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टीवी और मोबाइल से भले ही इंसान दुनिया से जुड़ रहा मगर परिवार से टूट रहा : सुरिंदर शर्मा

फेमस हास्य कवि पदमश्री सुरिंदर शर्मा ने समाज से जुड़े कई अहम मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय कुछ इस तरह रखी।

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 05:43 AM IST
Bhaskar Interview with Comedian Surinder Sharma

लुधियाना. कॉमेडी का तो आज भी अपना स्टैंडर्ड है, लेकिन कुछ लोगों ने उसका लेवल गिरा दिया है। कई कॉमेडी शाेज में हंसी से ज्यादा फूहड़ता परोसी जा रही है, जिसने रिश्तों की मर्यादा तक खत्म कर दी है। इसके अलावा सीरियल्स में नेगेटिव किरदारों ने रिश्तों की गरिमा को खत्म कर दिया है। फेमस हास्य कवि पदमश्री सुरिंदर शर्मा ने समाज से जुड़े कई अहम मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय कुछ इस तरह रखी। वे शनिवार रात शहर में हास्य कवि सम्मेलन में शामिल हुए।


चिर-परिचित अंदाज में बोले सुरिंदर

अपने चिर-परिचित अंदाज में शर्मा बोले, अगर समाज और रिश्तों को बचाना है तो सीधी-सी बात है टीवी को बंद करना होगा। टीवी के जरिए एक आर्टिस्ट को अपना टैलेंट दिखाने में भले ही फायदा मिलता हो, लेकिन समाज को इसका बहुत बड़ा नुकसान हो रहा है। टीवी और मोबाइल से भले ही इंसान दुनिया से जुड़ रहा है, मगर परिवार से टूट रहा है।

मोदी की बुलेट ट्रेन फिजूलखर्ची

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बुलेट ट्रेन के ड्रीम प्रोजेक्ट पर उन्होंने तंज किया कि फिजूलखर्ची अपने पैसे से होनी चाहिए, जापान से उधारी लेकर नहीं। ट्रेनों में आज भी आलम यह है कि लोग खड़े होकर सफर करने को मजबूर हैं। पहले उसका समाधान होना चाहिए। मोदी खुद तो ज्यादातर विदेश दौरे पर रहते हैं, मैं तो कहता हूं कि अच्छा ही है, क्योंकि जितना देश में रहेंगे, उतनी ही बर्बादी करेंगे। जिंदगी का फलसफा यही है कि जड़ों की सिंचाई करो, फलों की नहीं। जड़ों की सिंचाई से फल खुद ही ठीक आएंगे। गरीब को दो रुपए किलो गेहूं मत दो, बल्कि इस लायक बनाओ कि वे पंद्रह रुपए किलो भी खरीद सके। सरकार गरीबी बनाए रखने की नहीं, गरीबी मिटाने की स्कीम बनाए।

जीवन नहीं, हमारी सोच तनाव-भरी है
हमारा जीवन तनाव-भरा नहीं है, बल्कि सोच तनाव-भरी है। आज से 25 साल पहले तक इतनी सुख सुविधाएं नहीं होती थीं, लेकिन फिर भी लोग खुश रहते थे। आज दूसरे का सुख हमारे तनाव का कारण हो गया है। आज मेरे पास जो भी है, उसमें ही खुश रहता हूं और इस उम्र में फिटनेस का राज भी यही है। मैंने कभी लालसा रखी नहीं और चलना भी नहीं छोड़ा। देश-विदेश में कई शोज कर चुका हूं, बस एक तमन्ना है कि पूरे विश्व में शांति हो। इंसान एक-दूसरे को समझे। धर्मों में न बांटा जाए।

नशे के खात्मे को एकजुट हों
पंजाब में बढ़ रहे नशे को लेकर कहूंगा कि समाज को एकजुट होना होगा। सरकार से नहीं बल्कि एक-दूसरे से ही उम्मीदें रखनी होंगी। नशा एक ऐसा जहर है जो प्राण तक ले लेता है और कई घरों के चिराग बुझा देता है। पंजाब को नशे से मुक्ति दिलाने को समाज अगर एक साथ जुड़ जाए तो एक बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

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