--Advertisement--

गेहूं और धान की फसल पर 6 लाख किसानों को 300 करोड़ का होगा फायदा

आमदन को बढ़ाने के लिए फसलों की कीमतों को लागत से डेढ़ गुना करने की घोषणा की है।

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 05:58 AM IST
600 million farmers will be benefitted of 300 crore

मोगा. मोदी सरकार का आखरी बजट बेशक किसानों के लिए सुहावने सपने लेकर आ रहा है परंतु किसान यूनियन इतने में संतुष्ट नहीं हैं। उनका मानना है कि फसलों की कीमतों को सूचक अंक के साथ ही जोड़ा जाना चाहिए क्योंकि सरकार के फसलों की लागत के आंकलन हकीकत से कम होते हैं। ऐसे में डेढ़ गुना कीमतें भी काफी नहीं होंगी। यहां बता दें कि मोदी सरकार ने वर्ष 2017-18 के केंद्रीय बजट में किसानों के आमदन को बढ़ाने के लिए फसलों की कीमतों को लागत से डेढ़ गुना करने की घोषणा की है।

इस संबंधी भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां के राज्य मुख्य सचिव सुखदेव सिंह कोकरी का कहना है कि सरकार ने जो फसलों की लागत का आंकलन करना है वह हकीकत से कोसों दूर होगी। ऐसे में किसानों को फायदा नहीं होगा। मोदी सरकार द्वारा मानी गई मांग को ही लागू करना चाहिए, जो स्वामीनाथन की रिपोर्ट के अनुसार फसलों की कीमत को सूचक अंक के साथ जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि यदि व्यापारियों के माल की कीमतों को सूचक अंक के साथ जोड़ा जा सकता है तो किसान की फसल को क्यों नहीं? इस संबंधी कृषि विज्ञान केंद्र के डाॅ. हरजीत सिंह का कहना है कि फसलों की कीमत को अगर लागत से डेढ़ गुना कर दिया जाता है तो जिले के लगभग 6 लाख किसानों को गेहूं और धान की दोनों फसलों को मिलाकर 300 करोड़ रुपए का फायदा होगा। ग्रामीण हाट को लेकर पूर्व कृषि मंत्री जत्थेदार तोता सिंह का कहना है कि यह पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का ही सपना है। 1998-99 में हमारी सरकार ने गांवों में फोकल प्वाइंट बनाने का काम शुरू किया था। इसका मकसद था कि गांवों को किसान सीधे अपनी पैदावार खरीददार को बेच सकें। लेकिन बादल सरकार का यह सपना इसलिए साकार ना हो सका कि दूसरी बार उनकी सरकार नहीं बनी और जब सरकार बनी तो केंद्र में यूपीए सरकार 10 साल तक चली।


जिले के 390 गांवों को फायदा
अगर 22000 ग्रामीण हॉटों की मोदी सरकार की यही योजना है तो इससे न केवल गांवों की आर्थिकता बढ़ेगी, बल्कि गांवों को भी आसानी से डिजिटल किया जा सकेगा। इससे मोगा जिले के करीब 390 गांव निवासियों को फायदा हो सकता है। किसान क्रेडिट कार्ड में मछली पालकों व पशुपालकों को शामिल करने से इस स्कीम तहत जिले के 96 हजार मछली पालक व 1 लाख 25 हजार पशुपालकों को लाभ होगा। विदेशों की तर्ज पर आर्गेनाइजेशन खेती का कदम बढिय़ा साबित हो सकता है परंतु पंजाब में इसे लागू करने में दिक्कत आएगी। पंजाब दा जट्ट जो वट्ट पिछे लड़दा है और कत्ल कर देता है, वो सांझी जमीन पर खेती कैसे कर पाएगा।

ग्रीन क्रांति से 50 हजार आलू उत्पादकों को होगा फायदा
हार्टीकल्चर के माहिर प्रोफेसर हरगोपाल सिंह ने बताया कि अगर आलू की संभाल व प्रोसेसिंग का काम शुरू होता है तो जिले के 50 हजार आलू उत्पादकों को फायदा होगा। इसकी संभाल की लागत कम होगी तो उत्पादक को फायदा होगा। प्रोसेसिंग के काम से इसकी मांग बढ़ेगी और मांग बढ़ने से कीमतें बढ़ेंगी, जिससे उत्पादकों की कम कीमतों वाले गिले समाप्त हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि इससे एक खतरा बढ़ सकता है, वह है कि आलू के उत्पादन को बढ़ाने के लालच में किसान खेतों में नमक डालने लगते हैं, जिससे जमीन बंजर हो जाती है।

कृषि उद्योग स्थापित होने पर ही मिलेगा लाभ
20 एकड़ में आलू की खेती करने वाले किसान अनरबीर सिंह ने कहा कि जब तक सरकारी कोल्ड स्टोर नहीं बनते, इसकी किमत को सरकार निर्धारित नहीं करती और कृषि उद्योग स्थापित नहीं होते तब तक इसका कोई फायदा नहीं होने वाला। उत्पादक का आलू तो सड़कों पर ही बिखरता है।

X
600 million farmers will be benefitted of 300 crore
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..