंदी कर रही कंपनी के पास है। इसके लिए निगम अफसर पॉलिटिशियन्स को जिम्मेदार ठहरा रहे है, क्योंकि जिस तरह उन्होंने एरिया वाइज नसबंदी का प्लान तैयार किया था। कौंसलर और पॉलिटिशियन्स ने वैसे काम नहीं होने दिया। सिफारिशी फोन के चलते उन्हें योजना छोड़ उनके अनुसार काम करना पड़ा है। सिटी एरिया में एक बार फिर से 25 डॉग की नसबंदी का काम शुरू होने जा रहा है। सवाल यही है कि आखिरकार अब दोबारा 2 करोड़ पब्लिक फंड काे बर्बाद करने की तैयारी है, क्योंकि जनवरी महीने तक निगम चुनाव होने जा रहे हंै, ऐसे में दोबारा फिर सिफारिशी फोन नसबंदी पर भारी पड़ने वाले हैं, उन्हें कैसे रोका जाएगा।

यह बात ठीक है िक अभी तक नसबंदी के काम को एरिया वाइज नहीं किया जा सका, इसलिए यह कहना मुश्किल है कि सिटी के कौन से एरिया में नसबंदी का काम पूरा हो चुका है। इस बार नसबंदी का काम सिटी के आउटर एरिया से शुरू कर धीरे धीरे कोर सिटी की तरफ लाया जाएगा। जहां तक कंपलेंट की बात है कि उसके लिए एक अलग से व्हीकल लेने का प्रपोजल रखा जाएगा। ताकी कंपनी अपना काम तेजी से करती रहे। -डाॅ.वाईपी सिंह, वेटरनरी अफसर।

डॉग्स की नसबंदी करने के लिए पूरे शहर में निगम के पास सिर्फ एक ही सेंटर डेयरी काॅम्प्लेक्स में मौजूद है। पूरे शहर से डॉग्स को पकड़ कर यहीं पर लाया जाता है और फिर वापस उसी एरिया में छोड़ने के लिए जाना पड़ता है। इसके लिए कंपनी को 20 किलोमीटर तक सफर करना पड़ता है। ऐसे में कई एरिया में बीच में छूट जाते हैं। इसका एक ही हल है कि निगम शहर में नसबंदी के लिए जोन वाइज सेंटरों का निर्माण करे, ताकि एरिया के हिसाब से नसबंदी का काम तेजी से निपटाया जाए। इससे रिजल्ट जल्द मिलेंगे और पब्लकि को राहत भी मिलेगी।

यहां बता दें कि निगम ने शहर में स्ट्रीट डॉग की नसबंदी का टेंडर साल 2014 में शुरू किया था, लेकिन नसबंदी के लिए उचित जगह मिलने के कारण यह काम फरवरी 2015 में शुरू हो सका। निगम हेल्थ ब्रांच अफसरों ने अंदाजा से 25 हजार स्ट्रीट डॉग की नसबंदी का टारगेट रखा था। 760 रुपए प्रति डॉग के हिसाब से दो करोड़़ रुपए रखे गए थे। नसबंदी के काम को एरिया वाइज रखा गया था, पहले एक एरिया में नसबंदी करने के बाद दूसरे एरिया को छेड़ा जाए, लेकिन पॉलिटिकल प्रेशर ने पूरा खेल बिगाड़ दिया, हर कौंसलर अपने एरिया में डॉग की नसबंदी का सिफारिश करने लगे। इसी प्रेशर के कारण नसबंदी एरिया वाइज नहीं हो सकी और सिफारिशी फोन से पिक एंड चूज की नीति चली। अब निगम के पास यह रिकॉर्ड नहीं है कि किन एरिया में यह नसबंदी का काम पूरा हो चुका हैं।