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ट्रूडो एंटी कंजर्टिव पार्टी नहीं पेश करेगी खालिस्तान विरोधी प्रस्ताव, सिख वर्ल्ड आर्गेनाइजेशन का दबाव

सिख वर्ल्ड आर्गेनाइजेशन ने पार्टी को पत्र लिखकर कहा कि उनके आंदोलन से 20 साल से कैनेडा में कोई हिंसक घटना नहीं हुई है।

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 08:22 AM IST
ओंटारियो खालसा दरबार डस्की रो ओंटारियो खालसा दरबार डस्की रो

मोगा. पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री मलकीत सिंह सिद्धू की कनाडा में हत्या के प्रयास में 10 साल सजा काट चुके जसपाल सिंह अटवाल के नाम पर कैनेडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को संसद में घेरने वाली कंजर्वेटिव पार्टी अब खालिस्तान के विरोध में प्रस्ताव पेश नहीं करेगी। ये फैसला उसने सिख वर्ल्ड आर्गेनाइजेशन के कहने पर किया है, जिसके साथ वह अटवाल के संबंध होने के आरोप लगा रही थी। ट्रूडो के भारत दौरे के समय अटवाल को डिनर के लिए आमंत्रण देने को लेकर उठे विवाद के बाद 27 फरवरी को संसद में कंजर्वेटिव तथा लेबर पार्टी ने प्रधानमंत्री को अटवाल प्रकरण में घेरकर उनका बयान मांगा था, जिसका ट्रूडो ने ऑन रिकॉर्ड जवाब भी दे दिया था।

ये था प्रस्ताव में प्रस्ताव में

- भारतीय सिखों व कैनेडाई मूल के लोगों द्वारा कैनेडा के विकास में डाले योगदान की बात करने के अलावा हर किस्म के आतंकवाद व खालिस्तान की निंदा की गई थी। इसे सांसद औटूल ने पेश करना था। सिख वर्ल्ड आर्गेनाइजेशन ने पार्टी को पत्र लिखकर कहा कि उनके आंदोलन से 20 साल से कैनेडा में कोई हिंसक घटना नहीं हुई है। इसलिए प्रस्ताव को रोका जाए।

- ओंटारियो खालसा दरबार डस्की रोड गुरुद्वारा के गुरप्रीत सिंह बल्ल ने भी कंजर्वेटिव पार्टी के प्रधान एंड्रयू सचीर को पत्र लिखकर एतराज जताया था। इसी पार्टी के ब्रिटिश कोलंबिया (बीसी) से सिख एमपी हरप्रीत सिंह ने भी पार्टी को ऐसा न करने को कहा था।

- सचीर ने कहा है कि पंजाबी कैनेडाई नागरिकों की भावनाओं को देखते हुए वे प्रस्ताव नहीं ला रहे। काबिले गौर है कि कंजर्वेटिव व लेबर प्रोग्रेसिव पार्टियां ही अब तक बारी-बारी सरकारें बनाती आ रही थीं। पहली बार लिबरल पार्टी की सरकार पंजाबियों के बलबूते बनी। इस करके सभी पार्टियां पंजाबी भाईचारे को नाराज नहीं करना चाहतीं।